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जय चैनल बाबा : साईं पहले फ़र्जी, अब चमत्कारी?

25 April 2011 One Comment

चेहरों की किताब पर मयंक सक्सेना ने एक बहस छेड़ दी है। सवाल ये कि साईं को अब तक फर्जी कहने वाले चैनल कैसे उन्हें मौत के बाद चमत्कारी कहने लगे…बात-बहस जारी है, इस बीच अलग-अलग वक्त पर मयंक की कही बातें हम चौराहा के लिए उठा लाए हैं…इनमें कुछ-कुछ वाक्य / शब्द जोड़ दिए गए हैं, कुछ-कुछ edit कर दिया गया है, लेकिन इरादा कुछ ख़राब नहीं है, ये कोशिश की गई है कथन को एकसार करने के लिए : मॉडरेटर

 

वाकई समाचार चैनलों का चरित्र हैरान कर देने वाला है…जिस व्यक्ति को लगातार लानतें भेजते रहे…फ़र्ज़ी बताते रहे….तमाम तरह के आरोप लगाते रहे…चमत्कारों की पोल खोलते रहे…उस पर अब फूल बरसाने में लगे हैं…उसे चमत्कारी बता रहे हैं…उसकी महिमा का गुलशन कुमार स्टाइल में वर्णन कर रहे हैं….क्या न्यूज़ चैनल टी सीरीज़ बिना बने इस ख़बर को नहीं चला सकते….पर इस मौके पर हमें यह भी सोचना होगा कि हम मीडिया की ईमानदार समीक्षा करें…न कि उसे गाली दें…क्योंकि हम भी अपनी-अपनी जगह कौन से तीर मार रहे हैं देश या समाज के लिए….?

हैरानी इस बात पर कतई नहीं है कि ये ख़बर लगातार चल रही है या पैकेज की जा रही है…टीआरपी के लिए इमोशंस भुनाना नई बात नहीं…पर हैरानी ये है कि वो ही सबसे ज़्यादा महिमामंडन कर रहे हैं, जिन्होंने सबसे ज़्यादा मान-मर्दन किया था…सबसे बड़ी बात कि एनडीटीवी भी फूल बरसाए तो समझो कि कुछ गड़बड़ है…दूसरा साहब ये कि अन्ना के आंदोलन के बाद थोड़ी उम्मीद बढ़ी थी कि शायद चीज़ें बदल जाएं…

तर्क दिया जाता है कि टेलिविजन चैनल करोड़ों की आस्था का लिहाज कर रहे हैं, तो इस पर ये सवाल करूंगा कि कल को वही आस्था किसी दाऊद इब्राहिम पर होगी तो उसका भी क्या हम सम्मान करेंगे…आरोप तो ए. राजा पर भी साबित नहीं हुए हैं…और भी तमाम लोग हैं…सवाल ये है कि कैसे पत्रकार किसी ऐसे शख्स का महिमामंडन कर सकते हैं जो अपने आप को भगवान कहता है…

भूल गए पत्रकारिता की किताब का पहला सबक…कि हमें केवल इन्फॉर्मेट नहीं करना…जागरूक भी करना है…हर तरह के अंधविश्वास के खिलाफ़…कुछ चैनलों ने पिछले साल कई मौकों पर सत्य साई को हाथ की सफाई दिखाने वाला करार दिया था…अब क्या चल रहा है वहां…और तब उस वक्त उन करोड़ों लोगों की आस्था को किस तिजोरी में छुपा रखा था ऐसे चैनल संपादकों ने?

वैसे भी, सत्य साई को लोगों ने बाद में भगवान कहा…उन्होंने खुद ही इसकी घोषणा पहले कर दी थी…ऐसे किसी भी व्यक्ति को आप सही कैसे ठहरा सकते हैं जो स्वयंभू ईश्वर हो जाए…और इस प्रश्न का क्या उत्तर है हमारे पास कि हम भी चमत्कारों में विश्वास रखते हैं…? और फिर भी खुद को पत्रकार, निष्पक्ष कहते हैं?

हालात बशीर बद्र के इस शेर की तरह तो नहीं हैं–बड़े सलीके से झूठ बोलता रहा…मैं एतबार न करता तो और क्या करता…?

अफ़सोस…ब्लिट्ज़ ने जब इस पर स्टोरीज़ कीं तो इन साईं बाबा ने ब्लिट्ज़ वालों को इनके दावों और तथाकथित चमत्कारों की जांच करने बुला डाला…जब ये हाथ से घड़ी पैदा करने लगे तो ब्लिट्ज़ के पत्रकारों ने एक विशेष ब्रांड की घड़ी निकालने को कहा…फिर क्या…चुप लगा गए साहब…जय हो साईं की…जय हो…और हां, ऐसे चैनलों की भी जय-जय!

One Comment »

  • dushyant said:

    मयंक ने वारदार-धारदार लिखा और प्यास बढाई … पर अधूरी छोड दी, जरा विस्तार से लिखते तो बात मुकम्मल होती और आर्गेज्म तक पहुचते तो क्या बात थी !!!