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चिट्ठी नहीं तो क्या…आराम ही बांच लें…

25 March 2011 One Comment

स्नेहा चौहान बेहतरीन पत्रकारों में शुमार हैं, लेकिन कभी-कभी उनकी नज़र कैमरे के ज़रिए भी जगहों, रास्तों, लोगों और अहसास को समझती है। स्नेहा की इसी नज़र की बानगी यहां…

ये जगह है…जबलपुर का सिविक सेंटर। यहीं बना है जोंसगंज का डाकखाना। अब चिट्ठियां लिखने की तो आदत छूट ही गई, सो कुत्तों (मॉडरेट स्वर पसंद करने वाले डॉगी पढ़ें), ने सोचा–आंखें बंद करके आराम ही बांच लें।

प्रवचन बहुत हुआ…अब सीधे चित्र देखिए…

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  • seema said:

    moderate karne vaale doggy padhen………vaah ……sneha ji nabz pakad li hai aaapne………..