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Articles Archive for March 2012

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[29 Mar 2012 | Comments Off on सम्मानित होंगे साहित्यकार | ]

राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर ने वर्ष 2011-12 के लिए विभिन्न पुरस्कारों की घोषणा कर दी है । गुरूवार को अकादमी अध्यक्ष श्याम महर्षि ने विभिन्न पुरस्कारों के निर्णायकों की संस्तुतियों के आधार पर अकादमी मुख्यालय में पुरस्कार निर्णयों की जानकारी दी । अध्यक्ष महर्षि ने बताया कि दिनांक 14 व 15 मार्च, 2012 को पुरस्कार विषयक तदर्थ उप समिति की बैठक के बाद प्रत्येक पुरस्कार के लिए 3 विद्वानों का निर्णायक मण्डल गठित किया गया ।
महर्षि ने बताया कि वर्ष  2011-12 के लिए 31 हजार का प्रतिष्ठित …

साहित्य-सिनेमा-जीवन, है कुछ खास...पहला पन्ना »

[29 Mar 2012 | Comments Off on अलिखित कविताएं / डॉ. दुष्यंत | ]
अलिखित कविताएं / डॉ. दुष्यंत

मेरी कुछ कविताएं कभी नहीं लिखी गईं
उनका लिखा जाना अब नामुमकिन लगता है
जिन्हें छोड दिया था, मैंने किसी और दिन के लिए
या यह कहकर कि पकना है इन्हें
ऐसे ही थोडे कविता हो जाती है
पकती रही हैं वे सब कई सालों से
कई सालों उनके साथ रहा हूं, सोया हूं, खाया हूं, पीया हूं, उन्हीं के साथ जीया हूं
वे कविताएं होती तो जीना शायद आसान हो जाता
या कि उनका जन्म लेना भी ना होता जेहन में
तो और भी ठीक होता मेरा जीवन
वे पकती रही जैसे पकती है खेत में फसलें
और मौसमों के …

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[26 Mar 2012 | One Comment | ]

– पीयूष पांडेय
अर्थ, सारांश, हम हैं राही प्यार के और गुमराह जैसी कई चर्चित फिल्मों के पटकथा लेखक स्वर्गीय सुजीत सेन की डायरी के पन्नों से निकली एक कहानी रुपहले पर्दे पर अफसाना लिखने को तैयार है। ‘लाइफ इज गुड’ नाम से बन रही यह फिल्म प्रदर्शन के लिए तैयार है। इस फिल्म का निर्देशन जाने-माने चरित्र अभिनेता अनंद महादेवन ने किया है, जबकि मुख्य भूमिका में जैकी श्राफ, रजत कपूर, मोहन कपूर और नकुल सहेदव जैसे मंजे कलाकार हैं।
‘लाइफ इज गुड’ इस मायने में अलग है कि फिल्म सुजीत …

गांव-घर-समाज, यादें, स्मृति-शेष, है कुछ खास...पहला पन्ना »

[23 Mar 2012 | Comments Off on पंख होते तो उड़ जाती रे # अहमदाबाद | ]
पंख होते तो उड़ जाती रे # अहमदाबाद

– कोषा गुरंग
ज़ेहन में जब यादों के दरीचे खुलते हैं, ख्यालों में एक पुराने शहर की तस्वीर उभर आती है। वो शहर, कोई अनजाना-भूला-बिसरा-शहर नहीं, वहां की इमारतें-रास्ते मेरे लिए अपरिचित़, अचीन्हे नहीं। मेरा शहर अहमदाबाद।इस शहर में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का स्वागत मुस्लिम किया करते, वहीं हिंदू मोहर्रम में ताजियों की रखवाली करते। यूं ही एक-दूसरे के त्योहार और सुख-दुख आपस में बांटते। कुछ मुस्लिम सहेलियां थी, जिनके साथ स्कूल आना-जाना होता था। इतना ही नहीं, परिवार वालों का एक-दूसरे पर उतना ही विश्वास था। न जाने …

है कुछ खास...पहला पन्ना »

[20 Mar 2012 | Comments Off on Test Post | ]
Test Post

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