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Articles tagged with: dushyant

दिल के झरोखे से..., है कुछ खास...पहला पन्ना »

[7 Feb 2013 | Comments Off on एक नज़्म उतरी है मेरे आंगन में | ]
एक नज़्म उतरी है मेरे आंगन में

– दुष्यंत
एक नज्म उतरी है मेरे आंगन में
कहो तो सहेज लूं , कहो तो रहने दूं
कहां वकत मेरी कि
दरिया किसी सहरा में बहने दूं
दरिया किसी की सुनते कब हैं
दरिया, बादल, परबत और हवाएं
मेरी नज्मों के कारखाने में
सब कारीगर हैं
कह दो तुम तो इन सबको पास बुला लूं मैं
एक नज्म जो उतरी है मेरे आंगन
उसे लफ्जों का पैरहन दे दूं
सजा दूं किसी गुलदान में
रख दो करीने से तुम उसे किसी बुकशेल्फ में !
शायर के बारे में कुछ और है इन पन्नों पर – दुष्यंतलाइव

खेल-तमाशा, है कुछ खास...पहला पन्ना »

[16 Jan 2013 | Comments Off on न ख़बर हैं, न गब्बर (विलेन) हैं, शायर हैं निदा फाजली! | ]
न ख़बर हैं, न गब्बर (विलेन) हैं, शायर हैं निदा फाजली!

बेबाक : खंजर ना बने खबर
– दुष्‍यंत
निदा फाजली को जिस दिन देश का बडा स्‍तम्‍भकार हमारे समय का कबीर बता रहा था, उसके अगले दिन इंटरनेट और टीवी पर एक विवादास्‍पद बयान के लिए उन्‍ही निदा को खबर बनाया जा रहा था। कबीर को भी उनके समय में कम ही लोगों ने समझा था, तो क्‍या निदा को भी कम ही लोग समझते हैं।
‘पाखी’ दिल्‍ली से प्रकाशित चर्चित मासिक साहित्यिक पत्रिका है, प्रेम भारद्वाज उसके संपादक है, पिछले सालों में कई शानदार अंकों के जरिए उन्‍होंने ‘पाखी’ की पहचान खडी …

है कुछ खास...पहला पन्ना »

[21 May 2011 | One Comment | ]
बेहतर दुनिया एक असंभव ख्वाब है!

वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, अफसानानिगार और पोएट डॉ. दुष्यंत का एक और लेख, चौराहा की ओर से शुक्रिया.