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साभार सुलभ :हां, यूपी में होता है बेहतरीन थिएटर

7 April 2011 No Comment

हृषिकेश सुलभ। एक नाम, एक हस्ताक्षर। बिहार के पटना में रहते हैं और देश-दुनिया के थिएटर प्रेमियों की धड़कनों में बसते हैं। माटीगाड़ी जैसा नाटक लिखकर सुलभ जी ने रंग-समीक्षकों से लेकर दर्शकों तक का दिल जीता है। बेहद सरल स्वभाव के सुलभ पटना आकाशवाणी में कार्यरत हैं और ये उनका सबसे कमज़ोर और बचकाना इंट्रोडक्शन है, जो आपने मेरे ज़रिए पढ़ा। सच तो यह है कि उनका कृतित्व और व्यक्तित्व मुझ जैसे चौराहाछाप के शब्दों में सिमट ही नहीं सकता।

इन दिनों सुलभ जी लखनऊ में हैं, या शायद कुछ अरसा पहले तक थे…फेसबुक पर उनकी वॉल से कुछ सामग्री चौराहा के लिए कॉपी / पेस्ट कर लाया हूं। सुलभ जी से माफी-याचना के साथ और यह कहते हुए–चौराहा के लिए लाया हूं सर…। खैर, कुछ चित्र हैं, जो थिएटर की दुनिया में शौकिया–बल्कि अमहानगरीय कहना ज्यादा ठीक होगा–दखल की गवाही देते हैं। सुलभ जी की इस पेशकश के बाद उनकी वॉल पर कई रोचक प्रतिक्रियाएं भी आईं, जिन्हें जानना काफी मज़ेदार होगा।

वंदना शुक्ला ने लखनऊ में हुए सांस्कृतिक आयोजन (जिसके चित्र सुलभ जी ने कैप्चर किए), उन्हें भव्य आयोजन की संज्ञा देते हुए कहा…सचमुच दुर्लभ! संभवतः ”नमकीन पानी” एकमात्र नया नाटक था !और इस लिहाज़ से भी महत्वपूर्ण कि इसे कार्यशाला के दौरान तैयार किया गया !जैसा कि चित्र से लग रहा है मंच -सज्जा सिम्बोलिक है! अमितेश कुमार की टिप्पणी में कटाक्ष भी था--इन प्रदेशों में इतना स्तरीय और विपुल रंगकर्म होता है…रानावि यह बात नहीं जानता या जानना नहीं….। नंद भारद्वाज को यह जानकर खुशी हुई–हिन्‍दी प्रदेश के केन्‍द्र में इतनी बेहतर नाट्य प्रस्‍तुतियां एक साथ देखने को मिलीं। इससे रंगकर्म से जुड़े कलाकारों और रचनाकारों का मनोबल मजबूत होगा। इस भ्रम से भी पर्दा हटेगा कि हिन्‍दी में अच्‍छे नाटक नहीं हो रहे। खैर, टिप्पणियां पहले पढ़वा दीं, अब इन चित्रों की पेशकश के समय हृषिकेश सुलभ जी की विशेष प्रतिक्रिया भी जान लीजिए…

मि‍त्रो…..3 अप्रैल को लखनऊ में दो रंगप्रस्‍तुति‍यां देखने का अवसर मि‍ला। उत्‍तर प्रदेश के वरीय अभि‍नेता वि‍जय बैनर्जी ने अपनी प्रस्‍तुति‍यों — बादल सरकार रचि‍त एवम् इंद्रजीत, इब्‍ने इंशा रचि‍त एक लड़की, शंकर शेष रचि‍त पोस्‍टर, सोफोक्‍लीज रचि‍त इडीपस, नरेश सक्‍सेना की कवि‍ता उसे ले गये, वि‍जय तेन्‍डुलकर रचि‍त घासीराम कोतवाल, प्रेमचंद की कहानी पर आधारि‍त हबीब तनवीर रचि‍त नाटक शतरंज के मोहरे, गि‍रि‍राज कि‍शोर रचि‍त प्रजा ही रहने दो और धर्मवीर भारती रचि‍त अंधयुग से एकल अंश चुनकर उन्‍हें संलाप की शैली में प्रस्‍तुत कि‍या।……;प्रोबीर गुहा ने भारतेन्‍दु नाट्य अकादमी के पहले साल के छात्रों के साथ कार्यशाला के दौरान तैयार नाटक नमकीन पानी का मंचन कि‍या।…..तस्‍वीरें मोबाइल से ली गईं हैं और कमजोर हैं। ……यह हि‍न्‍दी रंगमंच दि‍वस की एक दुर्लभ सांझ थी।…..वि‍जय बैनर्जी की प्रस्‍तुति‍ में नाट्य की अद्भुत जि‍जीवि‍षा देखने कों मि‍ली, तो प्रवीर गुहा ने नमकीन पानी में हमारे समय के रुदन और चीख़ों को प्रस्‍तुत करते हुए कई प्रश्‍न उठाए। ………मि‍त्रो,….वि‍जय बैनर्जी के प्रदर्शन की कुछ अच्‍छी तस्‍वीरें आज मि‍लीं….प्रस्‍तुत हैं ये तस्‍वीरें आपके लि‍ए।

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