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Articles tagged with: निर्मल वर्मा

साहित्य-सिनेमा-जीवन, है कुछ खास...पहला पन्ना »

[24 Apr 2011 | One Comment | ]
चीड़ों पर बिखरी हुई निर्मल चांदनी…

डायरी के पन्नों पर निर्मल वर्मा
चीड़ों पर चांदनी पढ़ते हुए
– अखिलेश शुक्ल
1.
आज पुनः निर्मल वर्मा याद आ रहे हैं। ‘चीड़ों पर चांदनी’ के तीसरी बार अध्ययन की वजह से। जितनी बार उन्हें पढ़ता हूँ, उतनी ही बार वे स्वच्छ निर्मल रूप में सामने आ खड़े होेते हैं। पहली बार ‘चीड़ों पर चांदनी’ को संस्मरण समझकर पढ़ता रहा था। यह वह समय था, जब किसी पुस्तक/संग्रह को विधाओं की सीमा में बाँधने का चलन था। उस समय उनके अंदाज़-ए-तहरीर ने मुझे बेहद प्रभावित किया था। ‘चीड़ों पर चांदनी’ की तफ़सीलों …

दिल के झरोखे से... »

[30 Mar 2011 | 2 Comments | ]
निर्मल वर्मा की डायरी से!

निर्मल वर्मा की डायरी का ये हिस्सा हस्तक्षेप.कॉम के मॉडरेटर / एडिटर अमलेंदु उपाध्याय की ओर से मिला है। इसके साथ ही एक नोट भी है, वह गंभीर सवाल है…क्या है नोट, सबसे नीचे देखें, सबसे पहले निर्मल वर्मा की डायरी का अंश :
 
लूज़ वन्स फेस
…उसने लगभग घर से बाहर जाना बंद कर दिया। उसे दुपहरें अच्छी लगती थीं, वह अपने कमरे में बैठा रहता,खिड़की से आकाश को देखता रहता, अवसन्न और सूनी हवा में चीलें मंद गति में उड़ती रहतीं। पीला,अवसाद-भरा सूरज दिखाई देता।
खाने के बाद वह छोटी-सी नींद …