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अन्ना का आदर्श!

8 April 2011 9 Comments

प्रमोद कुमार प्रवीण ईटीवी और फोकस टीवी में महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके वरिष्ठ पत्रकार हैं। ख़बरों पर उनकी नज़र हमेशा सधी रहती है और वह जानते हैं कि सियासत के दांव-पेंच किस कदर जटिल हैं और स्वार्थ से भरपूर हैं। अन्ना हजारे के आंदोलन के प्रमोद समर्थक हैं और उन्होंने अपने नेता व लोकपाल बिल के समर्थन में अभिव्यक्ति को काव्य रंग दिया है :  मॉडरेटर

 

एक बूढ़े को आदर्श बनते देखा है,

ढलती उम्र में परवान चढ़ते देखा है।

क्या युवा, क्या बच्चे ?

क्या पुरुष और क्या महिलाएं ?

हर मज़हब और दीवार से ऊपर,

हर उम्र के इंसानों में

एक स्वप्न साकार होते देखा है।

युवा हूं,

चिर अनुभव नहीं,

लेकिन, इतिहास के गांधी को,

किताबों के जेपी को,

साकार होते देखा है।

भूत से वर्तमान तक,

जम्मू से कन्याकुमारी तक,

पूरब से पश्चिम तक.

आदिवासी से अगड़ों तक,

झंडाबरदार होते देखा है।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर,

पहली बार,

देश के नागरिकों का,

एक सपना साकार होते देखा है,

और, एक अन्ना हजारे को हजार होते देखा है।

 

चित्र साभार : google search

 

9 Comments »

  • विनोद गुप्ता said:

    कम शब्दों में बहुत ही सटीक और संजीदा चित्रण। रचनाकार प्रमोद जी और मॉडरेटर को धन्यवाद।

  • abhitosh singh said:

    बढ़िया कविता और शब्दों का बेहतरीन ताना बाना… सचमुच अन्ना की मुहिम से जुड़कर सपने को साकार हेते देखा है…

  • नवीन कुमार त्रिपाठी said:

    वाकई। हाथ हज़ार से करोड़ होते जा रहे हैं। अंजाम तक जरुर पहंचेगा ये आंदोलन। सरल भाषा में उम्दा कविता है।

  • aditya said:

    Dear sir,
    Pramod kr praveen aap ne anna ji k bare main jo bhi likha hai. vo sab thik hai .lekin un logo ka kiya jo apne pet ko fulane mai lage hai. unhe desh ki nahi apne pet ko jayda mota karne ki chinta hai…………..kiya …….soni……kiya …..maya……kiya raja…………or kiya…sheela koi bhi kise se kam nahi……………………………………….

    ……………………….india….delhi….aditya….

  • प्रमोद प्रवीण said:

    आपसभी भाइयों का और खासकर चंडीदत्त शुक्लजी का स्नेह और आभार पाकर अभिभूत हुआ। शब्दों के मार्फत अन्ना के आंदोलन को समर्थन देने की एक कोशिश की है। सादर।

  • नगमा said:

    प्रमोदजी, सरल शब्दों में कविता लिखते रहे हैं। इस बार भी उन्होंने बहुत ही सार्थक कविता लिखी है। वाकई, अन्ना हजारे के आंदोलन ने हमारे सपनों को साकार होने की दिशा में बड़ी लौ जलाई है।

  • Tara said:

    Ab to Anna ka aandolan aur is kavita me likhi sari baten sarthak sabit ho rahi hain.. Anna ko aandolan ke liye aur Pramod Kumar Praveen ko saral sahaj aur bhavpravan kavita ke liye dhanyavad.

  • गुंजन said:

    कवि प्रमोद कुमार प्रवीण महोदय को सरल पंक्तियों में रचना के लिए धन्यवाद। बहुत सही फरमाया। शुभकामनाएं..

  • Zwierzęta said:

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