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अन्ना होने के मायने हैं कुछ और

6 April 2011 2 Comments

अन्ना होने के मायने महज वही नहीं है, जो दिख रहा है। 77 साल की उम्र में करप्शन के ख़िलाफ़ मोर्चा खोलने वाले अन्ना हजारे को नए युग का गांधी बताया जा रहा है। भले ही लोकपाल को लेकर उनकी चिंता से सहमति-असहमति के हज़ार पक्ष हों, पर इस बात से कौन इनकार करेगा कि इस बुजुर्ग को तमाम नौजवानों को शर्मसार कर दिया है, उनकी सुविधाभोगी और संतुष्टि की हद पार कर जाने वाली मानसिकता के लिए। युवा फोटो पत्रकार लाल सिंह ने दिल्ली के जंतर मंतर पर अन्ना के अनशन के मौके की कुछ तस्वीरें चौराहा के लिए कैप्चर की हैं, जिनमें भीड़ ने उमा भारती और ओमप्रकाश चौटाला को `साइमन’ वाली स्टाइल में वापस जाने को कह दिया। एक और तस्वीर यूपी के गोंडा से आई है, जो विश्वदीपक त्रिपाठी ने भेजी है। विश्वदीपक गोंडा के एलबीएस पीजी कॉलेज में लेक्चरर हैं और सोशल एक्टिविस्ट भी। इस तस्वीर में विश्वदीपक के साथ दिलीप शुक्ला, रंगकर्मी भैरव मिश्रा और बहुत-से नौजवान हैं, जो अपने शहर से ही सही, अन्ना के हाथ में अपना हाथ देने को बेक़रार दिख रहे हैं। आइए, अब देखते हैं तस्वीरें :

और ये तस्वीर गोंडा से…दीपू, दिलीप, भैरव और बाकी सब साथी

 

2 Comments »

  • lalsingh said:

    हम हैं चौराहे के साथ…

  • lal said:

    मेरी हयात में शरीक रहा, जब तेरे नाम का रिश्ता।

    मेरा ख्वाब भी बुनता रहा तब तेरे नाम का रिश्ता।

    कुछ गिला था तुझसे, शिकवे तेरे भी सुने थे मैंने,

    जब तलक रहा मेरे नाम से, तेरे नाम का रिश्ता।

    बहुत कोशिशें की, इजहार में तमाम तीज-त्यौहार रीत गये,

    कभी चाहा ही नहीं उसने मुझको, रहा नाम का रिश्ता।

    उसके दरीचे से बस एक मैं खाली हाथ लौटा हूं,

    शायद जिस शख्स के साथ था मेरा, बस नाम का रिश्ता।

    मैं उसकी राह कैसे अपने मंजिल की तरफ मोड़ देता,

    जिस शख्स का था मेरी मंजिल से बस नाम का रिश्ता।