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दान सिंह की धुनों से महकी ’गीतांजलि’

20 June 2012 No Comment

आकाशवाणी, मुंबई के मशहूर रेडियो जॉकी यूनुस खान ने बॉलीवुड के विख्यात संगीत निर्देशक दान सिंह के निधन के बाद एक प्रतिष्ठित अखबार में लिखा था, `यदि वरिष्ठ पत्रकार ईशमधु तलवार ने दान सिंह पर फिल्म न बनाई होती तो हम उन्हें आज चलते-फिरते-गाते हुए कैसे देखते?’

सचमुच, इसी फिल्म की बदौलत जयपुर में दान सिंह को लोगों ने गाते-मुस्कराते, अपने संघर्ष और पीड़ा को बांटते और सुर-ताल के साथ पतंग उड़ाते हुए देखा। अवसर था 18 जून को दान सिंह की पहली पुण्यतिथि का, जिस पर पिंकसिटी प्रेस क्लब में ’गीतांजलि’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। दान सिंह पर बनाई गई लघु फिल्म ’तेरे जलवों की बात होती है’ के प्रदर्शन के साथ ही शहर के प्रख्यात गायकों ने दान सिंह की धुनों से सजे गीतों की प्रस्तुति दे कर साथ उन्हें अपनी ’गीतांजलि’ अर्पित की। दान सिंह अकादमी ट्रस्ट की ओर से इस कार्यक्रम का आयोजन पिंकसिटी प्रेस क्लब के खचाखच भरे सभागार में किया गया।


दान सिंह ब़ॉलीवुड के
वो विख्यात संगीतकार थे, जिनके कई सदाबहार गीत आज भी बजते हैं और लोग गुनगुनाते हैं। जैसे – ’वो तेरे प्यार का गम, इक बहाना था सनम, अपनी किस्मत ही कुछ ऐसी थी कि दिल टूट गया’ और ’जिक्र होता है जब कयामत का, तेरे जलवों की बात होती है, तू जो चाहे तो दिन निकलता है, तू जो चाहे तो रात होती है।’ खास बात यह है कि शशि कपूर-शर्मिला टेगौर अभिनीत फिल्म ’माई लव’ के इन गानों में लक्ष्मीकांत, प्यारेलाल, पं. शिवकुमार और हरिप्रसाद चौरसिया जैसे महान संगीतकारों ने दान सिंह के सहायक के रूप में काम किया था। इस फिल्म में लक्ष्मीकांत ने मेन्डोलिन और प्यारेलाल ने वायलिन बजाई थी।

गीतांजलि’ कार्यक्रम की खास बात यह रही कि दान सिंह की पत्नी डॉ. उमा याज्ञनिक ने भी अपनी प्रस्तुति दी। उन्होंने दान सिंह द्वारा संगीतबद्ध कवि दुष्यंत की रचना ’अंधेरी रात में दीपक जलाए कौन बैठा है’ गाई तो पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इस अवसर पर जब प्रदीप गोयल ने ’वो तेरे प्यार का गम’ गीत के स्वर छेड़े तो स्टेज पर राशिद खान के बजाए सेक्सोफोन ने लोगों को दाद देने पर मजबूर कर दिया। ’माई लव’ के इस गाने में दान सिंह ने सेक्सोफोन का बहुत खूबसूरत उपयोग किया था जिसमें बॉलीवुड के विख्यात फोनवादक संगीतज्ञ मनुहरि ने सेक्सोफोन बजाया था। संजय रायजादा ने ’जिक्र होता है जब कयामत का’ गीत के साथ दान सिंह को ’गीतांजलि’ दी तो लोगों ने एक बार फिर तालियां बजा कर अपनी खुशी का इजहार किया।

एस. बबलू के नेतृत्व वाली संगीतकारों की टीम ने बहुत खूबसूरती से दान सिंह की धुनों को बजाया। इसमें संजय पारीक ने कार्यक्रम का सम्मोहक और संगीतमय संचालन के साथ ही अपनी मखमली आवाज़ में दान सिंह की धुनों से सजे दो गीत भी सुनाए। ’भूल न जाना’ फिल्म के ये गीत थे – ’गमे दिल किस से कहूं, कोई भी गम खार नहीं’ और ’गोरा-गोरा मुखड़ा कहां से तूने पाया है’। यह जानना सुखद होगा कि इन गीतों की रचना करने वाले विख्यात गीतकार हरि राम आचार्य भी ’गीतांजलि’ कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थे और उन्होंने इस अवसर पर दान सिंह के निधन के बाद उन पर लिखा एक गीत भी सुनाया। हरिराम आचार्य वो गीतकार हैं, जिनके फिल्म ’मेहंदी रंग लाएगी’ के लिए लिखे गीतों को स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर ने अपनी आवाज़ दी।

इस कार्यक्रम में गायक के रूप में लोगों को सबसे ज्यादा किसी ने प्रभावित किया तो वह गौरव जैन थे, जिन्होंने दान सिंह की धुन से सजे और मुकेश के गाये गुलजार लिखित गीत ’पुकारो मुझे नाम ले कर पुकारो को हूबहू सुरों में ढाल कर श्रोताओं को रोमांचित कर दिया। दान सिंह की बनाई धुनों को जिन महान गायक-गायिकाओं ने अपने स्वर दिए हैं उनमें मौहम्मद रफी, मुकेश, मन्ना डे, आशा भोंसले, उषा मंगेषकर, गीता दत्त और सुमन कल्याणपुर आदि शामिल हैं। ’गीतांजलि’ में आशा भोंसले के गाए गीतों को जयपुर की दो गायिकाओं ने बड़ी खूबसूरती के साथ पेश किया। इनमें ’माई लव’ के गीत ’’भीगी-भीगी रात में उनसे हो गई मुलाकात’’ को जहां शिखा माथुर ने प्रस्तुत किया, वहीं ’भूल न जाना’ फिल्म के गीत ’’सुनाते हैं सितारे रात भर’’ की राजश्री ने सुरों के उतार-चढ़ाव को साधते हुए दिलकश अंदाज में पेशकश की।

इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथ थे ऊर्जा , जल संसाधन और सू,चना एवं जनसम्पर्क मंत्री डाॅ. जितेन्द्र सिंह, जिन्होंने दिल खोल कर कार्यक्रम की तारीफ की और भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार भी दान सिंह की स्मृति को चिर स्थाई बनाने की दिशा में प्रयास करेगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे राजस्थान पर्यटन विकास निगम के चेयरमैन रणदीप धनखड़ ने भी दान सिंह अकादमी ट्रस्ट के ऐसे आयोजनों को आगे बढ़ाने की जरूरत बताई। पिंक सिटी प्रेस क्लब के सभागार से जब लोग बाहर निकले तो दान सिंह के संगीतबद्ध गीतों को गुनगुना रहे थे। कार्यक्रम की सफलता का इससे बड़ा प्रमाण और क्या हो सकता है?

आइए सुनते हैं दान सिंह जी द्वारा संगीतबद्ध गीत

http://www.youtube.com/watch?v=SjAGQ5oUmrY

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