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त्रासदी

3 December 2014 3 Comments

आज भोपाल गैस त्रासदी की 30वीं बरसी है। मानव समाज को थर्रा देने वाले इस हादसे की याद में एक कविता :

– अनुलता राज नायर

नहीं था खौफ़ अंधेरों का
उस रात के पहले…
नहीं जागती थी रातें, रातों को
उस रात के पहले |

वो रात जिसकी सुबह
नहीं निकला था सूरज
आसमान नहीं हुआ सिंदूरी ,
कितनी मांगों के लाली पुछ गयी
कि काला था वो दिन |

उस सुबह
नहीं चहचहायीं चिड़ियें
कि सन्नाटे को तोड़ने की
हिम्मत नहीं थी उनमें ….

लाशों से पटे अस्पताल के बरामदे
बदराई आँखों से तकते बच्चे
लिख रहे थे
खौफ़ की नयी परिभाषाएं |

किसी की एक भूल ने
और हवा के शैतान रुख ने
बुझा दिए चूल्हे ,सैकड़ों घरों के…

बरसों बरस बीते
मगर दर्द ठहरा है |
उस स्याह रात का दिया ज़ख्म
आज भी गहरा है |

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अनुलता राज नायर
युवा कवयित्री व लेखिका हैं। वे भोपाल में रहती हैं। अनुलता का एक कविता संग्रह `इश्क तुम्हें हो जाएगा’ प्रकाशित हो चुका है।

3 Comments »

  • अनुलता said:

    अपनी रचना “चौराहे” पर पा कर बहुत खुश हूँ…

    शुक्रिया चंडीदत्त शुक्ल साहब !

  • प्रशांत विप्लवी said:

    बरसों बरस बीते
    मगर दर्द ठहरा है |
    उस स्याह रात का दिया ज़ख्म
    आज भी गहरा है |…सही कहा आपने …

  • Anurag Yadav said:

    पहर दो पहर सज़िश थी हवाओं की
    पहर दो पहर रंज़िश थी दुआओं की !!