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Articles tagged with: गांव

यादें »

[5 Apr 2011 | 3 Comments | ]
डुमरी है मोरा गांव…

बिहार बदल रहा है। सुशासन बाबू के शासन ने वहां तरक्की दी है, ऐसा मीडिया वाले मानते हैं और बिहार के रहने वाले अपने यार-दोस्त भी, ऐसे ही समय में हमारे पत्रकार साथी शशि सागर कुछ दिनों के लिए गांव लौटे, उन्होंने कैसा पाया गांव, यहीं बता रहे हैं वह। `सागर किनारे’ शशि का चर्चित ब्लॉग है, जहां आप उनकी और भी रचनाएं पढ़ सकते हैं :
 
[dc]रा[/dc]त के करीब आठ बज रहे होंगे. हमारी ट्रेन बेगूसराय स्टेशन पर रुकी. भारतीय परंपरा निभाते हुए ट्रेन अपने नियत समय से मात्र दो …

यादें, साहित्य-सिनेमा-जीवन »

[29 Mar 2011 | 5 Comments | ]
एक थे बाबा, एक थीं दादी…

नवीन कुमार त्रिपाठी, जिन्हें हम सब प्यार से तेवारी जी कहकर बुलाते हैं, यूपी के बहराइच ज़िले के रहने वाले हैं। हैदराबाद में ईटीवी की सेवा में कई साल रहे, फ़िलवक्त फोकस टीवी की हिंदी आउटपुट डेस्क में बतौर प्रोड्यूसर कार्यरत हैं। त्रिपाठी जी सजग पत्रकार हैं, इसलिए देश-दुनिया की ख़बरों पर सधी निगाह रखते हैं…इस भागदौड़ और सतर्कता के बीच उनके मन में गांव ज़िंदा है। सीधी-सरल बातचीत करने वाले नवीन के लिए गांव-घर के खूब मायने हैं। वो ठीक ऐसे हैं, जैसे `मोस्ट एलिजिबल बेचलर’ होते हैं, यानी …