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Articles tagged with: दखल

है कुछ खास...पहला पन्ना »

[6 Apr 2011 | 2 Comments | ]
अन्ना होने के मायने हैं कुछ और

अन्ना होने के मायने महज वही नहीं है, जो दिख रहा है। 77 साल की उम्र में करप्शन के ख़िलाफ़ मोर्चा खोलने वाले अन्ना हजारे को नए युग का गांधी बताया जा रहा है। भले ही लोकपाल को लेकर उनकी चिंता से सहमति-असहमति के हज़ार पक्ष हों, पर इस बात से कौन इनकार करेगा कि इस बुजुर्ग को तमाम नौजवानों को शर्मसार कर दिया है, उनकी सुविधाभोगी और संतुष्टि की हद पार कर जाने वाली मानसिकता के लिए। युवा फोटो पत्रकार लाल सिंह ने दिल्ली के जंतर मंतर पर …

दिल के झरोखे से... »

[29 Mar 2011 | Comments Off on ‘एवरीबडी लव्स ए गुड कन्फ्लिक्ट जोनः पीवी राजगोपाल | ]
‘एवरीबडी लव्स ए गुड कन्फ्लिक्ट जोनः पीवी राजगोपाल

इंडिया फाउंडेशन फॉर रूरल डेवलपमेन्ट स्टडीज के तत्वावधान में सोपान स्टेप व्याख्यान माला की पहली कड़ी में प्रसिद्ध गांधीवादी कार्यकर्ता एवं एकता परिषद के संयोजक पीवी राजगोपाल ने जहां एक तरफ जल-जंगल-जमीन की बात की, वहीं साथ में किसानों और आदिवासियों के विस्थापन जैसे मसलों को भी अपनी बात चीत में शामिल किया।
पी साईनाथ की किताब ‘एवरीबडी लव्स ए गुड ड्रॉफ्ट’ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज मुझे लगता है कि ‘एवरीबडी लव्स ए गुड कन्फ्लिक्ट जोन’। चूंकि गोष्ठी में कई वरिष्ठ मीडिया कर्मी मौजूद थे, राजगोपालजी ने …

साहित्य-सिनेमा-जीवन »

[27 Mar 2011 | 2 Comments | ]
झुग्गी में सरकार आए हैं…

चौराहा शुरू करने से लेकर अब तक, शायद जीवन-उत्साह के अंत तक ये इरादा कायम रहेगा कि इस मंच पर राजनीति का दखल ना हो। इक्का-दुक्का अपवादों के साथ ये संकल्प मौजूद है।

आज इसमें हम हस्तक्षेप कर रहे हैं जनबात के सदरे आलम की इस टिप्पणी के साथ। मुझे लगता है-इसमें राजनीति नहीं, आक्रोश है। गुस्सा है व्यवस्था की ख़राबी को लेकर। 23 मार्च, 2011 को दिल्ली की एक झुग्गी बस्ती को तोड़ दिया गया। ऐसा करना जायज था या नहीं, झुग्गीवाले शहर की खूबसूरती पर कितना बड़ा धब्बा हैं…या …