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ना ठीक से बाबा हुए, ना बिज़नेसमैन!

14 June 2011 One Comment

बाबा का एंटी करप्शन अभियान खत्म भले ना हुआ हो, लेकिन रामदेव का अनशन खत्म होने से कुछ निराशा ज़रूर हुई है। घुमक्कड़ पत्रकार आशीष कुमार अंशु की आंखो-देखी :

– आशीष कुमार अंशु
दिल्ली से शनिवार की सुबह तीन बजे ही बाबा रामदेव के आश्रम के लिए निकल गया था। उत्सुकता थी, उनके समर्थकों से मिलने की। सोचा था कि पातंजली योग पीठ में भारी भीड़ होगी। इस बात की जानकारी बिल्कुल नहीं थी कि शनिवार को गंगा दशहरा का त्योहार है। इसलिए यह भ्रम हुआ कि रास्ते में जो भीड़ मिल रही है, वह हरिद्वार नहीं बाबा रामदेव के द्वार जा रही है। रुड़की में जब हमारा जाने का रास्ता बदल दिया गया तो इस बात की पुष्टी हो गई कि बाबा रामदेव का आंदोलन उफान पड़ है। जाने से पहले इस बात का डर भी था कि रास्ते में हमारी गाड़ी को बाबा समर्थकों द्वारा नुक्सान ना पहुंचाया जाए। इसलिए हमारे साथ जा रहे, अंकुर भाई को हरिद्वार जाने से उनके घर वालों ने रोका। इस शुक्रवार को शाम चार बजे हमारा कार्यक्रम एक बार स्थगित भी हो गया था। बाद में अंकुर भाई ने अपने परिवार वालों को मुश्किल से अपने विश्वास में लिया और शुक्रवार की रात दस बजे यह तय हुआ कि सुबह तीन बजे अंकुर भाई, शंभू भाई और मैं, तीनों हरिद्वार के लिए रवाना होंगे।
जाम और थोड़ी बहुत अपनी गल्तियों और आराम तलबी के कारण छह सात घंटों का सफर हमने तेरह-चौदह घंटे में पूरी किया। बिना फ्रेश हुए, हम सीधा बाबा के आश्रम गए। दोस्त शंभू ने कहा भी कि वहां जाने का कोई फायदा नहीं है, वहां कुछ नहीं मिलने वाला। बाबा तो अस्पताल में होंगे। फिर कौन मिलेगा पातंजली योगपीठ में।
शंभू के इस तर्क पर मेरी समझ यह थी कि देश की सरकार जिस आंदोलन से इतना घबरा गई थी कि उसे कुचलने के लिए रात दो बजे कार्यवाही करनी पड़ी। उस आंदोलन के साथ कायदे से समर्थकों की फौज को तो परिसर में होना ही चाहिए। चूंकि देहरादून में आश्रम की तरफ से दर्शनार्थियों और बाबा के समर्थकों के ठहरने और बैठने के लिए कोेई इंतजाम नहीं था। योगपीठ की तरफ से भी बार बार इस बात के लिए आग्रह किया जा रहा था कि कोई भी व्यक्ति देहरादून ना जाए। अनशन स्थल के साथ लगे एक तख्त पर बाबा की बीमारी से संबंधित अपडेट लगातार लिखे जा रहे थे।
जब हम वहां पहुंचे वहां इस बात की घोषणा हो रही थी कि जिन लोगों ने बाबा के साथ अनशन जारी रखा है, वे लोग अपने हाथ खड़े करें। गिनती के हाथ खड़े हुए। जिन लोगों ने बाबा के साथ-साथ अपना अनशन जारी रखा था, उन लोगों का मेडिकल चेकअप आश्रम में ही चल रहा था। इसी चेकअप के लिए यह घोषणा हुई थी। एक राष्ट्रीय कहे जाने वाले आंदोलन के साथ मुश्किल से सौ-सवा सौ लोग वहां मौजूद थे। आश्रम से कुछ ही दूरी पर भारतीय किसान संघ के एक आयोजन में बाबा के आश्रम से कई गुणा अधिक लोग मौजूद नजर आए। आश्रम में उन लोगों की सूचि भी तैयार की जा रही थी, जिन्होंने चार तारिख की रात दिल्ली के रामलीला मैदान में हुए पुलिसिया कार्यवाही में चोट खाई थी। आश्रम इन लोगों की तरफ से सरकार के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी कर रहा है। चार तारिख की रात सरकार के उस राक्षसी अत्याचार का समर्थन कोई भी सभ्य नागरिक नहीं कर सकता है।
बाबा के अनशन को कवर कर रहे एक पत्रकार से बातचीत हुई तो उसने बेहद स्पष्ट शब्दों में बता दिया कि यह अनशन रात तक टूट जाएगा। रात तक का मतलब शनिवार की रात को। यदि रात तक कोई फैसला नहीं हो पाता तो किसी भी तरह रविवार की सुबह तक इस अनशन को टूटना ही है। दूसरी बात नाम ना छापने की शर्त पर बाबा रामदेव के आंदोलन से जुड़े एक व्यक्ति ने बताई कि आश्रम की तरफ से ही इस बात के प्रयास चल रहे थे कि अनशन को सरकार का कोई नुमाइन्दा आकर खत्म करवाए। इसके लिए जब सरकार तैयार नहीं हुई तो फिर दूसरा रास्ता अपनाया गया। वैसे बाबा के अनशन का टूटना आश्रम की योजना से ही हुआ है।
जब बाबा रामदेव के आश्रम में ही एक काउन्टर पर बैठे युवक से बातचीत हुई और मैंने तेजारावालाजी की जानकारी लेनी चाही। जो बाबा के करीब हैं। उस युवक ने जवाब दिया कि वह बाहर वाला है और वह आश्रम में स्वैच्छिक श्रमदान कर रहा है। इतने में पास में ही बैठे व्यक्ति ने उसे डांटते हुए कहा कि सच क्यो नहीं बोलते? वह युवक थोड़ा सकपका गया, उसके साथ बैठे सज्जन ने फिर बताया कि वह युवक बिहार में बाबा रामदेव के पातंजली योगपीठ से जुड़ा हुआ है। यह गलतबयानी उस युवक ने क्यों की, यह मैं अब तक नहीं समझ पाया हूं?
बाबा रामदेव को लेकर इतना भर कह सकता हूं कि वे ना ठीक से बाबा हो पाए, ना व्यावसायी और ना ही आंदालेनकारी। डर वास्तव में इसी बात का है कि लोगों का विश्वास इसी तरह टूटता रहा तो वे हर एक नए नेतृत्व को शंका की नजर से देखेंगे और किसी भी व्यक्ति के ऊपर से समाज का विश्वास डिगाना चुटकियों का खेल हो जाएगा।

और चलते-चलते अंशु के बज़ से ये ख़बर भी :
स्वामी निगमानंद का नाम बाबा रामदेव के पक्ष में माहौल बनाने वाले लोग जानते हैं क्या? इसी साल 19 फरवरी 2011 से स्वामीजी गंगा नदी के किनारे हो रहे अवैध खनन के विरोध में आमरण अनशन पर बैठे थे। 68वें दिन 27 अप्रैल 2011 को वे पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए। उन्हें देहरादून के उसी जॉली ग्रांट अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां बाबा रामदेव भर्ती थे। लेकिन बाबा से मिलने गए दिग्गज बाबाआंे की टोली ने स्वामीजी की टोह तक नहीं ली। रविवार को बाबा रामदेव ने अनशन तोड़ा और स्वामी निगमानंद ने सोमवार को दम तोड़ दिया।

One Comment »

  • tejwani girdhar, ajmer said:

    योग गुरू बाबा रामदेव में योग से सर्वथा विपरीत कायरता, दंभ, अहम भाव, धन लिप्ता के गुण हैं और ये ही उनकी परेशानी का कारण बन गए