Home » Archive

Articles Archive for November 2014

यादें, संगीत-कला, साहित्य-सिनेमा-जीवन, स्मृति-शेष »

[29 Nov 2014 | Comments Off on मरुभूमि का राग – मांड | ]

– कोषा गुरुंग
झरनों के संगीत और नई फसल की खुशी, अपने आप उगे हुए फूलों की मादक सुगंध, पक्षियों का कलरव, पहाड़ों की चोटियों पर बर्फ की सफेद चादर, बच्चों की किलकारियां, सरल हृदय युवतियों का प्यार, जातीय पर्व-त्योहार, यही तो है – लोक संगीत, जो हमें मानवीय संवेदनाओं से जोड़ता है और हमें अपने आप से रू-ब-रू कराता है।
अचानक पहाड़ के पीछे से दल के दल बादल निकल आते हैं और धूप की गर्मी खत्म हो जाती है। गांवों के लोग घरों से और खेतों से बाहर चले आते …

है कुछ खास...पहला पन्ना »

[26 Nov 2014 | One Comment | ]

आलोक तोमर

बुधवार की शाम सात बजे मुंबई हवाई अड्डे पर पंद्रह दिन में दूसरी बार उतरने के बाद पहला इरादा तो सीधे फिल्म सिटी जाने का था जहां से एक फिल्म निर्माता मित्र ने टिकट भेजा था। मगर इसे संयोग कहा जाए, दुर्भाग्य कहा जाए, विडंबना कहा जाए या नियति कहा जाए कि उनका मोबाइल फोन बंद आ रहा था और गाड़ी लेने के लिए नहीं आई थी।
यह भी एक संयोग था कि एक मित्र टाउन यानी कोलाबा इलाके मेंं जा रहे थे और वक्त काटने और बहुत दिनों बाद …