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लोकपाल बिल पर एक कविता

30 April 2011 One Comment

# कुंदन

 

कई नेता लोकपाल बिल पर विरोध दिखा रहे थे

हमने उनसे पूछा आप क्यों इसका विरोध दिखलाते हैं तो

 

उनका तर्क था

जनता तक क्या हम पहले ही कम बिल पहुंचाते हैं

जो अन्ना एक और बिल जनता पर लादे जाते हैं

 

हम बोले ये बिल तो जनता को फायदा ही पहुँचायेगा

नेता जी बोले पहले ये बताइए क्या ये बिल संसद में पास हो पायेगा

 

हम बोले हां इसकी तो काफी कम ही उम्मीद है

क्योंकि जो ये बिल पास हो गया तो आपका दिल फेल हो जायेगा

 

नेता जी फिर आत्मविश्वास से बोले जो

ये बिल पास हो भी गया तो हमारा क्या बिगड जायेगा

 

हम बोले क्या बिल के पास होने से

जनता के पास अधिक अधिकार नहीं आ जायेगा

और आपके किये जाने वाले भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लग जायेगा

 

नेता जी फिर बोले क्या आप भूल गए

इस बिल का मसौदा भी कुछ नेता ही मिल कर बनायेंगे

हम बोले पर इस समिति में कुछ जनता के प्रतिनिधि भी तो आयेंगे

क्या वो उस सब के विरुद्ध आवाज नहीं उठाएंगे

 

नेता जी बोले क्या जनता के प्रतिनिधि जनता के भोलेपन से अलग होंगे

जब हमने 64 साल भोली जनता को मूर्ख बनाया

तो भला अब क्यों हम रियायत दिखायेंगे
फिर वो बोले इस बिल को

हम खरगोश के बिल की तरह बनायेंगे

 

जिसके कारण कभी भी हम भ्रष्टाचारी

इमानदारी के साँप की पकड में नहीं आएंगे

 

हम बोले आप आपका मुगालता पालिए

हम हमारा मुगालता पालेंगे

जो हम सफल हुए तो

भ्रष्टाचारियों पर कई सोंटे बरसाएंगे

और जो आप हुए सफल तो

हम हार नहीं मांनंगे और उसी सोंटे पर

इंकलाबी झंडा लगा कर

फिर से दिल्ली कूंच कर जायेंगे

और फिर भूख हड़ताल करेंगे

और फिर सरकार को हमारे सामने झुकायेंगे

लेकिन ये तय है

की अब जो आगे बढ़ चुके हैं कदम

तो उन्हें पीछे नहीं हटाएंगे,

या तो जियेंगे शान से

या इन्कलाब के इस तूफ़ान में

अपनी ताकत देते हुए मिट जायेंगे

पर अब हम एक अच्छा भारत बनायेंगे

One Comment »

  • nitin said:

    keep it up …..