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Articles Archive for October 2012

साहित्य-सिनेमा-जीवन »

[31 Oct 2012 | Comments Off on इरफान खान के मैनेजर भी बने प्रोड्यूसर | ]
इरफान खान के मैनेजर भी बने प्रोड्यूसर

हर कोई अपनी जिन्दगी में तरक्की की सीढ़ी चढना चाहता है चाहे वो फिल्म अभिनेता हो , निर्माता हो या फिर फिल्म अभिनेताओं व अभिनेत्रियों को मैनेज करने वाला खुद मैनेजर। ऐसे ही एक हैं सनी शाह जो की पिछले कई वर्षों से फिल्म सेलेब्रेटी को मैनेज कर रहे हैं और अब उनका अगला कदम है फिल्म निर्माता बन कर लोगों को अच्छी — अच्छी फ़िल्में देकर उनका मनोरंजन करना.
इसी कड़ी में उनका अगला कदम है …

साहित्य-सिनेमा-जीवन, है कुछ खास...पहला पन्ना »

[31 Oct 2012 | Comments Off on खसम मरे तो रोणा पिटना यार मरे तो कित जाणा | ]
खसम मरे तो रोणा पिटना यार मरे तो कित जाणा

राम सरूप अणखी स्मृति कहानी-गोष्ठी
डलहौजी। राम सरूप अणखी स्मृति कहानी-गोष्ठी का आयोजन इस वर्ष डलहौजी के होटल मेहर में हुआ। इस साल गोष्ठी में हिन्दी, असमिया, पंजाबी, डोगरी कीकहानियों का पाठ स्वयं कहानीकारों द्वारा किया गया। संगोष्ठी के उदघाटन सत्र में संयोजक अमरदीप गिल ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया और तीनदिवसीय संगोष्ठी की रूपरेखा रखी। संगोष्ठी के आयोजक और कहानी पंजाब के सम्पादक डॉ क्रान्ति पाल ने इन संगोष्ठियों के आयोजन की सुदीर्घ परम्परा कोस्पष्ट करते हुए बताया कि समकालीन कथा रचनाशीलता को व्यापक तौर पर देखने समझने …

दिल के झरोखे से..., है कुछ खास...पहला पन्ना »

[30 Oct 2012 | Comments Off on सपना हुआ पूरा – पंकज चतुर्वेदी | ]

कहते हैं कि खुली आँखों से देखे हुए सपने अक्सर पूरे हो जाते हैं ऐसा ही एक सपना पूरा होने जा रहा है गायक पंकज चतुर्वेदी का. जो की बचपन से ही गीत-संगीत के शौक़ीन रहे हैं. पंकज सन १९९५ में ए बी सी एल की स्टार ट्रेक टेलेंट हंट प्रतियोगिता के विजयी रहे व स्कूल-कालेज में भी संगीत की कई प्रतियोगिताये जीती. रिच ग्राविस कंपनी के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर और सी ई ओ पंकज दस साल तक बस्किन रोब्बिन्स के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स में भी शामिल रह चुके हैं. पंकज …

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[23 Oct 2012 | Comments Off on अलविदा – सुनील दा : कस्तूरी की महक के कुछ पल! | ]
अलविदा – सुनील दा : कस्तूरी की महक के कुछ पल!

दुष्यंत
बंगाली के अत्यंत सुकोमल कवि और सबसे ज्यादा पठित कथाकारों में से एक सुनील दा का आज जाना क्या मायने रखता है, इसका ठीक-ठीक मूल्यांकन होने में समय लगेगा। सुनील गंगोपाध्याय से बस एक मुलाकात रही मेरी। वे दिल्ली के सर्दी के दुर्लभ धूपीले दिन थे। तब वे साहित्य अकादमी के उपाध्यक्ष भी नहीं हुए थे। कल्पनालोक में विचरण करते हुए बंगाली मेधा के बावले से प्रेमी युवक के रूप में उनसे मिलना एक ख्वाब सा था। कुछ क्षण ही रहे होंगे जब उनका सामीप्य मेरे जीवनानुभवों में शामिल …

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[10 Oct 2012 | Comments Off on Children’s Literature Festival at Jaipur | ]

In order to promote books and reading habit among school children, National Centre for Children’s Literature, a wing of National Book Trust, India is holding a 3-day Children’s Literature Festival during the ongoing Jaipur Book Fair at SMS Investment Ground from 10-12 October. Besides a range of book-related activities for the children, a panel discussion on “Do today’s Children like to read folktales and fairytales?” for all those interested in making and dissemination of children’s literature would also be held on 11th October evening.
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