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अब ताज चाहिए !

7 April 2015 No Comment

(दैनिक भास्कर में प्रकाशित)

-चण्डीदत्त शुक्ल

एक छोटे-से शहर की लड़की जब कामयाबी की लंबी छलांग लगाती है, तब उसे कंगना रनोट कहा जाता है! खिताब तो उन्हें कई मिल चुके हैं, कंगना को जरूरत टॉप हीरोइन के ताज की है!

चंद रोज पहले, कंगना रनोट को बर्थ डे के ठीक एक दिन बाद, 62वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के तहत बेस्ट एक्ट्रेस चुना गया। ये खिताब उन्हें “क्वीन’ में शानदार अदाकारी के लिए मिला है। कंगना की ज़िंदगी भाग-दौड़ से घिरी रही है। वे लड़कियों से भेदभाव के खिलाफ रही हैं। पिता से खयाल नहीं मिलते थे तो एक दिन सपनों को पूरा करने की खातिर घर छोड़ दिया। हिमाचल प्रदेश के छोटे-से शहर मंडी में 23 मार्च, 1987 को जन्मीं कंगना के पिता अमरदीप बिज़नेसमैन और मां आशा स्कूल टीचर हैं। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में बेहतरीन अभिनेत्री का पुरस्कार पाने की दावेदार प्रियंका चोपड़ा भी थीं। वे एक छोटे-से शहर बरेली से बॉलीवुड तक आई हैं। प्रियंका ने ट्वीट किया- ‘मुझे हारना पसंद नहीं है, लेकिन इस साल मुझे किसी के पीछे बैठना पड़े तो ये आप होंगी कंगना। बधाई हो। ये ‘क्वीन’ छोटे शहर से है।’

लंबी जद्दोज़हद, छिटपुट मॉडलिंग असाइनमेंट्स, बेरोजगारी, संघर्ष, असफलता, निंदा और आलोचनाओं के बाद अब कंगना निर्विवाद तरीके से बॉलीवुड की बेहतरीन अभिनेत्री बन गई हैं, लेकिन बात यहीं मुकम्मल नहीं होती। खिताब तो मिल गए, उन्हें ताज हासिल करना होगा। सुपर स्टार का तमगा अब तक दूर है और उस दौड़ में करीना कपूर, कटरीना कैफ, प्रियंका चोपड़ा, सोनाक्षी सिन्हा, सोनम कपूर जैसी कई अभिनेत्रियां काफी आगे हैं।

कंगना कहती हैं, “नहीं, प्रियंका से मेरा कोई कंप्टीशन नहीं है।’ पर कहीं न कहीं, कसक तो मन में उभरती ही होगी कि सक्सेस के सफर में वे पीछे क्यों हैं? कारण यही है कि कंगना की गिनती ग्लैमरस रोल करने वाली अभिनेत्री की नहीं है। कंगना ऐसे किरदार स्वीकार नहीं करतीं, जिनमें वे सिर्फ ग्लैमर का तड़का लगाने के लिए हों या हीरो की साइलेंट पार्टनर। यहां कुछ बातों पर गौर करना होगा। बॉलीवुड में कंगना का कोई गॉडफादर नहीं है। फिल्मों की रिलीज के वक्त उड़ने वाली, को-स्टार्स के साथ अफेयर की रूटीन खबरों के सिवाय, उनका कोई घोषित लव कनेक्शन नहीं है। वे स्क्रिप्ट लिखने, तरह-तरह के गेम्स सीखने और अपनी धुन में मगन रहने के िलए जानी जाती हैं। बॉलीवुड में लॉबी बनाने, गठजोड़ कर रोल लिखवाने और झटकने के जो दांव-पेच प्रचलन में हैं, उनमें कंगना की रुचि नहीं है। अलहदा आवाज़ और अनोखे फैशन सेंस के चलते वे चर्चा में तो रहती हैं। कंगना को टिपिकल हीरोइन बनने की जगह बीच का रास्ता निकालना होगा। वे शीर्षक भूमिकाएं निभा सकेंगी और विद्या बालन की तर्ज पर अलग पहचान बनाए रखते हुए टॉप की दौड़ में भी बनी रहेंगी।

हर वक्त ऐसी अभिनेत्रियां बॉलीवुड में मौजूद और सफल रही हैं, जिन्होंने पारंपरिक कैरेक्टर नहीं निभाए। परवीन बॉबी और जीनत अमान की कामयाबी के बीच अगर रेखा और स्मिता पाटिल अच्छा अभिनय करके सफल हो सकती हैं तो कंगना रनोट क्यों नहीं? शादी के बाद रानी मुखर्जी की बतौर एक्ट्रेस सक्रियता कम हो गई, दीया मिर्जा और विद्या बालन अपने लिए अलहदा ट्रैक चुन चुकी हैं। ऐसे में कंगना के लिए संभावनाओं के द्वार खुले हैं। जरूरत बस ये है कि वे चुनौतियों की अच्छी तरह से परख करें और नई राह पर कदम बढ़ाएं।

खास है चुनौती

– मिस रनोट को “मूडी’ लड़की की इमेज से बाहर आना होगा। सफलता हासिल करने के बावजूद कई निर्देशक उनके बारे में कही गई बातों से प्रभावित होते हैं।

– कंगना को स्पष्ट करना होगा कि वे केवल “महिला केंद्रित’ फिल्में नहीं करना चाहतीं, बल्कि अन्य अभिनेताओं के साथ रोमांटिक भूमिकाएं भी निभाएंगी।
आने वाली फिल्में

-कट्टी बट्टी : ऐसी फिल्म है, जिसमें नई कंगना दिखेंगी।
उनका लुक बेहद फंकी है और वे इमरान खान के अपोजिट,
दिल्ली की आर्ट स्टूडेंट पायल का किरदार निभा रही हैं।

-मिस्टर चालू : रीमा कागती निर्देशित इस फिल्म में सैफ अली खान के अपोजिट कंगना मेन लीड कर रही हैं। वहीं इस फिल्म से पूजा भट्ट भी बतौर जासूस, बॉलीवुड में कमबैक कर रही हैं।

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