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Articles tagged with: कटाक्ष

है कुछ खास...पहला पन्ना »

[16 Apr 2011 | 4 Comments | ]
बिना ढोलक छेड़ देता राग / साला सूखे गले की कव्वाली था

भारतीय प्रशासनिक सेवा के अफ़सर से आप उम्मीद करेंगे कि वो बेखौफ़ सच बोलेगा? नेताओं की पोल खोलेगा? उन्हें व्यंग्य-वाण का शिकार बनाएगा? हां, ये मुमकिन है, अगर उस अफसर का नाम हो रितुराज मिश्रा। रितुराज ने चेहरों की किताब पर कुछ टिप्पणियां लिखीं, जिनमें विभिन्न आंदोलनों के संदर्भ शामिल हैं। महज सियासी हलचल ही नहीं, मानवीय संवेदनाओं की तड़प और लालसा भी उनके संक्षिप्त किंतु सारगर्भित लेखन का बेहतरीन हिस्सा हैं। हमारे कॉमन मित्र दिग्विजय चतुर्वेदी ने इनका संकलन और रितुराज का परिचय मुहैया कराया है, जो हू-ब-हू यहां …

साहित्य-सिनेमा-जीवन »

[25 Mar 2011 | Comments Off on शनि की दशा | ]
शनि की दशा

कथा और कटाक्ष का भरपूर मेल पेश करती संदीप कुमार मील की ये लघुकथा…
मुकुल स्टेशन से बाहर निकलकर रिक्शा लेने की सोच रहा था कि अचानक पीछे से एक ज्योतिषी ने हाथ पकड़ लिया। मुकुल दिल्ली पहली बार आया था, इसलिए पहले से ही डर रहा था कि पता नहीं वहां कैसे लोग हों। जब तक खुद को संभाल पाता, ज्योतिषी बोला, ‘बेटा ! तेरे पर तो शनि की दशा है, जीवन में कभी सफल नहीं हो पाएगा।’ मुकुल का भविष्यदृष्टाओं में कोई विश्वास नहीं था, वो हर सफलता के …