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Articles Archive for January 2013

यादें, स्मृति-शेष, है कुछ खास...पहला पन्ना »

[30 Jan 2013 | Comments Off on किसी गांव सा था वो, शहर में गुज़र गया | ]
किसी गांव सा था वो, शहर में गुज़र गया

(पिछले दिनों गोंडा के वरिष्ठ पत्रकार केसी महंथ नहीं रहे। उन्हें दी गई आदरांजलि, समाचार 4 मीडिया.कॉम और भड़ास 4 मीडिया.कॉम पर प्रकाशित, वहीं से साभार)
– चण्डीदत्त शुक्ल
गूगल पर केसी महंथ के बारे में कुछ तलाश रहा हूं। यह जानते हुए कि कुछ नहीं मिलेगा। एक भी रिजल्ट नहीं। वैसे, ये बेहद बेशर्मी, आलस्य और अपनी जड़ों से कट जाने वाली हरकत है। पर क्य़ा कहूं। ऐसा ही है। हो सकता है, कल को ये दिन भी आए कि लोग अपने मां-बाप के बारे में भी गूगल पर इन्फो तलाशने …

साहित्य-सिनेमा-जीवन, है कुछ खास...पहला पन्ना »

[24 Jan 2013 | Comments Off on JLF 2013 begins with Mahasweta Devi’s speech | ]
JLF 2013 begins with Mahasweta Devi’s speech

The 2013 edition of the DSC Jaipur Literature Festival started with an inauguration speech by eminent author and social activist Mahasweta Devi. She reflected on her long and illustrious life and writing career in a speech laced with references to the rich world of ideas she has imbibed from the tribal and rural cultures that have been the subject of her work.Ashok Gehlot – CM Rajasthan and Margaret Alva – Governor of Rajasthan at the inaugural ceremony of Jaipur Literature Festival 2013
Having written on the “culture of the downtrodden” throughout …

चर्चाघर, है कुछ खास...पहला पन्ना »

[22 Jan 2013 | Comments Off on कहानी अच्छी हो तो फ़िल्म ज़रूर चलेगी : अंकुश भट्ट | ]
कहानी अच्छी हो तो फ़िल्म ज़रूर चलेगी :  अंकुश भट्ट

दैनिक भास्कर के फ़िल्म सप्लिमेंट `नवरंग’ में प्रकाशित
दस्तक

`भिंडी बाज़ार’ जैसी प्रायोगिक और चर्चित फ़िल्म निर्देशित करने के बाद अंकुश भट्ट नई मूवी `मुंबई मिरर’ के साथ दर्शकों के सामने हाज़िर हो रहे हैं। अंकुश की यह फ़िल्म मुंबई शहर के अंधेरे पहलू, एक एड़ा (`सनकी’) पुलिस इंस्पेक्टर, बार डांसर और टेलीविजन पत्रकार के किरदारों के बीच घूमती है। `मुंबई मिरर’ का प्रमोशन करने फिल्म की स्टारकास्ट के साथ जयपुर आए अंकुश से हमने बातचीत की :

कहां तो `भिंडी बाज़ार’ जैसी एक्सिपेरिमेंटल फ़िल्म और कहां अब `मुंबई मिरर’ – जिसमें सारे …

खेल-तमाशा, है कुछ खास...पहला पन्ना »

[16 Jan 2013 | Comments Off on न ख़बर हैं, न गब्बर (विलेन) हैं, शायर हैं निदा फाजली! | ]
न ख़बर हैं, न गब्बर (विलेन) हैं, शायर हैं निदा फाजली!

बेबाक : खंजर ना बने खबर
– दुष्‍यंत
निदा फाजली को जिस दिन देश का बडा स्‍तम्‍भकार हमारे समय का कबीर बता रहा था, उसके अगले दिन इंटरनेट और टीवी पर एक विवादास्‍पद बयान के लिए उन्‍ही निदा को खबर बनाया जा रहा था। कबीर को भी उनके समय में कम ही लोगों ने समझा था, तो क्‍या निदा को भी कम ही लोग समझते हैं।
‘पाखी’ दिल्‍ली से प्रकाशित चर्चित मासिक साहित्यिक पत्रिका है, प्रेम भारद्वाज उसके संपादक है, पिछले सालों में कई शानदार अंकों के जरिए उन्‍होंने ‘पाखी’ की पहचान खडी …