Home » Archive

Articles Archive for June 2011

साहित्य-सिनेमा-जीवन, है कुछ खास...पहला पन्ना »

[15 Jun 2011 | 3 Comments | ]
पंद्रह साल पुरानी कविता / चांद और सागर

कहते हैं, कागज़ की उम्र ज़रा-कम ही होती है। यक़ीनन… लेकिन एहसासों की? सो, ऐसे ही है ज़िंदगी। तब, शायद बीए का स्टूडेंट था, सो पहले-पहले इश्क के फेर में पड़के एक लंबी-सी कविता लिख मारी। लंबे वाले, पीले, रफ़ और फेयर के बीच वाले किसी रजिस्टर के तीन-चार पन्नों में लिखी ये कवितानुमा बकवास. मामला बस इतना ही कि कन्या का नाम चंद्रमातुल्य था, अब सीधे तो चिट्ठी लिख नहीं सकते थे, सो कविता लिखी। कविता में चांद के सारे गुण-अवगुण-उलाहने सब शामिल थे। हमें यह भी बताना था …

साहित्य-सिनेमा-जीवन, है कुछ खास...पहला पन्ना »

[15 Jun 2011 | Comments Off on प्रिव्यू / ईस्‍ट इज ईस्‍ट’ के बाद अब ‘वेस्‍ट इज वेस्‍ट’ | ]
प्रिव्यू / ईस्‍ट इज ईस्‍ट’ के बाद अब ‘वेस्‍ट इज वेस्‍ट’

अजित राय। मूल तो बिहार है, दिल्ली में इतना बड़ा प्रवास कि अब दिल्लीवाले ही लगते हैं, लेकिन अंदाज़ में खांटीपना शेष है। देश के चर्चित घुमक्कड़ पत्रकार हैं। हंस के सांस्कृतिक संवाददाता रहे। जनसत्ता समेत बहुतेरी, बहुविध की पत्रिकाओं में देश की कल्चरल हलचल को रेखांकित-विश्लेषित करते रहे हैं। सिनेमा से उन्हें नया ही प्यार हुआ है, लेकिन ये मोहब्बत कोई कच्ची नहीं है। पकती हुई उम्र में सेल्युलाइड से इश्क भी पक्का ही है, सो अब रंगकर्म और साहित्य के अलावा, सिनेमा पर भी उनकी कलम अच्छी तरह …

विचार »

[14 Jun 2011 | One Comment | ]

बाबा का एंटी करप्शन अभियान खत्म भले ना हुआ हो, लेकिन रामदेव का अनशन खत्म होने से कुछ निराशा ज़रूर हुई है। घुमक्कड़ पत्रकार आशीष कुमार अंशु की आंखो-देखी :

– आशीष कुमार अंशु
दिल्ली से शनिवार की सुबह तीन बजे ही बाबा रामदेव के आश्रम के लिए निकल गया था। उत्सुकता थी, उनके समर्थकों से मिलने की। सोचा था कि पातंजली योग पीठ में भारी भीड़ होगी। इस बात की जानकारी बिल्कुल नहीं थी कि शनिवार को गंगा दशहरा का त्योहार है। इसलिए यह भ्रम हुआ कि रास्ते में जो …

स्मृति-शेष, है कुछ खास...पहला पन्ना »

[11 Jun 2011 | Comments Off on वे मुस्करा रहे थे, गम छुपा रहे थे | ]
वे मुस्करा रहे थे, गम छुपा रहे थे

उन्होंने मकबूल को पास से देखा, उनके काम को और क़रीब से महसूस किया। खासे यारबाज़ इंसान, बेहतरीन पत्रकार और कई फ़िल्मों की राइटिंग से जुड़े रामकुमार सिंह ने फिदा की विदा के बाद ये भावांजलि चौराहा से शेयर की है, इसके लिए उनका शुक्रिया। रामकुमार सिंह बेहतरीन पत्रकार हैं और उनका ब्लॉग अच्छी चीजें पढ़ने-सोचने के लिए खूबसूरत जगह है : मॉडरेटर
रामकुमार सिंह
यह जयपुर में अप्रैल, 2004 की एक गर्म दुपहर थी और हम थिएटर में मकबूल फिदा हुसैन के साथ उनकी फिल्म मीनाक्षी: अ टेल ऑव थ्री सिटीज …

है कुछ खास...पहला पन्ना »

[8 Jun 2011 | 3 Comments | ]
एक बाबा ने दूसरे बाबा से पूछा, आपका बिजनेस क्या है?

बाबा रांमदेव को लेकर आलोचना, साथ और प्रतिरोध…हर तरह के स्वर हमने सुने और लोगों की देहभाषा से भी कई अर्थ निकले, लेकिन कांग्रेस को छोड़कर शायद ही कोई इस बात से सहमत हो कि बाबा के प्रदर्शन स्थल पर पुलिस का रवैया ठीक था. खैर, ऐसे समय में एक ख़त आया है, जो बाबा से कई सवाल करता है. ख़त लिखने वाले भी संत हैं, बाबा हैं…लेकिन वो खुद को व्यवसायी बताने से गुरेज़ नहीं करते और बाबा रामदेव से भी ऐसी ही इमानदारी की उम्मीद रखते हैं. सही …