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Articles tagged with: संस्मरण

यादें, है कुछ खास...पहला पन्ना »

[3 Dec 2014 | Comments Off on पहिला इंजेक्शन तो `डीडीएलजे’ ही दिहिस… | ]
पहिला इंजेक्शन तो `डीडीएलजे’ ही दिहिस…

दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे की रिलीज को जल्द ही 1000 हफ्ते पूरे हो जाएंगे। एक मित्र ने याद दिलाया तो मोहल्ला लाइव पर छपा एक पुराना लेख चौराहा पर साझा कर रहे हैं।
– चण्डीदत्त शुक्ल
20 अक्टूबर, 1995… पक्का यही तारीख थी। याद इसलिए नहीं कि इस दिन डीडीएलजे देखी थी। भुलाइ इसलिए नहीं भूलती, क्योंकि इसी तारीख के ठीक पांच दिन बाद सलीम चच्चा ने पहली बार इतना ठोंका-पीटा-कूटा-धुना-पीसा था कि वो चोट अब भी सर्दी में ताज़ा हो जाती है। हुआ यूं कि सलीम चच्चा बीज के लिए …

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[18 Apr 2011 | Comments Off on गुसलखाना और फेक आई डी का रहस्य | ]
गुसलखाना और फेक आई डी का रहस्य

एक रोचक संस्मरण, लेखिका-रश्मि रवीजा

तब दोनों ऐसे  मासूम दिखते थे

शीर्षक तो इण्डिया टी.वी. के तर्ज़ पर लग रहा है…पर पोस्ट बड़ी घरेलू सी है.
संस्मरण है। ऐसे ही पढ़िए। पति और बच्चों को बेवकूफ बनाने की अलग से कोई कोशिश नहीं की…पर अनजाने ही वे लोग धोखा खा बैठे…:)
कुछ साल पहले का वाकया है..एक दिन मेरे दोनों बेटे किंजल्क और कनिष्क खेल कर आए और नहाने जाने की तैयारी करने लगे…मैने यूँ ही पूछ लिया …”कौन जायेगा…..गुसलखाना ?” और दोनों भाग कर मेरे पास आ गए…”हम चलेंगे…हम चलेंगे “…अब मुझे लगा …

यादें, स्मृति-शेष, है कुछ खास...पहला पन्ना »

[18 Apr 2011 | 3 Comments | ]
ग़म की बारिश, नम-सी बारिश

कई बार कुछ लिखा हुआ दस्तावेज बन जाता है। उसकी मिसाल देना आसान नहीं होता। गीत चतुर्वेदी ने 9 जुलाई 2007 को दैनिक भास्‍कर में गुरुदत्त पर एक लेख लिखा, आप पढ़िए और बताइए, क्या ये पुराना है? समय भी जिस लिखे के आगे विवश होकर थम जाए, ऐसी रचनाएं कम ही पढ़ने को मिलती हैं। हिंदी के चर्चित कवि-कथाकार-रचनाकार गीत चतुर्वेदी के ब्लॉग वैतागवाड़ी से साभार यह रचना चौराहा पर प्रस्तुत है : मॉडरेटर

वह भयानक रात थी, जब उसकी आंखें नशे से डोल रही थीं और वह रिसीवर पर बाक़ायदा …

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[11 Apr 2011 | Comments Off on घर आया था मेरा जुलाहा | ]
घर आया था मेरा जुलाहा

(पूर्णिया और अब अररिया जिले के औराही हिंगना गांव में 4 मार्च 1921 में जन्मे फणीश्वर नाथ रेणु ने 11 अप्रैल 1977 को पटना के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली थी। आज उनकी पुण्यतिथि है। इस अवसर पर गिरींद्र नाथ झा का ये संस्मरण पेश कर रहे हैं। गिरींद्र ओजस्वी युवा पत्रकार हैं। इन दिनों आई नेक्स्ट में कार्यरत हैं। उनका ब्लॉग है अनुभव, जिसे पढ़ना हरदम रोचक और ओजस्वी अनुभव देता है।)

# गिरींद्र नाथ झा

“कहानी का हर पात्र उसी सड़क पर मेरा इंतजार कर रहा था। भले ही सड़कें धूल उड़ा रही थी लेकिन उस धूल में भी …