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Articles tagged with: प्रेम

साहित्य-सिनेमा-जीवन, है कुछ खास...पहला पन्ना »

[15 Jun 2011 | 3 Comments | ]
पंद्रह साल पुरानी कविता / चांद और सागर

कहते हैं, कागज़ की उम्र ज़रा-कम ही होती है। यक़ीनन… लेकिन एहसासों की? सो, ऐसे ही है ज़िंदगी। तब, शायद बीए का स्टूडेंट था, सो पहले-पहले इश्क के फेर में पड़के एक लंबी-सी कविता लिख मारी। लंबे वाले, पीले, रफ़ और फेयर के बीच वाले किसी रजिस्टर के तीन-चार पन्नों में लिखी ये कवितानुमा बकवास. मामला बस इतना ही कि कन्या का नाम चंद्रमातुल्य था, अब सीधे तो चिट्ठी लिख नहीं सकते थे, सो कविता लिखी। कविता में चांद के सारे गुण-अवगुण-उलाहने सब शामिल थे। हमें यह भी बताना था …

दिल के झरोखे से..., संगीत-कला »

[28 Mar 2011 | One Comment | ]
मोहब्बत की राहों में आके तो देखो

देवाशीष प्रसून युवा हैं। दरभंगा के हैं, जयपुर में रहकर लेखन में सक्रिय। प्रखर सोचते-समझते-बोलते-लिखते हैं। पत्रकारिता की पढ़ाई की। समाज,  संबंधों और जीवन पर उनकी खुली नज़र है। प्रेम जैसे नाज़ुक और बहु-प्रशंसनीय, महत्व के विषय पर खूब-खूब समझदारी और उतनी ही तल्लीनता से लिखा गया उनका ये आलेख नज़रें खोलने वाला है। प्रसून की ये कृति चौराहा के पाठकों के लिए

कुछ बातें
किताबों को पढ़कर
नहीं समझी जा सकती।
पनियाई आँखों में दुःख हरदम नहीं है
अपने प्रियतम से विछोह की वेदना।
फिर भी, हृदय में उठती हर हूक से
न जाने, संवेदनाओं के …