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Articles Archive for February 2011

दिल के झरोखे से..., स्मृति-शेष, है कुछ खास...पहला पन्ना »

[27 Feb 2011 | Comments Off on ट्विंकल है उदास…चले गए अंकल पै | ]
ट्विंकल है उदास…चले गए अंकल पै

0 चण्डीदत्त शुक्ल

किस्से-कहानियां सुनाने वाली दादी अब साथ नहीं रहती…घर छोटे हैं…बिल्डिंगें बड़ी हैं…दादी का जी शहर में नहीं लगता…वैसे भी, कार्टून और एनिमेशन का ज़माना है, वो भी डिज़्नी वाले कार्टून्स का। पिछले दिनों `माई फ्रेंड गणेशा’ और `हनुमान’ जैसे कैरेक्टर ज़रूर देखे थे, लेकिन ऐसा कम ही होता है। बहुतायत में तो अब भी अंगरेज़ हावी हैं, पैंट के ऊपर चड्ढी पहनने वाले हीरो!
यह कोई आज की बात नहीं है। साठ-सत्तर साल पहले से अब तक, कभी बैटमैन, तो कभी स्पाइडरमैन, तो कहीं-कहीं फैंटम जलवा बिखेरते रहे हैं। …

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[19 Feb 2011 | Comments Off on फिर सुनें स्त्री-मन और जीवन की कहानियां | ]
फिर सुनें स्त्री-मन और जीवन की कहानियां

कथा में नई दृष्टि और भाषा गढ़ती हैं रीता सिन्हा
चूल्हे पर रखी पतीली में धीरे-धीरे गर्म होता और फिर उफनकर गिर जाता दूध देखा है कभी? ऐसा ही तो है स्त्री-मन। संवेदनाओं की गर्माहट कितनी देर में और किस कदर कटाक्ष-उपेक्षा की तपन-जलन में तब्दील हो जाएगी, पहले से इसका अंदाज़ा लगाना संभव होता, तो स्त्री-पुरुष संबंधों में आई तल्खी यूं, ऐसे ना होती, ना समाज का मौजूदा अविश्वसनीय रूप बन पाता। सच तो ये है कि स्त्री के चित्त-चाह-आह और नाराज़गी को शब्द कम ही मिले हैं। ज्यादातर …

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[15 Feb 2011 | Comments Off on बिना पते और स्टैंप के एक चिट्ठी | ]
बिना पते और स्टैंप के एक चिट्ठी

गुज़रा हुआ प्रेम बिसार पाना मुश्किल होता है, तक़रीबन नामुमकिन। कोई जगह, कोई लमहा सबकुछ लेकर आ जाता है सामने। यादों की ऐसी ही एक पोटली…एक चिट्ठी, उसके नाम, जो जिस्म से साथ नहीं है पर यादें अश्क बनकर आंख में मौजूद हैं और धड़कन की शक्ल में दिल के बीच ज़िंदा…। फिज़ाओं में प्यार की खुशबू बिखरी हुई है। फूलों, तोहफ़ों और मुस्कराहटों के मौसम में मिला है यही खत, जो अपने पते तक पहुंच नहीं पाया अब तक…।

सुनो,
तुम्हें जो लिखी थीं, वो चिट्ठियां पुरानी हो चुकी हैं…कुछ ज्यादा …

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[11 Feb 2011 | Comments Off on एक प्रेमी के नोट्स | ]
एक प्रेमी के नोट्स

प्यार ना प्यास है, ना पानी। ना फानी है, ना रूहानी। मिठास है, तो कड़वाहट भी। बेचैनी है तो राहत भी। पहला प्यार अक्सर भोला होता है। भले ही उम्र पंद्रह की हो या फिर पचपन की। कैसे-कैसे अहसास भी तो होते हैं पहले प्यार में। एक प्रेमी के नोट्स पढिए, इस वैधानिक चेतावनी के साथ-इनसे इश्क का इम्तिहान हल नहीं होगा, क्योंकि हर बार नए सवाल पैदा होते हैं-

संयोग के दिन

तुमसे मिलने के बाद पहला जाड़ा
सुबह के चार बजे हैं। बाहर तेज हवा चल रही है, फिर भी …