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रिश्वत लेकर रख। दस-बीस संसदीय गाली बक। बाबू दफ्तर चल…!

16 April 2011 One Comment

(पाठकों को याद होगा, वे बचपन में कक्षा पहली में पढ़ा करते थे। ‘‘अमर घर चल। चल घर अमर’’। उसी तर्ज पर इस व्यंग्य को पढ़ें।) ये हिदायत हमें दी है अखिलेश शुक्ल ने। 63, तिरूपति नगर, इटारसी मध्यप्रदेश में रहते हैं अखिलेश शुक्ल। सामान्य शब्दों में लिखा गया उनका ये व्यंग्य कितना तीक्ष्ण है, यह आपने देख ही लिया होगा। चौराहा पर श्री शुक्ल का स्वागत)

 

बाबू दफ्तर चल। दफ्तर चल बाबू। देर से उठ, जल्दी मत कर हाथ मुंह धो, चाय का कप उठा। सिगरेट निकाल, लाइटर भी निकाल। सिगरेट जला, तीन चार कश ले। जोर जोर से कश ले। अब एक सांस में चाय पी, पूरी चाय पी। अब देर मत कर। अखबार उठा, काम के समाचार पढ़। नहाने जा, बाथरूम में कपड़े रखने की फरमाइश कर। पत्नी पर खीज, बच्चों पर गुस्सा हो। आराम से नहाकर बाहर आ जा। प्रेस करे कपड़े पहन। सिर में तेल डाल, कंघी कर। खाना खा, चिढ़कर खाना खा। मीन-मेख निकाल, पत्नी को कोस। ससुराल वालो को भला बुरा कह, मूड़ खराब कर। घर भर का मूड़ खराब कर। गुस्सा हो, फाइल ऊठा। गाड़ी निकाल, हवा में कोई अच्छी-सी गाली उछाल। किक मार, गाड़ी स्टार्ट कर। गाड़ी तेज गति से चला, धीरे मत चला। दफ्तर पहुंच, हड़बड़ी कर।

साहब के कमरे में जा। सीधा कमरे में जा, किसी से नमस्ते मत कर। किसी की बात का जबाब मत दे। रजिस्टर पर दस्तखत कर। गाल फुला, अपनी अहमियत बता। साहब की बात पर कान मत दे, कुछ मत सुन। अपनी-अपनी गा, अपनी परेशानी बता, सहानुभूति बटोर। तमाखू घिसकर साहब को पेश कर, जल्दी मत कर, साहब के कमरे में ही रूक। सहकर्मियों के बारे में बातें कर, उनकी चुगली कर। सबकी बुराई कर, अपनी महत्ता बता। महिला सहकर्मियों के झूठे प्रसंग गढ़, उनकी चर्चा साहब से कर। उनकी मनगढ़त गोपनीय बातें बना, साहब को बातें बता, नमक मिर्ची लगाकर नए-नए प्रसंग बता। महिला सहकर्मियों की निजी जिंदगी पर चर्चा कर। साहब को विश्वास में ले।

अब उठ, देर मत कर। उठकर अपनी सीट पर चल।  अपनी टेबिल पर फाइल पटक। फाइल से कुर्सी की गर्द साफ कर। चपरासी को पुकार, जोर-जोर से पुकार। साथियों का ध्यान भंग कर। उन्हें कोई काम मत करने दे। चपरासी से पानी मंगा, दो-तीन बार पानी मंगा। पानी से कुल्ला कर। बाजू की कुर्सी पर पानी थूंक। अपनी इस करनी पर गर्व कर। बगल में कुर्सी पर बैठे साथी को तिरछी निगाह से देख। उसकी बैचेनी पर हंस। पर अफसोस जाहिर मत कर।  टेबिल की दराज खोल, आलपिन निकाल, स्टेपलर भी निकाल। पिन से दांत खोद, दांतो में फंसे अन्न कण निकाल। तिनके निकालकर सामने बैठी टाइपिस्ट युवती पर उड़ा। उसे काम मत करने दे। परेशान कर, उसके मजे ले। रह-रहकर मजें ले। खुद कोई काम मत कर, न ही किसी को कोई काम करने दे।

कार्टून साभार : http://santancreative.com

आफिस की शांति भंग कर, शोर कर। व्यस्त दिख, पर कोई काम मत कर।  लंच मना, कैंटीन में जाकर बैठ। आगंतुकों से मुफ्त का माल उड़ा। पाई-पाई बचा, अपना धेला भी खर्च मत कर। तर माल उड़ा, अपनी तरफ से किसी को पानी भी मत पिला। जी भरकर खा, डकार ले। कम से कम तीन घंटा लंच मना, लंच लेकर वापस लौट। टेबिल पर वापस लौट।  कुर्सी पर बैठ, पेट पर हाथ फेर। अब असली काम कर, खिलाने-पिलाने वालों के काम कर। एक-एक कर लोगों के जरूरी काम कर। टेबिल के नीचे हाथ कर, लोगो से रिश्वत ले। निडर हो रिश्वत ले।

रिश्वत लेकर रख। रिश्वत इधर-उधर मत रख। रिश्वत संभालकर रख। शाम का इंतजार कर, शाम को रिश्वत के हिस्सें कर। सबको अपना-अपना हिस्सा पहुंचा। साहब को उनकी रकम पहुंचा। मंत्री तक चढ़ौती पहुंचाने की व्यवस्था कर। चपरासी को पान बीड़ी के रूपए दे। शेष रकम पास रख। रकम गिने बिना ही रख।  शाम को आफिस में चपरासी को बुला। दफ्तर में ही डिनर कर, मुर्गा मटन का आर्डर दे। व्हिस्की मंगा, चपरासी से व्हिस्की मंगाकर पेग बनवा। साहब की टेबल पर चढ़कर पी, जी भरकर पी। मटन मुर्गा उड़ा।

दस-बीस संसदीय गाली बक, दुनिया की ऐसी-तैसी कर। नशे में बक-बक कर। अब घर चल, लड़खडाता हुआ चल। तनकर मत चल। नाले में गिर, उठकर फिर चल। घर पहुंचने में चार घंटे लगा। रात 12 बजे के बाद घर पहुंच। पत्नी पर क्रोध कर। गाली गलौच के ज़रिए निकट संबंध स्थपित कर, साली कमीनी वगैरह जरूरी संबोधन कह। कुलटा नीच कह, दुनिया भर के आरोप जड़। कै कर, हराम का खाया-पिया निकाल। फिर पानी मंगा, कुल्ला कर। बिस्तर पर गिर, गिरकर सो जा। खर्राटे भर, खुद सो, दूसरों की नीद उड़ा।  बाबू दफ्तर चल, दफ्तर चल बाबू।

 

 

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  • मयंक सक्सेना said:

    हाहाहाहाहाहाहाहाहाहहहहहहहहहहहहहहहहहहाहाहाहाहाहाहाहाहा बढ़िया…..