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Articles Archive for September 2012

गांव-घर-समाज, विचार »

[25 Sep 2012 | Comments Off on जरूरी चीजों का चुनाव टी आर पी से नहीं किया जा सकता – ओम थानवी | ]

दीपक सिन्हा स्मृति व्याख्यानमाला
दिल्ली. मीडिया पर अब पूंजी का दबदबा साफ़ दिखाई दे रहा है. जब मीडिया व्यापार की वस्तु होगा तो वहां भाषा पर व्यापार का असर कैसे रोका जा सकता है. सुपरिचित लेखक और जनसत्ता के सम्पादक ओम थानवी ने हिन्दू कालेज में आयोजित एक व्याख्यान में कहा कि हमें यह ध्यान देना होगा कि जूते के कारोबार और अखबार में फर्क है क्योंकि सिर्फ सूचना देना ही मीडिया का काम नहीं बल्कि पाठकों की समझ बढ़ाना भी मीडिया की जिम्मेदारी है.
हिन्दी साहित्य सभा द्वारा वार्षिक …

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[25 Sep 2012 | Comments Off on जयपुर में शुरू हुआ स्ट्रीट वेंडर पॉलिसी का क्रियान्वयन | ]

जयपुर नगर निगम द्वारा स्ट्रीट वेंडरों को बिठाने के लिए बनाये गए कानून के क्रियान्वयन हेतु जयपुर नगर निगम द्वारा अधिकृत संस्था सेंटर फॉर सिविल सोसायटी की ओर से जयपुर शहर में गरीब थड़ी, ठेली, फूटपाथ व्यवसायियों को बिठाने का काम शुरू कर दिया गया है| स्ट्रीट वेंडर कानून के अंतर्गत व्यवसायियों को चिह्नित करने के क्रम में गीता आश्रम, अजमेर रोड में कार्यक्रम आयोजित कर शहर के विद्याधर नगर व सिविल लाइन नगर निगम जोन के 800 फुटपाथ व्यवसायियों को पहचान पत्र दिया गया|
जीविका अभियान के संयोजक श्री अमित …

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[25 Sep 2012 | Comments Off on कविता / मीनाक्षी नेगी | ]

– मीनाक्षी नेगी

काश फिर एक बार
काश,
फिर ये ख़ामोशी टूटे,
सालों से दबी हुई
दिल की बात हो जाये…
मैं कहूँ, वो सुने,
कहते कहते मैं चुप हो जाऊं,,
वो मेरी नम आँखों की तन्हाई समझ जाये …
काश,
फिर ये बरसात हो,
मैं भीगूँ , वो भीगे
पास आकर वो कहे
मैं तुम्हे छू लूं?
मैं कहूँ नहीं
और वो छू ले मेरे दिल को…
वो कहे क्या मैं तुम्हे चूम लूँ?
मैं फिर कहूँ नहीं
और….
काश एक बार फिर प्यार हो जाये..

मीनाक्षी नेगी। गृहिणी, लेखिका और कवयित्री। रेडक्रॉस, दिल्ली में कार्यरत।

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[20 Sep 2012 | 2 Comments | ]
कहानी / छुट्टन मियां फूल वाले

-दुष्यन्त
“5 नम्बर वाले कपूर की लड़की आजकल छत पर कुछ ज्यादा ही रहती है। (मैं उनकी दूरदृष्टि से हतप्रभ और प्रभावित था, अक्सर होता हूं ) कमला नगर का एक लौंडा अपनी फटफटिया से घर के चक्कर काटता है….., बस मामला पटरी पे है, समझो मियां।´´
“बाअदब बामुलाहिजा होशियार! छुट्टन मियां तशरीफ ला रहे हैं।´´ आधी सही, आधी गलत उर्दू में यह जुमला न सिर्फ छुट्टन मियां का फेवरेट था, बल्कि मुहल्ले के सारे लोग भी छुट्टन मियां की याद आये या वो खुद हाजिर हो जायें (या यू कहें टपक …

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[17 Sep 2012 | Comments Off on हर भाषा का अपना सॉफ्टवेयर होता है – डॉ. सैनी | ]
हर भाषा का अपना सॉफ्टवेयर होता है – डॉ. सैनी

हिंदी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में युवा कवियों ने बांधा समां

जयपुर। हर भाषा का अपना सॉफ्टवेयर होता है और साथ ही उसकी अपनी प्रकृति और अपना मिजाज होता है। उसी के अनुरूप अभिव्यक्ति में प्रभावोत्पादकता बनती है। हिन्दी दिवस के अवसर पर जगन्नाथ यूनिवर्सिटी के सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र में स्थित सिटी कैम्पस के जिम्स कॉन्फ्रेंस हॉल में जनसंचार विभाग, जगन्नाथ विश्वविद्यालय और जेएनआईटी के संयुक्त तत्वावधान में हिन्दी-कल, आज और कल विषयक् संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी के निदेशक डॉ आर.डी. सैनी विचार व्यक्त …