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Articles in the विचार Category

विचार »

[6 Feb 2017 | Comments Off on Raveena Tandon’s DILWALE completes 23 year | ]

The iconic action romance classic ‘DILWALE’ completes 23 years on Saturday (February 04), since its original release back in 1994.
We relive it with – Arun, Sapna, senior inspector Vikram and some of the famous characters from the film that still remember after all these years. Dilwale went on to become one of the highest grossing Indian films of 1994.
As one of the most successful and romantic drama of Bollywood turns 23 it’s time to celebrate. raveena, Ajay and Suniel might be 23 million dollars richer, and 23 billion times more …

गांव-घर-समाज, विचार »

[25 Sep 2012 | Comments Off on जरूरी चीजों का चुनाव टी आर पी से नहीं किया जा सकता – ओम थानवी | ]

दीपक सिन्हा स्मृति व्याख्यानमाला
दिल्ली. मीडिया पर अब पूंजी का दबदबा साफ़ दिखाई दे रहा है. जब मीडिया व्यापार की वस्तु होगा तो वहां भाषा पर व्यापार का असर कैसे रोका जा सकता है. सुपरिचित लेखक और जनसत्ता के सम्पादक ओम थानवी ने हिन्दू कालेज में आयोजित एक व्याख्यान में कहा कि हमें यह ध्यान देना होगा कि जूते के कारोबार और अखबार में फर्क है क्योंकि सिर्फ सूचना देना ही मीडिया का काम नहीं बल्कि पाठकों की समझ बढ़ाना भी मीडिया की जिम्मेदारी है.
हिन्दी साहित्य सभा द्वारा वार्षिक …

गांव-घर-समाज, दिल के झरोखे से..., देस-परदेस, विचार, है कुछ खास...पहला पन्ना »

[16 Aug 2012 | Comments Off on मन की मौज में न भूलें आजादी के मायने | ]
मन की मौज में न भूलें आजादी के मायने

दैनिक भास्कर के संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशित आलेख
चण्डीदत्त शुक्ल | Aug 15, 2012, 00:10AM IST

गांव के एक काका की याद आ रही है। रिश्तेदारी का ख्याल नहीं। शायद पुरखों की पट्टीदारी का कोई छोर जुड़ता होगा उनसे, पर हम सब उन्हें काका, यानी बड़े चाचा के बतौर ही जानते-पहचानते और मान देते। काका का असल नाम भी याद नहीं पड़ता। बच्चे-बड़े सब उन्हें मनमौजी कहते। मनमौजी का मतलब मस्त-मौला होने से नहीं था।
काका निर्द्वद्व, नियंत्रण के बिना, इधर-उधर घूमने वाले, दिन भर ऊंघने और शाम को चौपाल में बैठकर नई …

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[12 Apr 2012 | One Comment | ]
शांकुतलम् के बंद होने का मतलब…

– देवाशीष प्रसून
शाकुंतलम थियेटर बंद हो गया है। यह दिल्ली के प्रगति मैदान जैसी शांत जगह पर पिछले तीन दशकों से लगातार चल रहा था। शाकुंतलम थियेटर, याने सिनेमाघरों के बीच शांत स्वभाव के मध्यवर्गीय, सभ्य, पढ़े-लिखे लोगों की पहली पसंद। भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत चलने वाले इंडिया ट्रेड प्रोमोशन ऑर्गनाइजेशन का प्रबंधन इसको और चलाते रहने की जरूरत नहीं समझता और इस कारण से इसको बंद करके कॉनफ्रेंस हॉल बनवाना चाहता है। जो लोग दिल्ली में नहीं रहते और शाकुंतलम थियेटर से वाकिफ नहीं …

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[14 Jun 2011 | One Comment | ]

बाबा का एंटी करप्शन अभियान खत्म भले ना हुआ हो, लेकिन रामदेव का अनशन खत्म होने से कुछ निराशा ज़रूर हुई है। घुमक्कड़ पत्रकार आशीष कुमार अंशु की आंखो-देखी :

– आशीष कुमार अंशु
दिल्ली से शनिवार की सुबह तीन बजे ही बाबा रामदेव के आश्रम के लिए निकल गया था। उत्सुकता थी, उनके समर्थकों से मिलने की। सोचा था कि पातंजली योग पीठ में भारी भीड़ होगी। इस बात की जानकारी बिल्कुल नहीं थी कि शनिवार को गंगा दशहरा का त्योहार है। इसलिए यह भ्रम हुआ कि रास्ते में जो …