Home » Archive

Articles tagged with: पंकज नारायण

है कुछ खास...पहला पन्ना »

[13 Apr 2011 | 3 Comments | ]
मम्मा…प्यारी मां…मम्मा

मां क्या है, कोई पूछे, उस जवान आदमी से, जिससे बचपन रूठकर बचपन में ही हाथ छुड़ाके भाग गया था। लोरी कैसी होती है, ट्रैफिक के शोर के बीच भकुआए खड़े गांववाले से पूछना, जो डीटीसी और ट्रक के बीच भागकर सड़क पार करना चाहता है। कंकरीट के जंगलों से खुरदुरी हुई दिल्ली में पहाड़ से आई हवा जब बेचैन होती है, तो चंदा मामा को तलाशती है…मां को पुकारती है। गांव से दूर, शहर की खोजबीन में तल्लीन इसी बचपन का नाम है पंकज नारायण। पंकज दिल से कवि …

संगीत-कला, साहित्य-सिनेमा-जीवन, है कुछ खास...पहला पन्ना »

[31 Mar 2011 | 4 Comments | ]
एक भटकता हुआ आत्म

कुछ लोग सचमुच `वर्सेटाइल’ होते हैं, महज कहने को ही नहीं। पंकज नारायण उनमें से एक हैं, उनका गद्य भी कविता की ख़ूबसूरती से सना-सजा होता है। पंकज फ़िल्मों से लेकर मंचों तक, पत्रकारिता से लेखन के अनगिनत विहानों तक विचरते हैं। मूलतः बिहार के रहने वाले हैं और फ़िलवक्त दिल्ली में जीवन-बसर, उन्हीं का लिखा हुआ कुछ चौराहा पर, पर इससे पहले भी बारी है उनके आत्मकथ्य की
याद नहीं, पहली बार कब अपने भीतर से ढिशुम-ढिशुम की आवाज़ आई कि तब से लड़ाई कभी थमी नहीं। रोज सोने से …