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…पैरों में बिवाई है

26 March 2011 No Comment

आप जानते हैं अदम गोंडवी को? अजीम शायर. दुनिया भर के लोग उन्हें जानते-पहचानते-समझते बूझते हैं। मैंने अदम जी को देखा, पहचाना और अभिभूत भी हुआ हूं। वो शायद नहीं जानते होंगे, लेकिन उनके शहर का होने के नाते गौरवान्वित और कुछ ज्यादा ही अकड़ी गर्दन लेकर फिरने का हुनर हम बहुत पहले से रखते हैं।
ख़ैर, जयपुर के रहने वाले मित्र अभिषेक गोस्वामी की कैमरा-कृति मिली, तो एकबारगी अदम जी की ही पंक्तियां याद हो आईं।
अभिषेक मंच पर जादू रचते हैं, कलम से मुग्ध करते हैं और कैमरे से तो…ओफ़ ओ…मार ही डालते हैं। उनकी नज़र जहां-जहां जाती है, कल्पना भी शायद ना जा सके। चौराहा के पाठक फोटोग्राफी कला से लगातार रूबरू होते रहें, इसी इरादे से कैमरा बोलता है…स्तंभ में आज की पेशकश अभिषेक भाई की तरफ से…साथ में अफ़सानानिगार उदय प्रकाश, जिनका परिचय देने का मतलब शुद्ध बेवकूफी होगा….का फोटो कैप्शन…
Uday Prakash : People’s Theatre Activist reclines in a friend’s car….! Feet have better memories and they can dream differently.

अदम गोंडवी की कविता

वो जिसके हाथ में छाले हैं पैरों में बिवाई है
उसी के दम से रौनक आपके बंगले में आई है

इधर एक दिन की आमदनी का औसत है चवन्‍नी का
उधर लाखों में गांधी जी के चेलों की कमाई है

कोई भी सिरफिरा धमका के जब चाहे जिना कर ले
हमारा मुल्‍क इस माने में बुधुआ की लुगाई है

रोटी कितनी महँगी है ये वो औरत बतलाएगी
जिसने जिस्म गिरवी रख के ये क़ीमत चुकाई है

अभिषेक गोस्वामी की कैमरा-कृति

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