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कविता / मीनाक्षी नेगी

25 September 2012 No Comment

– मीनाक्षी नेगी


काश फिर एक बार

काश,
फिर ये ख़ामोशी टूटे,
सालों से दबी हुई
दिल की बात हो जाये…
मैं कहूँ, वो सुने,
कहते कहते मैं चुप हो जाऊं,,
वो मेरी नम आँखों की तन्हाई समझ जाये …
काश,
फिर ये बरसात हो,
मैं भीगूँ , वो भीगे
पास आकर वो कहे
मैं तुम्हे छू लूं?
मैं कहूँ नहीं
और वो छू ले मेरे दिल को…
वो कहे क्या मैं तुम्हे चूम लूँ?
मैं फिर कहूँ नहीं
और….
काश एक बार फिर प्यार हो जाये..


मीनाक्षी नेगी। गृहिणी, लेखिका और कवयित्री। रेडक्रॉस, दिल्ली में कार्यरत।

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