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`एक तो वज़ह बताइए, हम अन्ना का साथ नहीं देंगे’

8 April 2011 4 Comments

आनंद राठौर

आनंद राठौर मुंबई में रहते हैं। कई फ़िल्मों और धारावाहिकों की स्क्रिप्ट लिख चुके हैं। उन्होंने चौराहा पर प्रकाशित एक पोस्ट पर टिप्पणी के रूप में यह विचार व्यक्त किए थे। उन्होंने पीएम साहब को संबोधित करते हुए जो बात कही, उसके साथ समाज का आह्वान भी किया…कुछ यूं…अपने बचपन से अपने घर से शुरू करें ये काम…तभी संभव है एक ईमानदार नागरिक देश के लिए तैयार  करना। साथ ही सरकार और समाज सुनिश्चित करे कि किसी को लाचारी में गलत क़दम ना उठाने के लिए मज़बूर होना पड़े। आनंद के विचारों को हम अलग से प्रकाशित कर रहे हैं, ताकि उन पर सबकी नज़र जाए और बहस भी गरमाए : मॉडरेटर

 

जनता की मांग न मानना तानाशाही है, लोकतंत्र नहीं

A drop of ink, makes million think

आदरणीय प्रधानमंत्री जी

लोकपाल बिल मानने में समस्या क्या है? देश का हर नागरिक इस से सहमत है. फिर आप लोगों को किस बात का डर है ? यहाँ तो आप लोगों की वोट भी नहीं कट रही? कोई भी कारण आप बता सकते हैं जिसकी वजह से आप इसे टरका रहे हैं? देश की जनता इतनी मूर्ख नहीं है कि अगर आप कारण बताएं और हम समझ न पाएं. आप लोकपाल बिल न पास करने का एक उचित कारण बता दीजिए, हम अन्ना हजारे का साथ नहीं देंगे.. लेकिन हमें पता है… आप के पास कोई कारण नहीं है. माफ़ कीजिएगा इससे हमें यही सन्देश मिलता है कि आप भी भ्रष्टाचार को समाप्त नहीं करना चाहते. हमें आपकी ईमानदारी पर कोई शक नहीं है, लेकिन देश की जनता आप पर ऊँगली उठाने लगी है . इसकी वजह आपको तलाशनी होगी.. अन्ना हजारे की मांग जायज है और ये हम सबकी मांग है. जनता की मांग न मानना तानाशाही है. लोकतंत्र नहीं. .. जनता अगर नाजायज मांग करे तो बात समझ में आती है. उसे नहीं माना जाना चाहिए. लेकिन लोकपाल बिल में कुछ भी नाजायज नहीं है… ये जनता के हक में है..आप बस लोकपाल बिल न मानने की एक वजह भी बता दीजिये.?

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की असली स्वामी जनता है और उसके नाते मुझे आप और हर मंत्री -संत्री को हुकुम देने का अधिकार है.. फिर भी आपसे हाथ जोड़ कर प्रार्थना है  कि जनता की आवाज़ को पहचानिए … आप जैसे ईमानदार प्रधानमंत्री से हमें आशाएं हैं. आशा है आप हमारे जज्बातों की कद्र करेंगे ..

आपका शुभाकांक्षी
आनंद राठौर


4 Comments »

  • fatehchand said:

    Mr, Anand Rathodji, aap ke is veechhron se main sahmmat hun maghar aap lambaa sochen P.M, Hi aghr immanddar hote to soniyya ki haath ke niche kaam kyun karte, apni achhi chhabi ko taar taar kar diyaa hai,koi bhi lal bahadur shastri nahin ho shak taa,aghr aaj woh hote kyaa mazal kissi ki ke itane hangame hote, thnks my brother you’re great but only thoughts is not enough, take care FATEHSHINGH,

  • Neeraj Kumar said:

    Dear Rathore,

    Very well said. Aaj ki tarik mein har koi mazboor hai. Hamare PM ki bhi koi mazboori hogi ( personal ya phir samajik), wo to wohi janey.
    Lekin jab ek selaab uthna suru hota hai to rokey nahi rukta. Akhir janta kab tak chup rahegi. yeh aakrosh to udna hi tha. Aur yeh to surruat hai, agey-agey dekheyia hota hai kya

  • Shawbhik said:

    Bahot khoob Anand Bhai….aaj zaroorat hai ki aise hi lakhon-karoron patra Maananiya Pradhanmantriji tak pahunche….tabhi ham bhrashtachaar ke viruddh ek sakaratmak badlaaw ki ummeed kar sakte hai…

  • ravi singh said:

    keep it up…… PM ko bolne ka koi faeda nai,us desh ka kuch nai ho sakta jaha PM bas naam ka PM ho…sab jante hai manmohan singh is not capable of taking decisions himself…the main culprit behind opposing lokpal bill are those decision makers who are driving our PM sahab…