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हमारे लिए भूखा है 77 साल का अन्ना, अब तो जागो

4 April 2011 23 Comments


मनमौजी और ख़री ज़ुबान में बात करने वाले लखनवी पत्रकार मयंक सक्सेना का यह लेख देख-पढ़कर आप सोच सकते हैं कि चौराहा पर तो राजनीतिक लेख ना छापने की बात कही गई थी…सो दोस्तो, ये राजनीति नहीं है…भूख और भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ जंग है…कल से अन्ना अनशन पर होंगे…ऐसे में चौराहे पर यह बहस हो रही है, आप क्या सोचते हैं, उपवास करेंगे या पिज्जा खाएंगे : मॉडरेटर

 

# मयंक सक्सेना

[dc]अ[/dc]न्ना हजारे को जानते हैं आप? नहीं जानते हैं तो गूगल है आपके पास…देख लीजिए और अगर वक़्त भी है, तो कल यानी कि 5 अप्रैल, 2011 को दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंच जाइए और फिर वो भी नहीं है तो कल एक दिन उपवास रखने का प्रयास कीजिए….और ये भी नहीं कर सकते हैं तो कम से कम जब कल रात समाचार चैनलों पर अन्ना के अनशन की ख़बर चल रही हो तो उसे बदल कर कॉमेडी सर्कस न लगा दीजिएगा….90 सेकेंड का पैकेज तो झेला ही जा सकता है अन्ना हजारे के लिए।

जो नहीं जानते हैं उनके लिए बस इतना बता दे रहा हूं कि अन्ना सामाजिक कार्यकर्ता हैं, उम्र है 77 साल, जज़्बा हमारे जैसे नौजवानों से भी ऊंचा और सरलता 7 साल के बच्चे सी…अन्ना फ़ौज छोड़ कर सामाजिक कार्यकर्ता बन गए थे और तब से, न जाने कितनी लड़ाइयां लड़ और जीत चुके हैं इस मोर्चे पर….फिलहाल अन्ना की बात इसलिए, क्योंकि अन्ना 5 अप्रैल से आमरण अनशन पर हैं, मतलब प्राण बाकी रहने तक उपवास…और अन्ना ये अनशन जन लोकपाल बिल की मांग को लेकर कर रहे हैं….उद्देश्य है भ्रष्टाचार से लड़ना…भ्रष्ट नेताओं-अधिकारियों और पूंजीपतियों के कुत्सित इरादों पर लगाम कसना….और इसके लिए अन्ना हजारे और उनके कई मशहूर साथियों ने अभियान छेड़ रखा है…उनके साथ खड़े कुछ नामों पर विवाद भी हुए पर अन्ना अकेला ऐसा नाम हैं, जो सभी विवादों से परे रहते हैं…उनकी निष्ठा पर कोई प्रश्न नहीं है….।

ये भी सच है कि हममें से कई साथी लोकपाल विधेयक को कोई बड़ा हथियार नहीं मानते हैं, लेकिन कम से कम एक आदमी भ्रष्टाचार के खिलाफ़ लड़ाई में जिस तरह का साहस दिखा रहा है….वो भी हम से कहीं अधिक आयु में….उसके जज़्बे को सलाम करने तो आप जंतर-मंतर पहुंच सकते हैं न….जब 77 साल के अन्ना सत्याग्रह के लिए अनशन कर सकते हैं तो 27 साल का मयंक उनके समर्थन में उनके साथ क्यों नहीं खड़ा हो सकता….क्या हमारी पूरी युवा पीढ़ी नपुंसक हो चली है…या हमारी चेतनाएं मर चुकी हैं….

क्या हम घर से बाहर निकलेंगे तो हमारे कदम केवल शॉपिंग मॉल्स और पिज़्जा़ हट की ओर ही बढ़ेंगे….क्या सारी ऊर्जा पब्स के बाहर उल्टियों में बह जाएगी….और सारी क्षमताएं एक विदेशी कम्पनी के लिए सॉफ्टवेयर पकाने में चुक जाएंगी….याद रखिएगा, आपकी बेहोशी की वजह से ही 10 साल से इरोम शर्मिला बेसुध है…पर वो आपसे ज़्यादा होश में है…आपकी तंद्रा के कारण ही बिनायक सेन सलाखों के पीछे हैं….पर वो आपसे कहीं ज़्यादा आज़ाद है….आपके रवैए के चलते ही कल को आपके ही बच्चे आपसे सवाल करेंगे कि आप तो समझदार थे…आपने कुछ क्यों नहीं किया….ज़रूर सोचकर रखिए कि क्या जवाब देंगे…

आप का रवैया यही रहा तो अन्ना हजारे तो अपनी लड़ाई लड़ते रहेंगे…पर ज़ाहिर है वो लड़ाई, जो हम सबकी थी वो केवल उनकी रह जाएगी…और आप की लड़ाई लड़ने वाले लोगों को भी आप अगर दगा देंगे…तो कहां जाएंगे फिर….क्या क्रिकेट मैच जीतने के बाद सड़कों पर बह उठने वाला जन सैलाब देश से भ्रष्टाचार मिटाने के लिए थमा रहेगा….क्या क्रिकेट के बुखार में तपता रहा देश, भुखमरी और खुली लूट की आंच को ऐसे ही झेलता रहेगा….क्या अन्ना हजारे जैसों के अनशन वाकई उनके मरने पर ही खत्म होंगे….साथ आइए…अन्ना को इरोम शर्मिला मत बनने दीजिए….

याद रखिए….तारीख – 5 अप्रैल….जगह – जंतर मंतर…दिल्ली….समय – सुबह 10 बजे से….

जब भी आप आकर साथ देना चाहें…..और हां जो जिस शहर में है, वहां उपवास तो रख ही सकता है…पर साथ-साथ सार्वजनिक सभाएं कर के सरकारों को चेताएं ज़रूर…कि या तो वो ये भ्रष्टाचार बंद करे…या खुले दमन पर आए….लड़ाई हो जाए…आर या पार…..लोगों से मिलें तो इस बारे में चर्चा करें….उन्हें बताएं…उनका साथ मांगें….लड़ें….क्योंकि बदलाव तो अब चाहिए ही…

एक जैसे विचारों वालों को भी साथ लें…और वैचारिक विरोधियों को भी…एक बार सोच के देखिएगा कि देश की 41 फीसदी से ज़्यादा आबादी गरीबी रेखा के नीचे है…ग्रामीण आबादी की रोज़ की औसत आय 14 रुपए के आस पास है… एक दिन उपवास रखिएगा….उन 34 करोड़ लोगों का दर्द महसूस कर पाएंगे…जो रोज़ रात को भूखे सोते हैं….

फ़ैज़ कह गए थे…शायद वो दिन आ जाए…

हम देखेंगे
लाज़िम है कि हम भी देखेंगे
वो दिन कि जिसका वादा है
जो नौह-ए-अजल में लिखा है
जब ज़ुल्म-ओ-सितम के कोह-ए-गरां
रुई की तरह उड़ जाएँगे
हम महक़ूमों के पाँव तले
ये धरती धड़-धड़ धड़केगी
और अहल-ए-हक़म के सर ऊपर
जब बिजली कड़-कड़ कड़केगी
जब अर्ज-ए-ख़ुदा के काबे से
सब बुत उठवाए जाएँगे
हम अहल-ए-सफ़ा, मरदूद-ए-हरम
मसनद पे बिठाए जाएँगे
सब ताज उछाले जाएँगे
सब तख़्त गिराए जाएँगे
बस नाम रहेगा अल्लाह का
जो वायब भी है हाज़िर भी
जो नाज़िर भी है मंज़र भी
उट्ठेगा नलहन का नारा
जो मैं भी हूँ और तुम भी हो
और राज़ करेगी खुल्क-ए-ख़ुदा
जो मैं भी हूँ और तुम भी हो

इस गीत को यू ट्यूब पर सुनना है, तो क्लिक कीजिए यहां

(अन्ना का साथ देने के लिए वेबसाइट –इंडिया अगेंस्ट करप्शन , फेसबुक पन्ना –इंडियाकोर)

23 Comments »

  • नवीन कुमार त्रिपाठी said:

    वैसे पूरे 121 करोड़ लोगों के हित का सवाल है। लेकिन विडंबना ये है कि क्रिकेट के जश्न के लिए लोग सड़क पर उतर आंयेंगे। रात भर इंडिया गेट पर धमाल मचाएंगे। सरकार सरकारी दफ्तरों और स्कूलों में छुट्टी कर देंगे। वैसे भारत को कल अन्ना के साथ होना चाहिए।

  • anindita ghosh said:

    apka soch sahi hai,aur hum apke sath hai

  • Amit Singh said:

    Mr’ Mayank Its really inseparable , A lot youth is going to support Anna Hajare and his group .
    Asa nahi hai yar desh ke yuwa napunsak ho gaye hai unhi aasha ka tusharapat huaa hai , unhe viswas nahi rah gaya hai kisi par. Sabse bari bat hai koi badiya neta nahi mila hai ise .

  • DEEPAK JOSHI said:

    Dekhna hai jor kitna baju e katil me hai … sarfaroshi ki tamnna ab hamare dil me hai.

    I am always with Anna. I’ll try to keep continuous Fasting with Anna from IIT GUWAHATI

  • Ashish said:

    अन्ना हजारे जी को पूर्ण समर्थन |हमें मौखिक चर्चा के द्वारा आसपास के लोगों को तो जागरूक करना ही चाहिये |आखिर यह हमारे हित की ही बात कर रहे हैं |

  • Ashish said:

    कौन कहता है ,आसमां में सुराख़ नहीं हो सकता
    एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों !!!!!!!!!!

  • Some guy said:

    Everything else is alright, but why do you have a deeply religious poem in an article that speaks for entire India… Notice this couplet:

    जब अर्ज-ए-ख़ुदा के काबे से
    सब बुत उठवाए जाएँगे

    This is bordering on extremism.. Is this your aspiration? To remove all statues of the gods?

    How can you idealize this sort of thing?

    बस नाम रहेगा अल्लाह का
    जो वायब भी है हाज़िर भी

    What about Rama? Waheguru? Christ?

    And no, they’re not the synonyms for Allah as portrayed by the writer earlier (stress on removing all statues)…

    At least edit the offensive parts out… Or do you think like those those communist brats that it’s okay to rubbish hindus as long as you lick muslim feet?

  • मयंक सक्सेना said:

    जनाब सम गाय साहब….
    आपने टिप्पमी की…अच्छा लगा…विरोध जताया और भी अच्छा लगा….लोकतंत्र में असहमति का सबसे ज़्यादा महत्व है…ख़ैर अगर आपको किसी बात पर तार्किक आपत्ति होती तो शायद मैं कुछ कह भी पाता…धार्मिक मसलों और मज़हबी कारणों में मेरी रुचि न के बराबर है…जो नज़्म यहां इस्तेमाल की गई है, वो मेरी दृष्टि में कतई साम्प्रदायिक नहीं है…न ही उसे लिखने वाले फ़ैज़ थे….शायद इस नज़्म का अर्थ आपको समझ में नहीं आया…या फिर केवल एक अल्लाह शब्द आ जाने से आपको इतनी आपत्ति हुई…क्रांति और बदलाव के सिपाहियों के लिए ये नज़्म हमेशा से प्रेरणा रही है…फिर वो हिंदू हो…सिख हो…या मुसलमां…फिर सवाल कि राम, वाहेगुरु आदि का नाम क्यों नहीं तो साहब मैं अन्ना हजारे और उनके आंदोलन पर लेख लिख रहा था, न कि इन सब पर…ये नज़्म कहीं से उद्घृत थी…और मेरे लिए इसके अल्फ़ाज़ नहीं इसका मतलब मायने रखता है…थोड़ा साहित्य पढ़ें तो समझ आएगा कि ये कितना गहरा कटाक्ष है पूरे तंत्र पर…उससे भी बड़ी बात…मेरी मातृभाषा उर्दू है…लखनऊ में पैदा हुआ हूं…जहां रगों में उर्दू दौड़ती है…जिसे हम हिंदी कहते हैं, उसमें भी हम 60 फीसदी उर्दू बोलते हैं…तो जनाब हमारे शहर में भगवान को उर्दू में अल्लाह कहते हैं…और फिर वो राम, वाहेगुरु या जीसस कुछ भी हो…
    अंत में…मैंने राम या वाहेगुरु को नहीं देखा…किसी पैगम्बर को मैं नहीं जानता…मैंने अन्ना हजारे को देखा और उन करोड़ों लोगों को देखा है जिनके लिए वो लड़ रहे हैं….मैं संघी नहीं हूं…वामपंथी भी नहीं…न ही मैं हिंदू या मुसलमान हूं…और हां मैं इंसान ही रहना चाहता बनिस्बत कुछ भी और होने के…मैंने कुछ गलत नहीं लिखा…और सबसे बड़ी बात कि साहब जो अबी मूल उद्देश्य है, उस पर बात करें…अन्ना हजारे और उनके अभियान पर बात करें..उनके साथ आएं….राम, अल्लाह, वाहेगुरु किसी की भी इबादत किस काम की साहब जो मुद्दे से भटक गए और मुल्क की भूखी नंगी आबादी के काम न आ सके…और हां अच्छा लगेगा साहब अगर अगली बार असली नाम से टिप्पणी करें…वीरता पूर्ण होनी चाहिए…अधूरा तो केवल अहम होता है….

  • Kunwar Manvendra Singh Chandrawat said:

    Mai Upwas Par Hun, Aapka sath Pura Bharat dega

  • umesh pratap singh said:

    i support anna movment

  • tejwani girdhar said:

    अन्ना हजारे युगपुरुष हैं

  • Amit Saraf said:

    Only Posting comments that we are with you does not enough. we have to come out and support this movement by participating….
    come together all …..

  • अभय त्रिपाठी said:

    अन्ना हजारे का हल्ला बोल, देश के हर आमआदमी का साथ अन्ना हज़ारे के साथ है।

  • Pooja said:

    Is umar main desh ke liye jo aap kar rahen hain, uske liye aapko salam…..we r with u…

  • amit yadav said:

    hum sab aapke sath h.jai bharat.

  • Aam Aadmi said:

    apne desh main logon ke soch sirf cricket ke liye roads per nikal sakte hain kisi noble cause ke liye nahi… ye log Dhoni ke gher ke bahar ghanto tak intzaar kar sakte hian per Anna Hazare ke liye nahi… yahan ke log bas entertainment ke liye jeete hain… corruption ke to adat ho gaye hai…

  • Aam Aadmi said:

    people in this country can do anything for cricket… they can spend whole night on roads… travel thousand kms just to watch a cricket match… can wait hours outside a stadium but they have no time for such a noble cause and they can’t stand with people like Anna…

  • Sudhiti Naskar said:

    precise and well written! I am fasting in solidarity.

  • Rajesh Lodha said:

    Annaji,Hum aap ke Saath Hai

  • Anand Rathore said:

    आदरणिय प्रधानमंत्री जी

    लोकपाल बिल मानने में समस्या क्या है? देश का हर नागरिक इस से सहमत है. फिर आप लोगों को किस बात का डर है ? यहाँ तो आप लोगों की वोटे भी नहीं कट रही? कोई भी कारण आप बता सकते हैं जिसकी वजह से आप इसे टरका रहे हैं? देश की जनता इतनी मूर्ख नहीं है , कि अगर आप कारण बताएं और हम समझ न पायें. आप लोकपाल बिल न पास करने का एक उचित कारण बता दीजिये , हम अन्ना हजारे का साथ नहीं देंगे.. लेकिन हमे पता है… आप के पास कोई कारण नहीं है. माफ़ कीजियेगा इस से हमे यही सन्देश मिलता है, की आप भी भ्रष्टाचार को समाप्त नहीं करना चाहते. हमे आपकी इमानदारी पर कोई शक नहीं है, लेकिन देश की जनता आप पर ऊँगली उठाने लगी है . इसकी वजह आपको तलाशनी होगी.. अन्ना हजारे की मांग जायज है और ये हम सबकी मांग है. जनता की मांग न मानना तानाशाही है. लोकतंत्र नहीं. .. जनता अगर नाजायज मांग करे तो बात समझ में आती है. उसे नहीं माना जाना चाहिए. लेकिन लोकपाल बिल में कुछ भी नाजायज नहीं है… ये जनता के हक में है..आप बस लोकपाल बिल न मानने की एक वजह भी बता दीजिये.?

    दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की असली स्वामी जनता है और उसके नाते मुझे आप और हर मंत्री -संत्री को हुकुम देने का अधिकार है.. फिर भी आपसे हाथ जोड़ कर प्रार्थना है , कि जनता कि आवाज़ को पहचानिए … आप जैसे ईमानदार प्रधान मंत्री से हमे आशाएं हैं. आशा है आप हमारे जज्बातों की कद्र करेंगे ..

    आपका शुभाकंशी
    आनंद राठोर

    A drop of ink, makes million think

  • Anand Rathore said:

    mayank ji..ignore Some guy type … cheers

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