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Jan Deboutte की नज़र में भारत

24 April 2011 2 Comments

दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय स्कूल, गांवों में छोटा-छोटा ज्ञान भी नहीं

Jan Deboutte सन् 2007 से लेकर 2011 की शुरुआत तक भारत मे बेल्जियम (Belgium) के राजदूत रह चुके हैं. बेल्जियम पश्चिमी यूरोप का एक देश है, जो यूरोपियन यूनियन के संस्थापक सदस्यों मे से एक है और यहां पर यूरोपियन यूनियन के मुख्यालय के साथ-साथ कई बड़े संगठनों के भी मुख्यालय हैं। इन स्थितियों में यह महत्वपूर्ण बात है कि ऐसे देश के अधिकारियों की भारत के बारे मे क्या राय है, यही जानने का मौका मिला Jan Deboutte के एक लेक्चर से।

ये कहना है चन्द्रशेखर पति त्रिपाठी का। चन्द्रशेखर बेल्जियम में ही शोधरत हैं। उनके बारे में विस्तृत जानकारी यहां क्लिक करने पर मिल जाएगी। त्रिपाठी चौराहा के नियमित पाठक हैं और वह गाहे-ब-गाहे रचनाओं और लेखों पर प्रतिक्रियाएं भी देते रहे हैं, जिसके लिए हम उनके आभारी हैं। चन्द्रशेखर ने Jan Deboutte के भाषण के चुनिंदा अंश हमें मुहैया कराए हैं, साथ ही अपनी टिप्पणियां भी पेश की हैं… आइए, पढ़ें और श्री त्रिपाठी को chandrashekhar.patitripathi@fys.kuleuven.be पर अपनी प्रतिक्रिया से अवगत भी कराएं : मॉडरेटर

 

अर्थव्यवस्थाः सन 1700 में भारत की जीडीपी दुनिया की जीडीपी का 24.4% थी, जो 1952 में सिर्फ 3.8% रह गई, लेकिन आंकड़ों की मानें तो 2035 मे यह चीन और अमेरिका के बाद विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगी। 2010 में भारत की जीडीपी वृद्धि की दर 8.3% थी। भारत में अब भी 52% लोग खेती पर निर्भर हैं, जबकि यूरोप मे सिर्फ 2.5% और अमेरिका मे इससे भी कम। इसके बाद भी यह अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है। यह purchasing power parity के हिसाब से दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। भारत की अर्थव्यवस्था में बहुत बड़ा योगदान विदेशों मे बसने वाले भारतीयों द्वारा भेजा जाने वाला धन का भी है। इसके अलावा IT सेक्टर तेजी से उभर रहा है। कुल मिलाकर इसे थोड़े से सामन्जस्य की जरूरत है और निश्चित रूप से तमाम छोटी खामियों के बावजूद भारत एक महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर है।

शिक्षा : अगर कहा जाए, तो भारत की सबसे बड़ी कमियों मे से एक…उच्चशिक्षा के मामले मे तो स्थिति तब भी बहुत ही बेहतर है, लेकिन प्राइमरी और मिडिल की पढ़ाई मे पूरे देश मे भारी असमानता है। जहां दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्कूल हैं, वही गांवों मे कक्षा 5 के विद्यार्थियों को बहुत सारी छोटी-छोटी चीजें नहीं पता। सरकार का इस पर पूरा ध्यान है और इसे बेहतर बनाने के लिए प्रयास जारी है।

राजनीति और चुनाव : भारत में दुनिया की सबसे बड़ी लोकतान्त्रिक व्यवस्था है, जो तमाम छोटी-बड़ी कमियों के साथ काफी अच्छे तरीके से चल रही है।

Jan भारत मे होने वाले चुनाव और उसके तरीकों से बहुत ही खुश थे. उनका कहना था कि रिमोट इलाकों मे कुछ लोगों के लिए मतदान केन्द्र बनाया जाना और यह सुनिश्चित करना कि अधिकाधिक संख्या मे लोग वोट देने जाएं, भारत के लिए बहुत ही अच्छी बात है। उनका कहना था कि 1947 में मिली आजादी के बाद हुए तमाम उठापटक के बावजूद और राजनीतिज्ञों पर भारी निर्भरता होने के कारण बहुत सारी असन्तुलित घटनाएं भी होती रहती हैं, लेकिन इन सबके बावजूद भारत में आज एक बहुत ही संतुलित लोकतान्त्रिक व्यवस्था है।

न्याय व्यवस्थाः Jan के शब्दों में भारत के पास बेहतरीन न्याय व्यवस्था है, लेकिन इसके कार्यान्वयन में बहुत सारी बाधाएं हैं। न्याय तो मिलता है, लेकिन समय बहुत लग जाता है। फास्ट ट्रैक कोर्टों की वजह से कुछ तेजी आई लेकिन अब भी बड़े पैमाने पर सुधार की जरूरत है।

आतंकवादः भारत आंतरिक और वाह्य, दोनों तरह के आतंकवाद से जूझ रहा है। जहां हिन्दू-मुस्लिम दंगे हो जाते हैं, वहीं नक्सलवादी भारत के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका से आने वाले आतंकवादियों की वजह से भी तमाम परेशानियां होती रहती हैं, लेकिन सरकार उनसे निपटने की पूरी कोशिश में लगी है। लोगों के बीच का सामन्जस्य वाकई में देखने लायक और प्रशंसनीय है।

अंतरराष्ट्रीय सम्बन्धः संक्षेप में कहा जाए तो विश्व पटल पर भारत एक नई जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार खड़ा दिखाई दे रहा है. बराक ओबामा के शब्दों में, “नई ताकतों के साथ नई जिम्मेदारियां भी आती हैं” और भारत इसके लिए बखूबी तैयार है. पिछले वर्ष नेटो के सभी स्थायी सदस्यों ने भारत का दौरा किया और भारत की स्थायी सदस्यता की बातें जोर-शोर से हुईं।

सारी अच्छी बातों के साथ भारत के सामने कुछ समस्याएं खड़ी हैं, जिनका उसे समाधान ढूढना है। जैसे Human Development Index की सूची में भारत का स्थान 119 वां है। अब भी वहां पर अमीरी गरीबी का भेदभाव है, जाति धर्म का भेदभाव है, पुरूष महिला का भेदभाव है…

इन सारी बातों के साथ भारत विश्व परिदॄश्य मे तेजी से उभरता देश है और आने वाले कुछ वर्षों मे भारत विश्व की राजनीति, अर्थव्यवस्था और विकास में तेजी से योगदान करने जा रहा है।

2 Comments »

  • पंकज झा. said:

    प्रिय चन्द्रशेखर जी …बधाई एवं साधुवाद आपको. काफी जानकारीप्रद एवं सकारात्मक लेखन किया है आपने.किसी विदेशी के मुंह से अपने देश की तारीफ़ सुन काफी अच्छा लगता है साथ ही जब वो बिना किसी पूर्वाग्रह के अपने नीर-क्षीर विवेक से हमें अपनी कमियों से भी अवगत कराते हैं तो बुरा नहीं लगता अपितु उसे सुधारने की प्रेरणा ही मिलती है. आप लगातार लेखन करते रहें. खासकर बेल्जियम में रहते हुए वहाँ से ‘देश’ को देखने की हर सफल कोशिश से हमें अवगत कराते रहे यही आग्रह. सुन्दर रपट.

  • prem prakash said:

    hi chandrashekahar, it is good to see u here. when everybody talking about negative, we should think also in our positive aspect. and it is nice that u r doing this. it is right education is our failure point even government is determined to do better on this. but there is lack of plan. i hope our new generation and you people will do something good in this field. best of luck.