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निर्मल वर्मा की डायरी से!

30 March 2011 2 Comments

निर्मल वर्मा की डायरी का ये हिस्सा हस्तक्षेप.कॉम के मॉडरेटर / एडिटर अमलेंदु उपाध्याय की ओर से मिला है। इसके साथ ही एक नोट भी है, वह गंभीर सवाल है…क्या है नोट, सबसे नीचे देखें, सबसे पहले निर्मल वर्मा की डायरी का अंश :

 

लूज़ वन्स फेस

…उसने लगभग घर से बाहर जाना बंद कर दिया। उसे दुपहरें अच्छी लगती थीं, वह अपने कमरे में बैठा रहता,खिड़की से आकाश को देखता रहता, अवसन्न और सूनी हवा में चीलें मंद गति में उड़ती रहतीं। पीला,अवसाद-भरा सूरज दिखाई देता।

खाने के बाद वह छोटी-सी नींद लेता, उठने पर आँखें धोता, फिर आलमारी से पुस्तकों को निकालने लगता। उसकी प्रिय पुस्तक थी, लाइफ ऑन अर्थ जिसे वह अक्सर पढ़ता था। उसके फोटोग्राफ भी उसे बहुत अच्छे लगते थे, कीड़े, जानवर और पक्षियों को देखता, जिन्हें पहले कभी नहीं देखा था और उसे आश्चर्य होता किमनुष्य उनके बीच कितना अकेला प्राणी है।

जैसे ही सूरज धीरे-धीरे ढलने लगता और छतों पर रोशनी मंद पड़ने लगती, वह रसोई में जाकर चाय बनाता। यह वही रसोई थी, जहाँ बरसों पहले उसकी माँ खाना बनाया करती थीं। बरामदा भी वही था, जहाँ वह कुर्सी पर बैठी रहा करती थीं। वहीं से उन्होंने उसे आखिरी बार देखा था। जब सर्दी बढ़ जाती, वह अपना लैंप जला लेता। यह टेबुल लैंप भी उसके भाई ने उसे उपहारस्वरूप दिया था। यह ”दो वक्तों के मिलने” की घड़ी होती, जब वह अपने मित्रों को पत्र लिखता, जो अब काफी सुदूर देशों में रहते थे।

वह थक जाता। वह कमरे से निकलकर अपनी छत पर आ जाता। आकाश पर तारे छितरे होते। गली में खेलते बच्चों की आवाजें सुनाई देतीं। नुक्कड़ की दुकान में एक लूले टेलर-मास्टर,जिनकी टांग नहीं थी, अब भी अपनी सिंगर मशीन पर ध्यानमग्न होकर झुके रहते। वह गिलास में अपनी ड्रिंक बनाता। क्या संगीत का समय आन पहुँचा ? इस तरह दिन बीत जाता है और वह रात के आने की प्रतीक्षा करता है।यह भयानक है, जब लेखक लिखना बंद कर देता है उसके पास दुनिया को दिखाने के लिए कुछ भी नहीं रहता, सिवा अपने चेहरे के !

कहते हैं, पहले ज़माने में जापानी अपना ”चेहरा खो” देते थे ( लूज़ वन्स फेस ), तो आत्महत्या कर लेते थे। यदि वह लेखक, जो लिख नहीं पाता, अपने जीवन का अंत कर डाले, तो उसका कारण बिलकुल उल्टा होगा — अपना चेहरा दिखाने के अलावा उसके पास कुछ नहीं होता !***

( निर्मल वर्मा की डायरी से)

नोट:- लेकिन अब न लिखने वाले लेखक न आत्महत्या करते हैं न चेहरा दिखाते हैं सिर्फ चेहरे ओढ़ लेते हैं!!!

2 Comments »

  • Tripurari Kumar Sharma said:

    मेरे पसंदीदा लेखक के लेखन का एक टुकड़ा पेश करने के लिए शुक्रिया…

  • Kapil said:

    bahut hi sundar lekhan
    Nirmalji ko padhna hamesha hi ek sawatantra, vichitra, anandadyi anubhav hai

    Baantane ke liye Dhanywaad Upadhyayji