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Articles Archive for November 2010

यादें, स्मृति-शेष »

[23 Nov 2010 | Comments Off on अतीत के एलबम से यादों के पन्ने | ]
अतीत के एलबम से यादों के पन्ने

स्मृतियों का आवेग किसी हैंगओवर से कम नहीं होता, जिससे उबारता है जिम्मेदारी का नींबू पानी। ऎसे ही पहले प्यार की कसक जिंदगी भर साथ रहती है। कितने ही शायरों ने हजारों कलाम टूटे हुए दिल में बसे महबूब के अक्स की तारीफ में लिख डाले, लेकिन अलविदा कहकर चले गए आशिक के साथ बिताए लम्हे भी कौन, कब तक संभालकर रख सका है? फैज अहमद फैज भी ऎसा ही बयान करते हैं- दुनिया ने तेरी याद से बेगाना कर दिया, तुझ से भी दिल फरेब हैं गम रोजगार के।
बीते …

दिल के झरोखे से..., संगीत-कला, है कुछ खास...पहला पन्ना »

[19 Nov 2010 | Comments Off on ज़िंदगी की धुन पर मौत का नाच | ]
ज़िंदगी की धुन पर मौत का नाच

सारी दुनिया बंधी है कालबेलिया के जादू में पर इसके फ़नकार अब भी तलाश रहे अपनी पहचान
धीरे-धीरे रात गहरा रही है। दिन भर खेल-कूदकर बच्चे थक गए हैं पर निंदिया रानी पलकों से दूर हैं। बच्चे जब सोते नहीं, बार-बार शरारतें करते हैं, तब दादी शुरू करती हैं—एक राजकुमारी की कहानी। राजकुमारी, जिससे प्यार करता है राजकुमार। सफेद घोड़े पे आता है, उसे अपने साथ ले जाता है। बच्चे जब तक सपनों में डूब नहीं जाते, `हां…’, `और क्या हुआ…’, `आगे…’ बुदबुदाते हुए, आंखें खोले, टकटकी लगाए सुनते रहते हैं। …

खेल-तमाशा, है कुछ खास...पहला पन्ना »

[15 Nov 2010 | Comments Off on बदलती दुनिया की `आभासी’ खिड़कियां | ]
बदलती दुनिया की `आभासी’ खिड़कियां

– चण्डीदत्त शुक्ल

एक अंकुर जब ज़मीन से उभरता है, तो अनगिनत परतें तय करके दरख़्त बनता है, यूं ही ज़िंदगी की पहली सांस से जवानी और फिर फ़ना होने तक कितने ही क़दम आगे बढ़ाने होते हैं। जीवन के इस सफ़र में बहुतेरे रिश्ते साथ जुड़ते हैं, अहसास बुलंद होते हैं और तब कहीं कोई मुकम्मल होता है। जीवन यात्रा के कई पड़ाव हैं। कहीं हम ठहरते हैं, कहीं तेज़ रफ़्तार से आगे बढ़ जाते हैं…लेकिन दोस्तों का, संबंधों का तानाबाना हरदम साथ रहता है। दोस्त, सिर्फ वही नहीं, जो …