Home » Archive

Articles tagged with: शायरी

साहित्य-सिनेमा-जीवन »

[4 Apr 2011 | 2 Comments | ]
चौराहा पर पांच कवि

कविता की दुनिया में सन्नाटा हो, ऐसा बिल्कुल नहीं है। सच यह है कि प्रेमी और कवि, हर मोहल्ले की पूरी जनसंख्या के हिसाब से तकरीबन आधे तो होते ही हैं। ठीक वैसे ही, जैसे हंसी-मज़ाक में लोग कहते हैं–जवानी में कम्युनिस्ट,  अधेड़ावस्था में संघी/भाजपाई/ और बुढ़ापे में कांग्रेसी हो जाते हैं (यह महज मज़ाक है, दिल पे नहीं लेने का) । ख़ैर, कवियों / शायरों की बाढ़ में उम्र के अनुपात में कमी आती है, तो कई बार इज़ाफा भी होता है। मसलन–जवानी में गज़ल / कविताएं लिखने वाले …

दिल के झरोखे से..., साहित्य-सिनेमा-जीवन, है कुछ खास...पहला पन्ना »

[25 Mar 2011 | 12 Comments | ]
एक नज्म सा कुछ…

जरूरी आत्मकथ्य- ”बार बार दिल को समझाने की कोशिश की है कि मियां कितना भी कर लो, बडे मियां दुष्यंत कुमार की गजलगोई से आगे जाके उन्हीं के नाम से उन्ही की विधा में नाम नहीं पैदा कर सकते ..पर क्या करें मन है कि फिर फिर लौटता है ..फिर गजल या नज्म सा कुछ कहने की इस गुस्ताखी को अमल देने के लिए इक खयाल आता है कि चलो! वे बीसवी सदी के दुष्यंत थे, मैं इक्कीसवी सदी का दुष्यंत हूं ” …