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Articles Archive for January 2011

साहित्य-सिनेमा-जीवन »

[31 Jan 2011 | Comments Off on घर… | ]
घर…

आ से आशियाना
अब हर इंसान का पूरी दुनिया में कहीं ना कहीं घर तो होता ही है। छोटा-मोटा या फिर आलीशान, फिर हर शहर में, जहां वो रह रहा है, मकान बनाने की क्या मजबूरी है? वैसे भी, हमारी जड़ें कहीं ना कहीं तो हैं ही। किसी ना किसी गांव, कस्बे, मोहल्ले, जिले में…।
इंसान को क्या चाहिए भला? दोनों वक्त दो-दो गर्म फुलके, हंसते-खेलते बच्चे, अच्छी और लगातार बची हुई नौकरी, खूबसूरत बीवी, और? और घर। पर घर क्या सचमुच इंसान का अपना सपना है? या यूं कहें कि मकान …

खेल-तमाशा »

[10 Jan 2011 | Comments Off on सियासत और सेक्स की कॉकटेल-कथा …कुछ और किस्से | ]

मोहब्बत के बदले मौत…
यौन शोषण की तोहमतों  के घेरे में  आए तीन विधायकों की `प्रेम? कथा’ आपने पढ़ी, अब बारी है, एक ऐसी ही लव स्टोरी की, जिसमें बात क़त्ल तक पहुंच गई। एक बहुत पुरानी फ़िल्म का गाना है—मोहब्बत की झूठी कहानी पे रोए…बड़ी चोट खाई, जवानी पे रोए। कुछ ऐसी ही है सियासत और सेक्स की कॉकटेल कथा, जिसे सुनकर-पढ़कर-देखकर बस माथा पीटने का मन करता है…सिर धुनने को जी कर उठता है। ऐसी ही तो थी मधुमिता-अमर की प्रेमकथा, जिसे अमरत्व नसीब नहीं हुआ। मधु थी …

खेल-तमाशा »

[8 Jan 2011 | Comments Off on सियासत और सेक्स का कॉकटेल-1 | ]

सेक्स का कॉकटेल देश के तीन माननीय विधायक आरोपों के घेरे में हैं। एक यौन शोषण की तोहमत ङोलते हुए जान से हाथ धो बैठे, दूसरे बता रहे हैं-मैं नपुंसक हूं, रेप कैसे करूंगा और तीसरे पर लगा है किडनैपिंग का चार्ज। दुहाई है-दुहाई है..

ये महामहिम हैं, माननीय विधायक जी हैं, इनके दम से ही लोकतंत्र ज़िंदा है। पचास बरस से भी ज्यादा बूढ़ी हो चुकी मुल्क की आज़ादी ने हमें यही बात सिखाई है, लेकिन हाय रे राम, दुहाई है-दुहाई है..लोकतंत्र के रखवालों पर यह कैसी शामत आई है?दो …