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Articles in the विचार Category

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[11 May 2011 | One Comment | ]
…हल हो जिंदगी का गणित

aha zindagi me prakashit lekh….
Source: एंटन बर्ग
क्या है जीवन, जन्म, पढ़ाई-लिखाई, प्रेम, शादी, बच्चे, बुढ़ापा और फिर मृत्यु? आखिरकार, जिंदगी का अर्थ क्या है? इसका अस्तित्व क्या है? वाह! क्या सवाल है! वैज्ञानिकों और विचारकों के साथ-साथ इस दुनिया में मौजूद हर इन्सान ये प्रश्न एक-दूसरे से पूछता है, लेकिन क्या हमारे पास इस सवाल का अब तक कोई पुख्ता जवाब है? हम लाख कोशिशों के बावजूद कहां जान सके हैं कि जीवन का अर्थ दरअसल क्या है? नहीं!
मेरे लिए तो जीवन एक विश्वास है। फिलहाल, जो वैज्ञानिक उत्तर मौजूद …

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[10 May 2011 | 2 Comments | ]

भाइयों, बार बार सोच रहा हूं कि आर्थिक रूप से गरीब रहना बड़ा अभिशाप है, गांव में रहना बड़ा दंड है, किसान होना कितना घटिया काम है. ऐसा इसलिए कि यूपी की पुलिस-पीएसी ग्रेटर नोएडा से लेकर आगरा तक के कई गांवों में घुसकर पर घर-घर की औरतों, बच्चों, युवकों, बुजुर्गों को जमकर पीटा, पैसा लूटा, छेड़छाड़ की. ग्रेटर नोएडा के भट्टा गांव की घटना ने तो हिलाकर रख दिया है. पुलिस ने कर्फ्यू लगा रखा है. कोई अंदर नहीं जा सकता, पीएसी पुलिस वालों ने कहर गांव के …

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[7 May 2011 | One Comment | ]
योमें मजदूर उसी रोज़ मनाया जाए

यह कविता मजदूर दिवस पर है. आप सवाल कर सकते हैं फिर आज क्यों छापी जा रही है….इसका जवाब यही नज़्म, कविता देगी….रचना है आदिल रशीद की. उनका शुक्रिया.

योमे मजदूर/ मजदूर दिवस /लेबर डे/ labour day /aadil rasheed
खोखले नारों से दुनिया को बचाया जाए
आज के दिन ही हलफ इसका उठाया जाए
जब के मजदूर को हक उसका दिलाया जाए
योमें मजदूर उसी रोज़ मनाया जाए
ख़ुदकुशी के लिये कोई तो सबब होता है
कोई मर जाता है एहसास ये तब होता है
पेट और भूक का रिश्ता भी अजब होता है
जब किसी भूके को भर …

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[3 May 2011 | 2 Comments | ]

अन्ना न हुए गोया इस देश के लिए ऑक्सीजन का सिलिंडर हो गए. उनका आन्दोलन ठंडा पड़ चुका है लेकिन कॉर्पोरेट मीडिया उनके आन्दोलन में मीडिया को भी बदल देने के संकेत देख रही है. अपनी जन सरोकारपक्षधरता वाली पत्रकारिता करने के लिए जाने जाने वाले पुण्य प्रसून वाजपेयी का हालांकि मानना है कि शायद अब पत्रकार गायब हो गया है, संपादकीय नीति गायब हो गयी है, जो बचा है वह है तकनीक और उस तकनीक द्वारा निर्मित किया जा रहा तमाशा. अन्ना का अनशन ऐसा ही एक “तमाशा” बनकर …

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[1 May 2011 | 5 Comments | ]

– अंतरराष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन में जुटे देश-दुनिया के ब्लॉगर
– उत्तराखंड के मुख्यमंत्री निशंक ने भी कार्यक्रम में शिरकत

नई दिल्‍ली। हिंदी साहित्‍य निकेतन, परिकल्‍पना डॉट कॉम और नुक्‍कड़ डॉट कॉम की इस गंगोत्री में आया हूं। एक ओर 50 बरसों की सुखद विकास यात्रा को तय करने वाला देश का विशिष्‍ट प्रकाशन संस्‍थान है तो दूसरी तरफ हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग में सिरमौर रवीन्‍द्र प्रभात और अविनाश वाचस्‍पति का सामूहिक श्रम। हिंदी भाषा जब चहुं ओर से तमाम थपेड़े खा रही हो, अपने ही घर में अपमानित हो रही हो और हिंदी में …