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साहब तोरी साहबजदिया मिटाए देबो न

29 April 2011 No Comment

विश्‍व भोजपुरी सम्‍मेलन में भोजपुरी के सम्‍मान की मांग तेज

देवभूमि ऋषिकेश में त्रिवेणी घाट के मुक्ताकाश मंच पर आयोजित विश्‍व भोजपुरी सम्‍मेलन का दसवां राष्‍ट्रीय अधिवेशन सफलता पूर्वक संपन्न हो गया। सम्‍मेलन का उद्घाटन वरिष्‍ठ भाजपा नेता श्री कलराज मिश्र ने किया। इस अवसर पर देश-विदेश से आए भोजपुरिया लोगों के साथ-साथ स्‍थानीय लोग भी भारी संख्‍या में उपस्थित थे।

कलराज मिश्र ने कहा कि भोजपुरी केवल भाषा ही नहीं, बल्कि एक संस्‍कृति है, यह रहन-सहन की एक पद्धति है। भोजपुरी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने के संबंध में उन्‍होंने कहा कि इसके लिए प्रयास जारी हैं और आने वाले संसद सत्र में इस मुद्दे को जोरशोर से उठाया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान भोजपुरी साहित्‍यकार एवं कवि श्री हरिराम द्विवेदी को सेतु सम्‍मान और प्रख्‍यात भोजपुरी गायिका श्रीमती मालिनी अवस्‍थी को भिखारी ठाकुर सम्‍मान से सम्‍मानित किया गया।

साहित्यिक परिचर्चा
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भोजपुरी समाज का पिछडापन, कारण और निदान

डॉ. बी .एन . यादव  की अध्यक्षता एवं डॉ. लाल बाबू यादव के संचालन में आयोजित परिचर्चा में भोजपुरी समाज के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए आवश्यक उपायों पर चर्चा की गई। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में निवेश न होने, उद्योग-धंधों की कमी तथा रोज़गार की तलाश में युवाशक्ति का दूसरे राज्यों में पलायन होना भोजपुरी समाज के पिछड़ेपन का मुख्य कारण है। परिचर्चा में समाज के लोगों को जागरूक और संगठित करने के साथ-साथ उन्हें अपने अधिकारों के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता पर बल दिया गया। चर्चा में आचार्य पंकज, श्रीमती सरिता बुधू, मॉरिशस, डॉ. बीएन तिवारी, सतीश त्रिपाठी, डॉ. अरुणेश नीरन, डॉ. अशोक सिंह, यमुना व्यथित, मनोज श्रीवास्तव, डॉ. धर्मदेव तिवारी और अरविंद विद्रोही आदि ने विचार व्यक्त किए।

समकालीन भोजपुरी गद्य : स्थिति एवं गति

इस  सत्र में भोजपुरी साहित्य का प्रचार-प्रसार नहीं होने पर चिंता जताई गई। इसके साथ ही भोजपुरी साहित्य के प्रचार-प्रसार पर जोर दिया गया। डॉ. अशोक द्विवेदी के संचालन और डॉ. रमाशंकर श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आयोजित बतकही में डॉ. सरिता बुधू ने कहा कि मॉरिशस, फिजी, सूरीनाम आदि देशों में भी भोजपुरी की स्थिति अच्छी नही है। अभी संघर्ष की जरूरत है। भोजपुरी साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिए मनोज भावुक ने भोजपुरी पुस्तक मेला आयोजित करने व प्रचार-प्रसार के आधुनिक संसाधनों के इस्तेमाल पर जोर दिया।

डॉ. प्रेमशीला शुक्ल ने अति भावुक होकर कहा कि भोजपुरी साहित्य के विकास हेतु स्वस्थ आलोचना साहित्य को विकसित करना होगा। डॉ. कमलेश राय, डॉ.यादव, डॉ. त्रिपाठी, डॉ. अशोक सिंह, कुलदीप श्रीवास्तव, जवाहर लाल आदि ने भी भोजपुरी साहित्य के प्रचार-प्रसार की वकालत की।

कवि-सम्मेलन

इस अवसर पर आयोजित देश के 12 प्रतिनिधि भोजपुरी कवियों ने काव्य-पाठ किया। अध्यक्षता पंडित हरिराम द्विवेदी और संचालन डॉ. अशोक द्विवेदी ने किया। कड़ी दोपहरी में भी लोगों को न सिर्फ बांधकर रखने, बल्कि सोचने-समझने पर मजबूर करने वाले ये कवि थे–चन्द्रभाल, डॉ. कमलेश राय, डॉ. अनिल ओझा नीरद, डॉ. अनिरुद्ध त्रिपाठी अशेष, कवयित्री सुभद्रा वीरेन्द्र,  युवा कवि मनोज भावुक, हास्यावतार पंडित कुबेर नाथ मिश्र 'विचित्र', तारकेश्वर मिश्र 'राही', डॉ. हजारी लाल गुप्त।

लोकरंग–पारंपरिक लोक गीतों से लेकर आधुनिक भोजपुरी ग़ज़ल तक की प्रस्तुति

त्रिवेणी घाट पर लाखों की भीड़, पांव रखने तक की जगह नहीं। रात के 9 बजे से  लेकर भोर के 3 बजे तक चलने वाले इस अनोखे सांस्कृतिक कार्यक्रम का संचालन  कवि मनोज भावुक ने किया। अपनी प्रस्तुति से लोगों को थिरकने पर मजबूर करने वाले ये गायक थे- कजरी साम्राज्ञी उर्मिला श्रीवास्तव, परमहंस चौरसिया (निर्गुण ), अजय अजनबी (आधुनिक), उदय नारायण सिंह (वीर कुंवर सिंह गाथा, भोजपुरी ग़ज़ल), रामेश्वर गोप (भिखारी ठाकुर-बारहमासा)। इस अवसर पर पंडित मुरारी लाल शर्मा की टीम ने मयूर नृत्य किया .

नटरंग-

विश्व भोजपुरी सम्मेलन के दोनों दिन सांस्कृतिक सत्र का आयोजन किया गया, जो खचाखच भरे त्रिवेणी घाट पर गंगा मैया के अंचरा के छाँह में देर रात तक चला। इस सत्र में मानवीय महिला सेवार्पण केंद्र,आरा बिहार की टीम ने श्रीमती पूनम सिंह के निर्देशन में भिखारी ठाकुर के बहुचर्चित नाटक गबरघिचोर का मंचन किया। इसके अलावा, सांस्कृतिक संगम सलेमपुर, देवरिया की लगभग 50 कलाकारों की टीम ने मानवेन्द्र त्रिपाठी के निर्देशन में भोजपुरी नृत्य नाटिका 'मेघदूत की पूर्वांचल यात्रा' का करिश्माई प्रदर्शन किया। लोग टस से मस होने का नाम नहीं ले रहे थे। कई बार लोग हंसते -हंसते लोट-पोट हुए तो कई बार आंख से आंसू छलक पड़े। कार्यक्रम समाप्त हो गया पर लोग जाना नहीं चाह रहे थे। यह एक अद्भुत प्रस्तुति थी। नटरंग का संचालन भी मनोज भावुक ने ही किया।

समापन समारोह –

समापन समारोह के अवसर पर मुख्‍य अतिथि के रूप में आमंत्रित उत्‍तर प्रदेश एवं उत्‍तराखंड के पूर्व मुख्‍यमंत्री नारायण दत्‍त तिवारी ने भोजपुरी भाषा, कला संस्‍कृति, साहित्‍य और संगीत की सराहना करते हुए कहा कि भोजपुरी एक तेजस्‍वी और मधुर भाषा होने के साथ-साथ स्‍वतंत्रता संग्राम की भी भाषा है। उन्‍होंने कहा कि स्‍वतंत्रता आदोलन के दौरान जेल में बंद स्‍वतत्रता सेनानी, जिनमें वे खुद भी शामिल थे, प्राय: एक भोजपुरी क्रांति गीत गाया करते थे, जिसके बोल थे–राजा तोरी राजशहिया मिटाए देबो न, साहब तोरी साहबजदिया मिटाए देबो न"। उन्‍होंने कहा कि यह भोजपुरी भाषा की व्‍यापकता और प्रभाव का अप्रतिम उदाहरण है।विश्‍व भोजपुरी सम्‍मेलन के राष्‍ट्रीय महासचिव अरूणेश नीरन ने विश्‍व भोजपुरी सम्‍मेलन द्वारा भोजपुरी के विकास और उत्‍थान के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी देते हुए कहा कि सम्‍मेलन का उदे्दश्‍य  भोजपुरी भाषा, साहित्‍य और संस्‍‍कृति के प्रसार-प्रचार के साथ-साथ इस क्षेत्र की प्रतिभाओं को आदर और सम्‍मान देते हुए उन्‍हें अनुकूल मंच प्रदान करना भी है। इसी क्रम में उन्‍होंने संस्‍था द्वारा साहित्यिक क्षेत्र की विशिष्‍ट हस्तियों को दिए जाने वाले सेतु सम्‍मान एवं लोक संगीत के क्षेत्र में दिए जाने वाले भिखारी ठाकुर सम्‍मान के बारे में भी विस्‍तृत जानकारी प्रदान की।
दो दिवसीय सम्‍मेलन के दौरान अनेक पुस्‍तकों के विमोचन आदि के कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। इस सम्‍पूर्ण आयोजन में विश्‍व भोजपुरी सम्‍मेलन के अंतरराष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष श्री सतीश त्रिपाठी सहित सभी प्रांतीय अध्‍यक्ष एवं अन्‍य पदाधिकारी जैसे सरिता बुधु, डॉ. बीएन तिवारी, डॉ अशोक सिंह, श्री अनिल ओझा नीरद, मनोज श्रीवास्‍तव, कुलदीप श्रीवास्‍तव, कमल नारायण मिश्रा एवं श्री बीएन यादव आदि उपस्थित रहे।

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