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Articles Archive for December 2010

साहित्य-सिनेमा-जीवन »

[31 Dec 2010 | Comments Off on मैं बेचारा, महंगाई का मारा | ]

मैं हूं आम आदमी… सरकार का मारा…मेरी आवाज़ सुनो… दर्द का राज सुनो… फ़रियाद सुनो। मनमोहन सिंह जी, आप तो सुनो… कुछ जवाब दो। जी हां, मैं इसी मुल्क का बाशिंदा हूं, जहां मुकेश और अनिल अंबानी रहते हैं। पहले मुकेश ने तारों से बातें करने वाला दुनिया का सबसे महंगा घर ‘ एंटिला’ 4500 करोड़ खर्च करके बनाया और अब अनिल बड़े भाई से बड़ा घर बनवा रहे हैं। मेरा नाम तो आपको पता नहीं है, हां, वो घर जब बनकर तैयार होगा, तो उसका नाम ज़रूर जानेंगे। और …

खेल-तमाशा »

[20 Dec 2010 | Comments Off on ना गोली चलेगी, ना बहेगा खून, फिर भी लड़ेगी दुनिया | ]

– चण्डीदत्त शुक्ल
अब नाम तो याद नहीं है, शायद शंकर दादा था उस पुरानी फ़िल्म का नाम। इसमें एक गाना है—इशारों को अगर समझो, राज़ को राज़ रहने दो, लेकिन पर्दाफ़ाश करने वालों के हाथ कहीं राज़ की पोटली लग जाए, तो उनके पेट में अजब-सी गुदगुदी होने लगती है। यूं तो, ऐसे लोग अक्सर अमानत में खयानत की तर्ज पर ढके-छुपे राज़ की धज्जियां उड़ाते हुए उन्हें सार्वजनिक करते आपके लिए मुश्किलें ही खड़ी करते हैं, हैक्टिविस्ट (हैकर + एक्टिविस्ट) जूलियन असांजे ने भी कमोबेश अमेरिका के लिए वही …

संगीत-कला »

[7 Dec 2010 | Comments Off on एक सुरीली आपा, जो दीवाना बना देती है… | ]
एक सुरीली आपा, जो दीवाना बना देती है…

दर्द तो दर्द है, क्या तेरा-क्या मेरा। इसकी तासीर इक जैसी है, तड़प का रंग भी है इक जैसा, तभी तो जब आबिदा परवीन की तबियत नासाज़ हुई, तब हिंदुस्तान-पाकिस्तान, हर जगह मौसिकी के दीवानों ने दिल थाम लिए, दुआएं करने लगे। आबिदा के चाहने वाले इस पार और उस पार, बेशुमार हैं और आपा के नाम से मशहूर सूफी-सिंगर-संत आबिदा भी इस रिश्ते को अच्छी तरह पहचानती हैं, मान देती हैं। आबिदा की सरगम से रिश्तेदारी और भारत-पाकिस्तान में उनकी मशहूरियत रेखांकित करते हुए इस लाज़वाब सिंगर के सफ़र …