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तप मत कर। सब तय कर। धन तय कर। नकद पर नज़र रख।

31 March 2011 No Comment

व्यंग्य, जैसे शब्दबेधी वाण…जैसे, ब्रह्मास्त्र। त्रासद यह है कि अब व्यंग्य की मारकता हास्य के तरकश में ही गुम हो रही है। ख़ैर, इतने भारी-भरकम शब्द चौराहा पर खटकेंगे, इसलिए बिना भाषण के अतुल कनक का व्यंग्य यहां। खास बात बता दें, इस पूरे पीस में कोई विराम नहीं है, ठहराव के बिना सरपट भागता हुआ। देखिए और कनक को चौराहे पर या फिर atulkanak@yahoo.com पर सीधे प्रतिक्रिया दीजिए : मॉडरेटर

 

# अतुल कनक

कनक सफल बन। अब असफल रह कर ग़म गलत मत कर। दरबदर मत भटक। अटक अटक कर मत चल। इधर- उधर मत टहल। झटपट बढ़। डगमग मत चल। सरपट बढ़। पवन बन कर चल। भरसक जतन कर। सहम मत। बढ़। फल लपक। लपक कर झट गटक।कसर मत रख। कहर बन। घन बन कर सर पर बरस। हर जगह खबर बन। अनपढ़ मत रह। हर नयन पढ़। यकबयक मत बहक। सतह पर मत ठहर। लगन रख। तल तक नज़र रख। अगन तब पर पग धर। कदम कदम बढ़। सतत बढ़। कमर कस। लड़- झगड़। कलह कर। दहशत भर। ठन-ठन मत रह। डर मत। अकड़ कर चल। उदर भर हजम कर। हर रसद चट कर। हर फसल हजम कर। अधम बन, शरम मत कर। खलकरम कर। खटमल बन। गड़बड़ कर। छल कर। सब उलट- पुलट कर। नयन भर नभ हड़प। जल- थल- नभ पर हक रख। हर जगह दखल रख। जन’गण’मन पर असी रख। जनमत पर पकड़ रख।

गजब मत कर। गरम तरल मत बन। उबल मत। हर ग़म सह। गरल तक चख। गरज पर गरल चख। समय पर नरम बन। नट बनकर करतब कर। हरदम छड़ बन कर मत तन। गलत कथन पर हरदम मत भड़क। गरदन नत रख। अवसर पर शरम मत कर। चरण पकड़। नमन कर। नत रह। लपक। झपट। पद पकड़। पदक पकड़। पदमय रह कर सफल बन। थक मत। थम मत। सतत बढ़। बड़बड़ कर, गड़बड़ कर, चपड़ चपड़ कर। भय तज। रहन- सहन बदल। सकल वहम तज। सड़क पर रह, पर सरल मत रह। नकल कर, पर असल बन कर रह। छन कर पर सरल बन कर रह। ठग, पर सच बन कर रह। सच पर दम भर, पर सच मत कह। चल हट। चटर-पटर मत कर। बच। हर बशर परख। सब पर शक कर। वहम रख। अदल रह। बदल रह। अटल मत रह। सतत दल बदल। अवसर पर घटक दल तक बन। कसर मत रख। बसर रख। मत कर, शरम मत कर, श्रम तक मत कर। पर, फल पर नज़र रख।

वतन पर मत मर। तन पर मर। धन पर मर। सज- धज रख। लकदक वसन पहन। मखमल पहन, मलमल पहन। हर जगह दखल रख। इधर सर, उधर चरण/ बदन इधर-उधर। अब गहन मन मत कर। घर भर। श्रारसक घर भर। छत तक घर भर। सहज रह कर टल मत। सब पर जबर बन। हर फन रख। सफल ठग बन। ठग बनकर सफल बन। जड़ पर बम रख। अब नयन नम रख। मटक मटक कर नयन जल झटक। सतत असहमत रह, पर अनबन मत रख। उन पर रहम मत कर। पर कतर। जनमत जकड़। सफल बन। अगर-मगर मत कर। अकल -वकल तज। तप मत कर। बस तय कर। सब तय कर। धन तय कर। नकद पर नज़र रख। रथ पर मत चढ़। सर पर चढ़। नत रहकर जनमत पर पग दख। ललक रखकर पद तक लपक। पदमय रह। बतन पर करम मत कर। जन-गण-मन पर रहम मत कर। कपट कर। मन भर कर कपट कर। डट कर कपट कर। रच बस कर कपट कर। उमर भर कपट कर।

नल तक चल। पर मचल मत। जल मत भर। बस बहस कर। जल पर बहस कर। नल पर बहस कर। बल पर बहस कर। कल पर बहस कर। बहस पर बहस कर। मन भर कर बहस कर। मन भर कर बीस कर। करम मत कर। बस। बहस कर। बहस कर, सफल बन। यह सबक रट। उमर भर रट रट कर पढ़। बहस कर। कलह कर। शक कर। गड़बड़ कर। बकबक कर, यह कर- वह कर। सब कर। सब खतम कर। कनक अब चल। सफल बन। छल कर। दल बदल कर। नकल कर। सफल बन। इस तरह सफल बन। हर जगह सफल बन। कनक सफल बन।

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