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जेएलएफ से पहले किताबों का पर्व !

20 November 2012 No Comment

– 75 राइटर और एजुकेशनिस्ट करेंगे बातचीत
– 80 साहित्यकार राजस्थान के भी शामिल होंगे
– 32 सेशन में होगा अलग-अलग सब्जेक्ट्स पर डिक्सशन
– 06 नेशनल सेमिनार आयोजित होंगे
– 1000 स्टूडेंट्स का एक्टिव पार्टिसिपेशन
– पसंदीदा लेखकों से लोग करेंगे सीधी मुलाकात

गार्गी मिश्रा और चौराहा डेस्क, साभार – दैनिक भास्कर.

जयपुर। जयपुर लिट्रेचर फेस्टिवल (जेएलएफ) की शुरुआत होने में एक महीने से ज्यादा का वक्त बाकी है, लेकिन पढ़ने-लिखने के शौकीनों के लिए रीडिंग, डिस्कशन और मेल-मुलाकात के कई और मौके कतार में हैं। इनमें से ही एक दिलचस्प इवेंट है – राजस्थान पुस्तक पर्व। 24, 25 और 26 नवंबर को राजस्थान ग्रंथ अकादमी के झालाना इंस्टीट्यूशनल एरिया स्थित कैंपस में आयोजित पुस्तक पर्व में देश भर से 75 लेखक और एजुकेशनिस्ट हिस्सा लेंगे। राजस्थान के 80 साहित्यकार भी यहां जुटेंगे। कुल 32 सेशन में बातचीत होगी और छह नेशनल सेमिनार आयोजित किए जाएंगे। यही नहीं, 1000 स्टूडेंट्स का एक्टिव पार्टिसिपेशन भी तय हो चुका है।

खास बात यह कि तीन दिन के इस मेगा इवेंट में सिर्फ लिट्रेचर की बात नहीं होगी, बल्कि पॉलिटिक्स, जल जंगल और जमीन, दलित और स्त्री विमर्श, जर्नलिज्म, कल्चर, कंटेंपरेरी आर्ट, फ़िल्म, थिएटर और पल्प लिट्रेचर से जुड़े इंट्रेस्टिंग सेशन और नेशनल सेमिनार भी आयोजित किए जाएंगे।

राजस्थान ग्रंथ अकादमी के डायरेक्टर आर.डी.सैनी ने बताया कि 2009 में राजस्थान पुस्तक पर्व की शुरुआत की गई थी। इसके पीछे मूल उद्देश्य यह है कि हायर एजुकेशन के स्टूडेंट्स की रीडिंग हैबिट्स बढ़ें, एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स में क्रिएटिव इन्वॉयरमेंट बने और यंग जनरेशन राइटिंग की ओर आगे बढ़े। सैनी ने बताया कि बीच में कुछ कारणों से पुस्तक पर्व का आयोजन एक साल नहीं हो सका। इस बार नए फॉर्मेट में पुस्तक पर्व मनाया जा रहा है। शुरुआती आयोजनों का फॉर्मेट पुस्तक मेले जैसा था, लेकिन इस साल से डिस्कशन, सेमिनार और अपने लेखक से मिलिए जैसे सेशन की संख्या बढ़ाई जा रही है। वैसे, इस आयोजन में बिक्री के लिए किताबें भी उपलब्ध रहेंगी।

उन्होंने बताया कि राजस्थान पुस्तक पर्व-2012 की शुरुआत 24 नवंबर को होगी। जाने-माने हिंदी कवि और लेखक अशोक वाजपेयी उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता करेंगे। इस अवसर पर बीज वक्तव्य सुधीश पचौरी देंगे, जबकि स्पेशल गेस्ट विभूतिनारायण राय हैं। हर दिन सुबह 10 से लेकर शाम छह बजे तक सभी इवेंट्स एक ही भवन में अलग-अलग हॉल में आयोजित किए जाएंगे। क्लोजिंग सेरेमनी शाम चार बजे होगी। सैनी नहीं मानते कि एक ही वक्त में अलग-अलग सत्र का फॉर्मेट जेएलएफ से मिलता-जुलता है। वे जोर देकर कहते हैं कि पुस्तक पर्व का उद्देश्य एकदम अलग है। वे अपने मूल स्वरूप में ही कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं और इस आयोजन का किसी और से कोई कंप्टीशन नहीं है। सैनी बताते हैं कि उनका इरादा बिज़नेस करने का नहीं, बुक्स को प्रमोट करने का है।

लेखकों से सीधी बात
पुस्तक पर्व के दौरान साहित्य प्रेमी अपने प्रिय रचनाकारों से मुलाकात और बातचीत कर सकेंगे। मशहूर कवि अशोक वाजपेयी, लीलाधर मंडलोई, राजेश जोशी, विष्णु नागर, नंदकिशोर आचार्य, उपन्यासकार कुसुम अंसल से रीडर्स की सीधी बातचीत मुमकिन होगी।

होंगे नेशनल सेमिनार
पुस्तक पर्व में छह विषयों पर राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किए जाएंगे। इनमें सृजन और समय, जल, जंगल और जमीन (आदिवासी विमर्श), बात आगे बढ़े तो बात बने (स्त्री विमर्श), हाशिए के आगे का सच (दलित विमर्श), उत्तर आधुनिकतावाद, इतिहास लेखन एवं साहित्य व शिक्षा – करें और नहीं करें शामिल हैं।

पहले डिस्कशन, फिर पब्लिकेशन
सैनी ने बताया कि नेशनल सेमिनार में हिस्सा लेने वाले कुछ लेखकों और विद्वानों से बाद में संबंधित विषयों पर पुस्तकें लिखवाने की भी योजना है। हालांकि इस बारे में प्रस्ताव को अंतिम रूप देना बाकी है।

सवाल, जवाब और ईनाम
नेशनल सेमिनार के पहले सेशन में सब्जेक्ट स्पेशलिस्ट के पैनल डिस्कशन के बाद एक क्विज प्रोग्राम भी होगा। इसमें पहले से रजिस्टर्ड स्टूडेंट्स से सवाल पूछे जाएंगे। सही जवाब देने वाले स्टूडेंट को पांच सौ रुपए का नकद ईनाम दिया जाएगा। खास बात यह है कि स्टूडेंट्स से जो सवाल पूछे जाएंगे, वे पैनल डिस्कशन बेस्ड होंगे और वेन्यू पर ही तैयार किए जाएंगे।

शामिल होंगे रचनाकार
पंकज बिष्ट, आलोक श्रीवास्तव, हेतु भारद्वाज, क्षमा शर्मा, कृष्‍णाकांत पाठक, अशोक माहेश्वरी, कीर्ति कपूर, श्याम सखा श्याम, कैलाश कबीर, चंद्रकांता, चन्द्रप्रकाश देवल, चरणसिंह पथिक, जगदीश चंद, जयप्रकाश कर्दम, केशुभाई देसाई, के.के. रत्तू, कृष्ण गोपाल शर्मा, धीरेन्द्र अस्थाना, नरेश दाधीच, अर्जुन देव चारण, आई.सी. त्रिवेदी, उषा उपाध्याय, पल्लव, भरत ओला, एम.एस. सिकंदर, मालचंद तिवाड़ी, रेणु अगाल, रामप्रसाद त्रिपाठी, रत्न कुमार सांभरिया, रूपसिंह बारहठ, ललित के. मंडोरा, विनोद पदरज, विष्‍णु सरवदे, सरवत खान, सुधीश पचौरी, सुधा अरोड़ा, आदि।

खास होगी चर्चा –

* लोकतांत्रिक सरकार और सांस्कृतिक नीति
* सोशल मीडिया और ब्लॉगिंग की दुनिया
* पठनीयता का संकट, हिन्दी लेखन और प्रकाशन
* पत्रकार का धर्म और द्वंद्व
* हिन्दी और उर्दू की नजदीकियां
* संगीत, स्मृति और सिनेमा
* शब्द और रंगमंच का अंतर्संबंध
* लोकप्रिय बनाम क्लासिक फिक्शन
* संवैधानिक मान्‍यता की राह में राजस्‍थानी भाषा
* इक्कीसवीं सदी में कला का अंत
* कम कीमत की अच्छी किताबें
(इस सत्र में विज्ञापनों की दुनिया से रिलेटेड बातचीत होगी।)
* दिल की जुबां से कहिए
(अलग-अलग लैंग्वेज में हो रहे ट्रांसलेशन पर दिलचस्प बातचीत होगी।)

* कविता पाठ
(पोएट्री सेशन में गोविंद माथुर, कैलाश मनहर, प्रभात, प्रीता भार्गव, बनज कुमार बनज, मृदुला अरुण, सरस्‍वती माथुर, रमेश खत्री, प्रमोद, अमित कल्‍ला जैसे यंग व सीनियर पोएट कविता पाठ करेंगे।)

* कहानी पाठ
(सरवत खान, चरणसिंह पथिक, राधेश्‍याम तिवारी, चन्‍द्रकांता, रश्मि भार्गव, दिनेश चारण, मनोज कुमार शर्मा, रतन जांगिड, असद अली असद वगैरह कहानियां सुनाएंगे।)

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