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Articles tagged with: दखल

विचार »

[27 Apr 2011 | Comments Off on तीन दिन बाद हो जाएगी आपको फांसी… | ]
तीन दिन बाद हो जाएगी आपको फांसी…

थोड़ा डराता, समझाता, झिंझोड़ता एक संदेश
ये ई-मेल संदेश हमें भेजा है  Belgium से चंद्रशेखर पति त्रिपाठी ने। उन्हें भी किसी ने भेजा था। यकीनन, नए तरीके से कुछ ज़रूरी बातें इस इलेक्ट्रॉनिक संदेश में कही गई हैं। कितनी सही हैं और कितनी उपयोगी, इसका फैसला चौराहा के पाठक ही करें : मॉडरेटर
जिसने जन्म लिया है, उसे एक दिन अवश्य मरना भी है, आपको भी तीन दिन बाद मरना है। 3 दिन बाद आपको फांसी दे दी जाएगी।  आपकी मौत निश्चित है….
अब आप उस मौत के दर्द को महसूस कीजिए…आपका परिवार और …

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[19 Apr 2011 | Comments Off on एक मई को जंतर-मंतर पर ज़रूर आना… | ]
एक मई को जंतर-मंतर पर ज़रूर आना…

उन्होंने ताजमहल बनाया और बदले में हाथ कटवा दिए, बिल्डिंगें बनाईं और फुटपाथ पर सोए, वो मज़दूर हैं, इसलिए हर खुशी से दूर हैं। अब वो नाराज़ हैं और इसका इज़हार भी कर रहे हैं

ले मशालें चल पड़े हैं लोग मेरे गांव के…भारत की शहरी और ग्रामीण मज़दूर आबादी असहनीय और अकथनीय परेशानी और बदहाली का जीवन बिता रही है। इसमें असंगठित क्षेत्र के ग्रामीण और शहरी मज़दूरों तथा संगठित क्षेत्र के असंगठित मज़दूरों की दशा सबसे बुरी है। उदारीकरण-निजीकरण के बीस वर्षों में जो भी तरक़्क़ी हुई है, उसका …

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[8 Apr 2011 | 4 Comments | ]
`एक तो वज़ह बताइए, हम अन्ना का साथ नहीं देंगे’

आनंद राठौर मुंबई में रहते हैं। कई फ़िल्मों और धारावाहिकों की स्क्रिप्ट लिख चुके हैं। उन्होंने चौराहा पर प्रकाशित एक पोस्ट पर टिप्पणी के रूप में यह विचार व्यक्त किए थे। उन्होंने पीएम साहब को संबोधित करते हुए जो बात कही, उसके साथ समाज का आह्वान भी किया…कुछ यूं…अपने बचपन से अपने घर से शुरू करें ये काम…तभी संभव है एक ईमानदार नागरिक देश के लिए तैयार  करना। साथ ही सरकार और समाज सुनिश्चित करे कि किसी को लाचारी में गलत क़दम ना उठाने के लिए मज़बूर होना पड़े। आनंद …

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[8 Apr 2011 | 9 Comments | ]
अन्ना का आदर्श!

प्रमोद कुमार प्रवीण ईटीवी और फोकस टीवी में महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके वरिष्ठ पत्रकार हैं। ख़बरों पर उनकी नज़र हमेशा सधी रहती है और वह जानते हैं कि सियासत के दांव-पेंच किस कदर जटिल हैं और स्वार्थ से भरपूर हैं। अन्ना हजारे के आंदोलन के प्रमोद समर्थक हैं और उन्होंने अपने नेता व लोकपाल बिल के समर्थन में अभिव्यक्ति को काव्य रंग दिया है :  मॉडरेटर
 
एक बूढ़े को आदर्श बनते देखा है,
ढलती उम्र में परवान चढ़ते देखा है।
क्या युवा, क्या बच्चे ?
क्या पुरुष और क्या महिलाएं ?
हर मज़हब …

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[7 Apr 2011 | One Comment | ]
कुछ सवालों के संग मैं भी हूं अन्ना के साथ…

योगेश समदर्शी एक ऐसे कवि और कलाकार हैं, जिन्हें प्रोफेशनल एक्सिलेंस और भावना, दोनों के साथ न्याय करना आता है। आज़ादी बचाओ आंदोलन से जुड़े रहे योगेश बाबू अन्ना हजारे के आंदोलन के साथ वैचारिक सहमति जताते हुए कुछ सवाल भी पूछ रहे हैं, जिनके जवाब तलाशने बहुत ज़रूरी हैं…
 
# योगेश समदर्शी
अन्ना हजारे का अनशन चल रहा है. मीडिया जमा है. हर पल की खबर देश-विदेश की जनता को मिल रही है। लगभग पूरे देश मे‌ अन्ना आधुनिक गांधी के रूप मे देखे जा रहे हैं. जगह-जगह से लोग अन्ना …