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Articles in the गांव-घर-समाज Category

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[26 May 2011 | One Comment | ]
मनोज भावुक को राही मासूम रज़ा सम्मान

वाराणसी में आयोजित विश्व भोजपुरी सम्मलेन के प्रांतीय अधिवेशन में भोजपुरी भाषा को समर्पित युवा साहित्यकार मनोज भावुक को भोजपुरी साहित्य व भोजपुरी फिल्म के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए राही मासूम रज़ा सम्मान से नवाजा गया है . उन्हें सम्मान प्रदान किया उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य मंत्री व कांग्रेस सांसद जगदम्बिका पाल ने.
विश्व भोजपुरी सम्मलेन की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष डॉक्टर अशोक सिंह ने कहा, “2 जनवरी 1976 को सीवान (बिहार) में जन्मे और रेणुकूट (उत्तर प्रदेश ) में पले- बढ़े मनोज भावुक भोजपुरी के सुप्रसिद्ध …

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[29 Apr 2011 | Comments Off on साहब तोरी साहबजदिया मिटाए देबो न | ]
साहब तोरी साहबजदिया मिटाए देबो न

विश्‍व भोजपुरी सम्‍मेलन में भोजपुरी के सम्‍मान की मांग तेज
देवभूमि ऋषिकेश में त्रिवेणी घाट के मुक्ताकाश मंच पर आयोजित विश्‍व भोजपुरी सम्‍मेलन का दसवां राष्‍ट्रीय अधिवेशन सफलता पूर्वक संपन्न हो गया। सम्‍मेलन का उद्घाटन वरिष्‍ठ भाजपा नेता श्री कलराज मिश्र ने किया। इस अवसर पर देश-विदेश से आए भोजपुरिया लोगों के साथ-साथ स्‍थानीय लोग भी भारी संख्‍या में उपस्थित थे।

कलराज मिश्र ने कहा कि भोजपुरी केवल भाषा ही नहीं, बल्कि एक संस्‍कृति है, यह रहन-सहन की एक पद्धति है। भोजपुरी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने के संबंध …

गांव-घर-समाज, है कुछ खास...पहला पन्ना »

[27 Apr 2011 | 5 Comments | ]
लंदन में हॉट-हॉट…सीजन, शादी, साहित्य!

लन्दन का तापमान आजकल ऊंचाई पर है। पारा 24 डिग्री पर पहुँच गया है। ये शायद पहली बार है, जब यूरोप में सबसे ज्यादा तापमान लन्दन में है। गर्मी की वज़ह मौसम तो है ही, और भी है बहुत कुछ। बता रही हैं लंदन से ही शिखा वार्ष्णेय। शिखा की pic इसी आलेख में दिख जाएगी, जो अपनी तीन साथियों के संग `बीच’ में ही विराजमान हैं। शिखा का ये दूसरा लेख चौराहा पर है, उनका पुनः स्वागत और आभार :
लोग अपनी ईस्टर की छुट्टियों में इस बार स्पेन या …

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[25 Apr 2011 | 4 Comments | ]
अंगना में कुइयां राजा डूबके मरूंगी…

शुभ्रा शर्मा लोकजीवन और संगीत की गहरी समझ रखती हैं। आल इंडिया रेडियो में न्यूज़रीडर हैं। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से पीएचडी की है। हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू समेत कुल सात भाषाओं की जानकार हैं। चौराहा पर उनका यह पहला आलेख है। शुभ्रा का स्वागत : मॉडरेटर
 
बीते दिनों चौराहा पर एक लेख पढ़ा ‘अंगना में कुइयां’ तो बचपन में सुना एक लोकगीत याद आ गया – “आंगना  में कुइयां राजा डूबके मरूंगी”.
लेख में पुराने लुप्त होते जलस्रोतों के पुनरुद्धार की बात की गई है. मैं सोचने लगी कि कोई उन तमाम लोकगीतों …

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[25 Apr 2011 | 3 Comments | ]
एक दोपहर मिली, धूप की शॉल ओढ़े

डायरी, अब विधा से अलग, म्यूजियम की चीज होने जा रही है। यह कथन जितना अतिरंजित है, उतना ही आशंका और पीड़ा से भी उपजा है। ऐसे हालात में अगर दुष्यंत की डायरी का एक पन्ना पढ़ने को मिल जाए, तो सुखकर प्रतीति होती है, आइए आप भी पढ़िए, ये पन्ना…
 
यह खान मार्केट है, दक्षिणी दिल्ली का एक नामचीन इलाका, कई सर्वे के मुताबिक सबसे महंगा बाजार भी, इंडिया गेट से थोड़ा ही दूर शाहजहां रोड़ से आगे जाने पर पृथ्वीराज रोड़ से इसके लिए रास्ता जाता है तो पहले …