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Articles Archive for April 2011

है कुछ खास...पहला पन्ना »

[30 Apr 2011 | 2 Comments | ]
कभी कोई तस्वीर मुकम्मल नहीं होती

चौराहा पर आज निधि टंडन की कविता…वो क्यों लिखती हैं, आइए, उनसे ही जानें :

लिखने में प्रसव-सी पीड़ा होती है…जब तक अंतस में विचारों के कोलाहल को शब्दों में बाँध कर उसमें जीवन का संचरण कर कागज़ पर नहीं उकेर देती, चैन नहीं मिलता है। अपने विषय में लिखने की बात पर शब्द जैसे साथ छोड़ देते हैं…जीवन की इस यात्रा के पैंतीस वसंत देख चुकी हूँ और रोज अपने में कुछ नया ढूंढ लेती हूँ…अभी तो मेरा खुद से भी कायदे से परिचय नहीं हो पाया है.हाँ,लिखने-पढ़ने का …

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[30 Apr 2011 | Comments Off on मैंने मंजिल को तलाशा, मुझे खूंखार मिले… | ]
मैंने मंजिल को तलाशा, मुझे खूंखार मिले…

आमतौर पर हम पंकज झा को दीपकमल पत्रिका के संपादक और घोर पॉलिटिकल चिंतक के रूप में पहचानते हैं, लेकिन सियासत के गलियारों में भटकते हुए भी पंकज के दिल में जड़ों से जुड़ाव बरकरार है। उसी की मिसाल है निरुपमा पाठक हत्या-आत्महत्या कांड पर लिखा ये लेख। आपको याद तो है ना निरुपमा पाठक का नाम? मुझे लगता है, पंकज के जड़ों से जुड़ाव और निष्पक्ष रहने की उनकी जद्दोज़हद ने इस पूरे लेख को खूब उठापटक से घेर दिया है। वैसे, सवाल ज़रूरी हैं, निरुपमा की मौत के …

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[30 Apr 2011 | One Comment | ]

# कुंदन
 
कई नेता लोकपाल बिल पर विरोध दिखा रहे थे
हमने उनसे पूछा आप क्यों इसका विरोध दिखलाते हैं तो
 
उनका तर्क था
जनता तक क्या हम पहले ही कम बिल पहुंचाते हैं
जो अन्ना एक और बिल जनता पर लादे जाते हैं
 
हम बोले ये बिल तो जनता को फायदा ही पहुँचायेगा
नेता जी बोले पहले ये बताइए क्या ये बिल संसद में पास हो पायेगा
 
हम बोले हां इसकी तो काफी कम ही उम्मीद है
क्योंकि जो ये बिल पास हो गया तो आपका दिल फेल हो जायेगा
 
नेता जी फिर आत्मविश्वास से बोले जो
ये बिल पास …

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[30 Apr 2011 | One Comment | ]

दिल्ली के हिंदी भवन में आज देश-दुनिया के ब्लॉगरों का जमावड़ा होगा।
यहां अंतरराष्ट्रीय हिंदी ब्लॉगर सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है।
आयोजन को लेकर वाद-विवाद-संवाद का सिलसिला शुरू हो गया है। बहसें होनी ज़रूरी भी हैं, लेकिन फिलहाल, चौराहा पर कार्यक्रम की जानकारी दे रहे हैं। आना चाहें, तो ज़रूर आएं।
हिंदी साहित्य निकेतन, बिजनौर ने इस वर्ष बसंत पंचमी पर अपनी सतत यात्रा के 50 स्वर्णिम वर्ष पूरे किये। इस अवसर पर शनिवार 30 अप्रैल 2011 को नई दिल्ली के हिन्दी भवन में एक भव्य आयोजन किया जा रहा है। इस …

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[29 Apr 2011 | One Comment | ]
यूं हुआ मुल्क का नामकरण संस्कार

हम जहां जन्मते हैं, बड़े होते हैं, उस ज़मीन को लेकर जुड़ाव और भावुकता लाजिमी है। चौराहा पर ही रवि वर्मा का एक लेख हमने प्रकाशित किया था। इसी सिलसिले में कुछ और बातें कहता है, ये लेख। यूं, लेखक का नाम हमें नहीं पता। चौंकिएगा नहीं,  हमें ये लेख वाया एफबी मैसेज बॉक्स, मिला। मेल भेजा है चंद्रशेखर पति त्रिपाठी ने, जिनकी कुछ रचनाएं और पेशकश पहले भी चौराहा का हिस्सा बन चुकी हैं, तो उनका खत भी देख लीजिए….चौराहा पर रवि वर्मा का लेख पढ़ा..india बनाम भारत बरास्ता हिंदुस्तान!!”……भारत नाम …