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Articles tagged with: अन्ना हजारे

गांव-घर-समाज »

[19 Apr 2011 | 4 Comments | ]
अन्ना का अनशन ब्लैकमेलिंग है, तो गांधीजी का…

फिल्म लेखक आनंद राठौर की कलम के मुरीद बॉलीवुड में बहुत-से कलाकार और निर्देशक हैं, अन्ना के अनशन को ब्लैकमेलिंग कहे जाने पर उनकी प्रतिक्रिया काबिल-ए-गौर है, आइए देखें, क्या कह रहे हैं आनंद :

अंग्रेजों के खिलाफ जब आन्दोलन चला, तो गाँधी और उनके  सहयोगी जनसाधारण द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि नहीं थे…जनता ने उन्हें  अपना लीडर बिना किसी वोट और प्रक्रिया  के चुना था. क्यूंकि उनकी आवाज़ आम जनता की आवाज़ थी. अन्ना की आवाज़ भी जनता की आवाज़ है और लोकतंत्र में इस से बड़ा संविधान कोई नहीं …

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[12 Apr 2011 | 5 Comments | ]

ये मल्लिका साराभाई की चिट्ठी है, जो उन्होंने अन्ना हजारे को लिखी है, इसे इसके हिंदी अनुवाद के साथ चौराहा के पाठकों के लिए भेज रहा हूं।
मयंक सक्सेना
 
Dear Annaji
We are deeply shocked by your endorsement of Narendra Modi’s rural development. There has been little or no rural development in ths state. In fact gauchar lands and irrigated farmlands have been stealthily taken by the government and sold off at ridiculous prices to a small club of industrialists. There has been no Lokayukta in Gujarat for nearly seven years so hundreds …

है कुछ खास...पहला पन्ना »

[9 Apr 2011 | 3 Comments | ]
अनशन के बाद अन्ना का आंदोलन, साथ में हैं कई `संत!’

पंकज झा। बेहद कुशाग्र और तीखा, लेकिन सच्चा व स्पष्ट लिखने के लिए चर्चित युवा पत्रकार। दीपकमल पत्रिका के संपादक पंकज जी का यह लेख अन्ना का अनशन समाप्त होने के बाद भी प्रासंगिक है, क्योंकि इसमें आंदोलन की ज़रूरतों और दिशा पर बहस को आमंत्रित किया गया है : मॉडरेटर
 
आपातकाल के समय बीस महीने जेल में रहे एक संपादक की टिप्पणी काबिलेगौर है. बहुत क्षुब्ध होकर वो कहते हैं ‘जेपी के सम्पूर्ण क्रान्ति के समय की तुलना में आज के हालात के हालात कहीं बुरे हैं लेकिन जनता में …

दिल के झरोखे से... »

[8 Apr 2011 | Comments Off on `समिति में वे आएं, जो भ्रष्ट ना हों’ | ]
`समिति में वे आएं, जो भ्रष्ट ना हों’

अन्ना हजारे के अनशन और लोकपाल बिल को लेकर चर्चा खूब है। जितने लोग अन्ना को दूसरा गांधी कहने वाले हैं, उससे कुछ कम हैं, पर ऐसे भी लोग हैं, जो अन्ना के समर्थन में खड़े पूंजीपतियों, एनजीओ, सिने-राजनीतिक कार्यकर्ताओं की सहभागिता पर सवाल उठा रहे हैं। इसी तरह उनकी संख्या भी कम नहीं है, जो अन्ना की किसी ढकी-छुपी `महत्वाकांक्षा?’ की तरफ इशारा कर रहे हैं। कुछ पत्रकारों ने यह भी सुझाना शुरू कर दिया है कि अन्ना को ये करना चाहिए और ये …

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[8 Apr 2011 | 4 Comments | ]
`एक तो वज़ह बताइए, हम अन्ना का साथ नहीं देंगे’

आनंद राठौर मुंबई में रहते हैं। कई फ़िल्मों और धारावाहिकों की स्क्रिप्ट लिख चुके हैं। उन्होंने चौराहा पर प्रकाशित एक पोस्ट पर टिप्पणी के रूप में यह विचार व्यक्त किए थे। उन्होंने पीएम साहब को संबोधित करते हुए जो बात कही, उसके साथ समाज का आह्वान भी किया…कुछ यूं…अपने बचपन से अपने घर से शुरू करें ये काम…तभी संभव है एक ईमानदार नागरिक देश के लिए तैयार  करना। साथ ही सरकार और समाज सुनिश्चित करे कि किसी को लाचारी में गलत क़दम ना उठाने के लिए मज़बूर होना पड़े। आनंद …