Home » दिल के झरोखे से...

मैंने ‘प्रेम’ बुरे लोगों से मिलना-जुलना छोड़ दिया…

18 March 2011 13 Comments

आप दिल का चैन हैं, दिल की चुभन भी आप हैं!
आप ही हैं  गुल बदन,  शोला बदन भी  आप हैं!!
रात की  तन्हा उचट, तन्हा नयन,  तन्हा बदन,
भोर के  बिखरे सपन, पहली किरन भी  आप हैं!

आप पे क़ुर्बान हैं,  सबके  दिलों की धड़कनें,
आप हैं गंगो-जमन, जान-ए-चमन भी आप हैं!
आप  जो हंसते  रहें,  सारा जहां  आबाद हो,
आप हैं शे’र-ओ-सुखन, अहद-ए-कुहन भी आप हैं!

अश्क, मोती, झील, गुल, धरती, गगन, पानी, पवन,
दर्द, चाहत, इश्क, दिल, छाया, तपन भी आप हैं!
‘प्रेम’ को अब आपके वादों पे जीना आ गया,
आप हैं तन, प्रान, मन, जीवन, मरन भी आप हैं!

2-
सच्ची बात कभी मत कहना वर्ना पछताना होगा!
दिल की बातों में मत आना वर्ना मर जाना होगा!!

सबकी सोचें अलग-अलग हैं, अलग-अलग है सबका मन,
सबके जैसा हो जाए मन, मन को समझाना होगा!

बरसातों की इन रातों में कौन अकेला बैठा है,
जलता है बारिश में तन्हा कोई परवाना होगा!

मैख़ाने की दीवारों पर नाम ख़ुदा का लिखता है,
मदिरा में ख़ुशबू घोले है कोई दीवाना होगा!

दिल पर हाथ लगाके बेसुध सोया, चोरी का डर है,
पगडण्डी पर सोया पीकर, कोई बेग़ाना होगा!

मैंने ‘प्रेम’ बुरे लोगों से मिलना-जुलना छोड़ दिया,
अब उनकी धमकी मिलती है, दुनिया से जाना होगा!

3-
जि़न्दगी नौजवान लड़की है!
है मगर दायरों में सिमटी है!!
सोचता था न जाने क्या गुज़रे,
जो गुज़रनी थी, वही गुज़री है!
आज फिर उसने जि़न्दगी बख़्शी,
फि़क्र जाने क्यूँ मुझे कल की है!
मैं उसी पे भरोसा करता हूँ,
वही देगा, उसी की मर्जी है!
आह भरते ही गुज़र जाती है,
जि़न्दगी यूं  तो बड़ी लम्बी है!
‘प्रेम’ उस राह पे हम निकले हैं,
मौत जिस पर के रक्श करती है!

4-
दिल जो टूटे कहीं  आईने की तरह!
फिर वो जुड़ता नहीं आईने की तरह!!
हमने सोचा तुझे हर तरह से मगर,
तुझको देखा नहीं आईने की तरह!
कितने रिश्ते जुड़े फिर भी तन्हा रही,
जीस्त भी है कहीं आईने की तरह!
गुज़रे शामो-सहर देखकर ही तुझे,
अपनी कि़स्मत नहीं आईने की तरह!
तुझको छूकर नहीं छू सका हूं कभी,
मैं हूँ बेबस कहीं  आईने की तरह!
जिसको देखें करें उसकी तारीफ़ ही़
अपनी आदत नहीं आईने की तरह!
जो भी आया यहां `प्रेम’ क़ैदी हुआ,
दिल से निकला नहीं आईने की तरह!

-पण्डित प्रेम बरेलवी  पेशे से ख़बरची और दिल से ग़ज़ल-गो हैं। उनकी रचनाएं कैसी हैं, उन्हें  9211397167 पर बता सकते हैं।

 

 

13 Comments »

  • Amit Chauhan said:

    Jo Prem Mai Hote h Unhe Kuch Bura dekhta He nai h…

  • Pandit Prem Bareillivi said:

    Amit Bhai Yahan prem Hona ek alag bat hai, Sher ko samjho mamla bure logon ka haij jinhen apni hukumat ke siva kuchh bhi ras nahin aata fir chanen vah Prem ho ya Sadgi

  • Maju said:

    kis Ghazal ya Sher ki Tareef karun, Bahut-Bahut-Bahut hi achhi Ghazlen hain jitni tareef karo kam hai… wah! Pandit ji kamaal ke Sher likhte ho. Manju

  • Vini Aroda said:

    Wah Pandit ji, Akhwar men to Apke lekh pade, Shayari Bhi karte ho,kitni fildon me mahir ho bhai? aur yah shero_shayari ka raj kahan chhupake rakha tha. bahut achchha likhte ho

  • Kashish said:

    Pandit ji mubarak ho, Tusi to Chha gay Ji, Dekha maine kaha tha n ki ek di ap femas ho jayenge. Filmon me bhi jaldi pauchenge ap ye mera yakin hai. bhagwan apki madad kare……..God Blace You

  • Dr. haridas said:

    Ah bharte hi guzar jati hai, Zindagi yun to badi lambi hai! Wah Pandit Prem Ji jabab nahin hai es Sher ka…..Achchhon-achchon ko mat de di apke es ek ser ne. sach men Apki shayari ka main to murid ho gya

  • Tripurari Kumar Sharma said:

    इक बात कहता हूँ…

    ‘ज़िंदगी नौजवान लड़की है’

    इस एक मिसरे में जितनी गहराई है

    शायद समंदर में भी नहीं…

    बड़ी ख़ूबसूरती है लहज़े में

    बड़ी लज्ज़त है कहने में…

    बाक़ी ग़ज़ल और नज़्मों पर तफ़्सील से गुफ़्तगू करूँगा…

  • Pandit Prem Bareillivi said:

    Tarif aur Apki gahri samajh ke liye bahut-bahut Shkriya Tripurari Ji….

  • Inam said:

    Bhai bure logon se milnaa chhod diya hai, to achchhe logon se milna bhi shuru kiya hai ki nahin….
    अब उनकी धमकी मिलती है, दुनिया से जाना होगा!

    rahi baat jaane ki to duniya mein koi maai kaa laal nahin hai jo yeh kah sake ki use nahin jaana hoga… jaana har ek ko hai,,,

    ‘प्रेम’ को अब आपके वादों पे जीना आ गया

    who is she??

  • Pandit Prem Bareillivi said:

    Achchhe logon se to milna achchha lagta hai.
    Par Achchhon ne pata badalkar punva tod diya……

    wada wafa ka karke koie chalaa gayaa,
    kamwakht jab gayaa to ane ko likh gaya………..

    Shukriya Inam Bahie, achchaa lagaa

  • sanjay kumar said:

    tuj ko chukar nahi chu saka hu kabhi me bebus hu kahin aaine ke tarah
    aap ke in panktiyon ne dil ko chu liya kisi ne bilkul thik kaha hi ki jahan na pahuchy ravi wahan pahuchy kavi, aap ne bahut khub likha hi

  • harishankar singh said:

    आपकी ग़ज़लें हमे अच्छी लगीं

  • Pandit Prem Bareillivi said:

    Tareef ke liye Shukriya Sanjay ji aur Harishankar Singh saheb. Allah ka karam hai, Apki Duayen hain.