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[6 Apr 2011 | Comments Off on वक्रदृष्टि : डुप्लीकेट ले आएंगे… | ]
वक्रदृष्टि : डुप्लीकेट ले आएंगे…

नील शेखर हाडा जयपुर के एक अखबार में कार्टूनिस्ट हैं। समसामयिक मुद्दों पर उनके ब्रश-स्ट्रोक्स देखने लायक होते हैं। ताज़ा क्रिकेट-युद्ध के मद्देनज़र शेखर का एक और कार्टून….
 
 

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[5 Apr 2011 | 2 Comments | ]

अब्बास नकवी युवा पत्रकार हैं। बिहार के रहने वाले अब्बास प्रभात खबर में भी रहे और इन दिनों दिल्ली के एक हिंदी दैनिक में कार्यरत हैं। विश्वकप में भारत की उल्लेखनीय जीत के पार्श्व में जिन दो खिलाड़ियों की विदाई को महत्व नहीं मिला, उन्हें ही याद कर रहे हैं अब्बास।
# अब्बास नकवी
जोश, जुनून, जीत के साथ विश्वकप समाप्त हो गया। जाहिर सी बात है एक भारतीय होने के नाते मेरे लिए यह विश्वकप यादगार रहा। इन सब के बावजूद यह विश्वकप छोड़ गया कई यादें–कुछ अच्छी और कुछ बुरी। विश्व …

खेल-तमाशा, है कुछ खास...पहला पन्ना »

[1 Apr 2011 | 2 Comments | ]
भगवान, जल्दी लाओ `कप’, छलक रही है उम्मीदों की चाय

मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेल प्रेमियों की तालियों की गड़गड़हाट के बीच जब मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर मैदान पर उतरेंगे तो उनकी आंखों में एक ही सपना होगा विश्वकप जीतने का… सचिन तेंदुलकर के पास रिकॉर्ड्स की एक लंबी फेहरिस्त है… उपलब्धियों की अच्छी-खासी संख्या है…नहीं है तो विश्वकप की वो चमचमाती ट्रॉफी, जिसपर इंडिया सिर्फ एक बार ही कब्जा जमा सका है…
इक्कीस साल के लंबे करियर में आज भी क्रिकेट के भगवान के दिल में एक ही कसक है विश्वकप को हाथ में ना उठा पाने की… लेकिन …

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[30 Mar 2011 | One Comment | ]
आज भारत बंद है!

जब, सबकुछ क्रिकेटमय है, तो चौराहे की चर्चा अछूती, अलग कैसे रहे। अब पीयूष पांडेय का व्यंग्य पढ़िए। पीयूष वरिष्ठ मीडियाकर्मी हैं। आगरा के रहने वाले पीयूष आजतक में लंबे समय तक सेवारत थे।  उनकी पहचान रचनात्मक साइबर पत्रकार के रूप में भी होती है।
 
 
तो लीजिए साहब हिसाब बराबर हो लिया। रविवार को होली पड़ी तो राष्ट्रीय अवकाश मारा गया। लेकिन, बुधवार को बैठे बिठाए राष्ट्रीय अवकाश मिल गया। इस देश में छुट्टी की महिमा अपरंपार है। लोग नए साल के पहले दिन दिलकश, मस्त और झनझनाती तस्वीरों से पटे कैलेंडर …

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[29 Mar 2011 | Comments Off on तुम्हारी भी जय-जय, हमारी भी जय-जय | ]
तुम्हारी भी जय-जय, हमारी भी जय-जय

ये तो आप तय करें कि पोस्ट पढ़ने के समय मोहाली में मैच शुरू होने वाला है, हो चुका है या फिर रिजल्ट आए हुए भी वक्त गुज़र चुका है, लेकिन उस कथित महायुद्ध से इतर एक और मैच है, जिसमें हार-जीत से बड़ा है मैच का होना। सड़क किनारे कूड़ा बीनने से लेकर जूठी प्लेटें साफ़ करने वाले और कामकाजी-राह पर रहगुज़र करने वाले बचपन में भी है क्रिकेट खेलने की इच्छा…इस मैच ने तो हमें यही बताया। वैसे, इच्छा से भी ज्यादा ये मैच भारतीय क्रिकेट टीम को …