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मेरी जां फकत चन्द रोज़ और

28 March 2011 No Comment

 

 

 

 

 

 

 

एक
मेहनतकश
हुनरमंद
और
अमनो सुकून
पाने की कोशिश
में मुब्तिला
हथेलियों की
गहराई लकीरों
को देखकर
एक नजूमी
ने कहा
“चन्द रोज़ और
मेरी जाँ
फकत
चन्द रोज़ और”
फिर?
फिर
आदत हो आएगी.

– अभिषेक गोस्वामी की काव्यकृति, चित्र : google

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