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Articles Archive for December 2014

स्मृति-शेष, है कुछ खास...पहला पन्ना »

[6 Dec 2014 | Comments Off on मैं अयोध्या हूं…। | ]
मैं अयोध्या हूं…।

– चण्डीदत्त शुक्ल
राजा राम की राजधानी अयोध्या…। यहीं राम के पिता दशरथ ने राज किया…यहीं पर सीता जी राजा जनक के घर से विदा होकर आईं। यहीं श्रीराम का राज्याभिषेक हुआ। यहीं बहती है सरयू, लेकिन अब नदी की मस्ती भी कुछ बदल-सी गई है। कहां तो कल तक वो कल-कल कर बहती थी और आज, जैसे धारा भी सहमी-सहमी है…धीरे-धीरे बहती है। पता नहीं, किस कदर सरयू प्रदूषित हो गई है…कुछ तो कूड़े-कचरे से और उससे भी कहीं ज्यादा सियासत की गंदगी से। सच कहती हूं…आज से सत्रह साल …

खेल-तमाशा »

[3 Dec 2014 | 3 Comments | ]

आज भोपाल गैस त्रासदी की 30वीं बरसी है। मानव समाज को थर्रा देने वाले इस हादसे की याद में एक कविता :
– अनुलता राज नायर
नहीं था खौफ़ अंधेरों का
उस रात के पहले…
नहीं जागती थी रातें, रातों को
उस रात के पहले |
वो रात जिसकी सुबह
नहीं निकला था सूरज
आसमान नहीं हुआ सिंदूरी ,
कितनी मांगों के लाली पुछ गयी
कि काला था वो दिन |
उस सुबह
नहीं चहचहायीं चिड़ियें
कि सन्नाटे को तोड़ने की
हिम्मत नहीं थी उनमें ….
लाशों से पटे अस्पताल के बरामदे
बदराई आँखों से तकते बच्चे
लिख रहे थे
खौफ़ की नयी परिभाषाएं |
किसी की एक भूल …

यादें, है कुछ खास...पहला पन्ना »

[3 Dec 2014 | Comments Off on पहिला इंजेक्शन तो `डीडीएलजे’ ही दिहिस… | ]
पहिला इंजेक्शन तो `डीडीएलजे’ ही दिहिस…

दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे की रिलीज को जल्द ही 1000 हफ्ते पूरे हो जाएंगे। एक मित्र ने याद दिलाया तो मोहल्ला लाइव पर छपा एक पुराना लेख चौराहा पर साझा कर रहे हैं।
– चण्डीदत्त शुक्ल
20 अक्टूबर, 1995… पक्का यही तारीख थी। याद इसलिए नहीं कि इस दिन डीडीएलजे देखी थी। भुलाइ इसलिए नहीं भूलती, क्योंकि इसी तारीख के ठीक पांच दिन बाद सलीम चच्चा ने पहली बार इतना ठोंका-पीटा-कूटा-धुना-पीसा था कि वो चोट अब भी सर्दी में ताज़ा हो जाती है। हुआ यूं कि सलीम चच्चा बीज के लिए …