Home » साहित्य-सिनेमा-जीवन

अन्तस्थल के किसी कोने में / जैसे कुछ चुभता रहता है…

19 April 2011 One Comment

भोलानाथ शुक्ल ने वीडियो एडिटिंग की पढ़ाई की है। फ़िलहाल, एमए की परीक्षाएं देने में जुटे हैं। कविताएं लिखते हैं और लेख भी। उनकी एक और काव्य कृति चौराहा पर। भोलानाथ का ब्लॉग भी देख सकते हैं आप…

 

अनचाहे अनजाने में
कब कैसे कुछ हो जाता है

जगी  आँखों  का एक सपना  सा
सब कुछ मिलके खो जाता है

मीठे सपनों की दुनिया में
मन मयूर रम जाता है

जीवन के हर दुःख सुख से
दिल मस्ताना हट जाता है

अन्तस्थल के किसी कोने में
जैसे कुछ चुभता रहता  है

आप भी समझते होंगे शायद
दर्द जीव का क्या होता है

 

One Comment »

  • shikha said:

    فري نيك…………………………
    بحلة تمن بحت عكسه كفيتي ليخ حي …
    تم سكه م بحت عكسه هو ……………….